कथक नृत्यांगना डॉ. शाम्भवी शुक्ला मिश्रा को मिला “शारदा-श्री” सम्मान

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (22/02/2026): ग्रेटर नोएडा की रहने वाली भारतीय शास्त्रीय नृत्य की प्रतिष्ठित कलाकार डॉ. शाम्भवी शुक्ला मिश्रा (Dr. Shambhavi Shukla Mishra) को कथक के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मेरठ के स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय द्वारा “शारदा-श्री” सम्मान से सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित समारोह में कला, शिक्षा और संस्कृति जगत की अनेक हस्तियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के निदेशक डॉ. शोभित नाहर सहित अतिथियों ने उन्हें स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया और उनके योगदान की सराहना की।

बचपन से शुरू हुआ साधना का सफर

डॉ. शाम्भवी ने बहुत कम उम्र से कथक (Kathak) सीखना शुरू किया और लगातार अभ्यास, अनुशासन और समर्पण से अपनी कला को निखारा। पिछले कई वर्षों से वे मंच प्रस्तुतियाँ दे रही हैं, विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दे रही हैं और कथक से जुड़े शोध व लेखन कार्य में सक्रिय हैं। वे कथक में गोल्ड मेडलिस्ट (Gold Medalist) हैं तथा संस्कृत विषय में भी स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त कर चुकी हैं, जिससे उनकी प्रस्तुति में शास्त्रीयता और साहित्यिक गहराई स्पष्ट दिखाई देती है।

गुरु-शिष्य परंपरा की मजबूत नींव

डॉ. शाम्भवी ने कथक की शिक्षा प्रसिद्ध गुरु पंडित राजेंद्र गंगानी से प्राप्त की, जो जयपुर घराने के प्रमुख आचार्य माने जाते हैं। इस परंपरा के मार्गदर्शन ने उनके नृत्य में तकनीकी शुद्धता, लयबद्धता और भाव-अभिव्यक्ति की विशेष पहचान बनाई। गुरु के निर्देशन में उन्होंने न केवल प्रस्तुति की कला सीखी बल्कि कथक की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गहराई को भी समझा।

कथक में नवाचार और रचनात्मकता

डॉ. शाम्भवी की पहचान एक प्रयोगधर्मी कलाकार के रूप में भी है। उन्होंने कथक में लोकभाषा और क्षेत्रीय अभिव्यक्तियों का समावेश कर इसे दर्शकों के लिए अधिक सहज और प्रभावी बनाया। उनकी मौलिक नृत्य रचनाएँ पारंपरिक शैली को बनाए रखते हुए आधुनिक प्रस्तुति का संतुलन दिखाती हैं। उनकी पुस्तक “कथक-विनियोग” कथक सीखने वालों और शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी सामग्री मानी जाती है।

शिक्षण और सांस्कृतिक योगदान

डॉ. शाम्भवी लंबे समय से विद्यार्थियों को कथक सिखा रही हैं और विभिन्न संस्थानों में गुरु एवं अतिथि संकाय के रूप में सेवाएँ दे चुकी हैं। इनमें कथक केंद्र और एमिटी यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान शामिल हैं। उनके प्रशिक्षण से कई छात्र-छात्राएँ मंच पर प्रस्तुति दे रहे हैं और कथक की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।

सम्मान पर भावुक प्रतिक्रिया

सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. शाम्भवी ने कहा कि यह उपलब्धि केवल उनकी नहीं, बल्कि उनके गुरु, परिवार, शिष्यों और कथक प्रेमियों की सामूहिक मेहनत का परिणाम है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य युवाओं को भारतीय शास्त्रीय कलाओं से जोड़ना और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

सांस्कृतिक जगत में उत्साह

सम्मान की घोषणा के बाद कला प्रेमियों, विद्यार्थियों और सांस्कृतिक मंचों पर उन्हें बधाइयाँ दी गईं। कई लोगों ने इसे कथक जैसी शास्त्रीय कला के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि बताया और कहा कि ऐसे सम्मान कलाकारों को आगे बढ़ने की नई ऊर्जा देते हैं।

डॉ. शाम्भवी शुक्ला मिश्रा की उपलब्धि यह दर्शाती है कि निरंतर अभ्यास, परंपरा के प्रति सम्मान और रचनात्मक सोच से कलाकार न केवल व्यक्तिगत सफलता हासिल करता है, बल्कि पूरी कला परंपरा को भी नई पहचान दिलाता है। उनका यह सम्मान कथक और भारतीय संस्कृति के प्रति उनके समर्पण का सशक्त प्रमाण है।।


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