ITS डेंटल काॅलेज में दंत शिक्षा (सीडीई) कार्यक्रम का आयोजन
दिनांक 14, फरवरी 2026 को आई0टी0एस0 डेंटल काॅलेज, हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, ग्रेटर नोएडा में प्रोस्थोडाॅन्टिक्स विभाग द्वारा “मिनिमली इनवेसिव स्माइल एन्हांसमेंट” विषय पर एक सतत दंत शिक्षा (सीडीई) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस शैक्षणिक कार्यक्रम का उद्देश्य दंत चिकित्सकों, विद्यार्थियों एवं इंन्टन्र्स को आधुनिक और कम आक्रामक (मिनिमली इनवेसिव) तकनीकों के माध्यम से मधुर मुस्कान निखारने के नवीनतम तरीकों से अवगत कराना था।
इस अवसर पर आई0टी0एस द एजुकेशन ग्रुप के चेयरमैन आर0 पी0 चड्ढा, उपाध्यक्ष सोहिल चड्ढा, सचिव बी0 के0 अरोरा, संस्थान के प्रधानाचार्य डाॅ0 सचित आनंद अरोरा और प्रोस्थोडाॅन्टिक्स विभाग के विभागाअध्यक्ष डाॅ पुनीत आर0 एस0 खुराना की उपस्थिति में कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, मशहूर दंत चिकित्सक, डाॅ0 अरविंद शेनाॅय ने “मिनिमली इनवेसिव स्माइल एन्हांसमेंट” विषय पर अपने व्याख्यान में कहा कि आधुनिक दंत चिकित्सा का मूल उद्देश्य केवल सौंदर्य सुधार नहीं, बल्कि असली दांतों को सुरक्षित रखते हुए लम्बे समय तक टिकाऊ बनाना है। डाॅ0 शेनाॅय ने बताया कि आज के युग में मरीज जागरूक हैं और वे ऐसे उपचार विकल्प चाहते हैं जो कम दर्दनाक हों, कम समय में पूर्ण और प्राकृतिक दिखने वाले परिणाम दें। उन्होंने डिजिटल स्माइल डिजाइन, एडवांस्ड बाॅन्डिग तकनीक और उच्च गुणवत्ता वाली सिरेमिक सामाग्रियों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सही निदान और वैज्ञानिक उपचार योजना सफलता की कुंजी है।
प्रोस्थोडाॅन्टिक्स विभाग के विभागाअध्यक्ष डाॅ पुनीत आर0 एस0 खुराना ने ”मिनिमली इनवेसिव स्माइल एन्हांसमेंट” विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आधुनिक दंत चिकित्सा में नवाचार और संरक्षणवादी दृष्टिकोण का समन्वय अत्यंत आवश्यक है।
संस्थान के प्रधानाचार्य डाॅ0 सचित आनंद अरोरा ने बताया कि इस प्रकार के सीडीई कार्यक्रम विद्यार्थियों और दंत चिकित्सकों को नवीनतम तकनीकों एवं वैज्ञानिक प्रगति से अद्यतन रखते हैं। उन्होंने विभाग के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन संस्थान की शैक्षणिक उत्कृष्टता और गणवत्ता शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
आई0टी0एस0 – द एजूकेशन ग्रुप उपाध्यक्ष सोहिल चड्ढा ने कार्यशाला की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम न केवल शैक्षणिक गुणवत्ता को बढाते हैं, बल्कि विद्यार्थियों को उन्नत नकनीकों से रूबरू कराते हुए उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए अधिक सक्षम बनाते हैं। उन्होंने आगे कहा कि आगे भी समय-समय पर इस प्रकार के तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।
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