वंतारा प्रोजेक्ट पर उठे सवाल: कार्बन क्रेडिट, जैव विविधता और संसाधनों को लेकर नई बहस
टेन न्यूज नेटवर्क
National News (09/02/2026): जामनगर में स्थित वंतारा प्रोजेक्ट को लेकर हाल के दिनों में कई अहम पहलुओं पर चर्चा तेज हो गई है। यह क्षेत्र, जो पहले औद्योगिक गतिविधियों और रिफाइनरी से निकलने वाले धुएं के लिए जाना जाता था, अब करीब 3500 एकड़ के हरित क्षेत्र के रूप में विकसित किया गया है।
वर्ष 2026 में लागू कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम के तहत प्रदूषण अब केवल सामाजिक मुद्दा नहीं, बल्कि एक आर्थिक जिम्मेदारी भी बन गया है। भारत ने वर्ष 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है। इस योजना के तहत तय सीमा से अधिक प्रदूषण करने वाली कंपनियों को कार्बन क्रेडिट खरीदना होता है या जुर्माना देना पड़ता है। वंतारा में लगाए गए लगभग एक करोड़ पेड़ कंपनियों को आंतरिक रूप से कार्बन क्रेडिट प्राप्त करने में मदद करते हैं।
रिलायंस की रिफाइनरी से निकलने वाले उत्सर्जन की भरपाई के लिए वंतारा को एक आंतरिक कार्बन क्रेडिट स्रोत के रूप में देखा जा रहा है, जिससे कंपनी को बाहरी क्रेडिट खरीदने की आवश्यकता कम होती है और बड़ी आर्थिक बचत होती है।
कानूनी दृष्टि से वंतारा को एक निजी चिड़ियाघर नहीं, बल्कि सेंट्रल ज़ू अथॉरिटी के अंतर्गत रेस्क्यू और रिहैबिलिटेशन सेंटर के रूप में पंजीकृत किया गया है। वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट, 1972 के अनुसार किसी भी व्यक्ति को जंगली जानवर पालने की अनुमति नहीं है, लेकिन रेस्क्यू सेंटर के रूप में पंजीकरण होने से वंतारा को कानूनी मान्यता मिलती है। यहां मौजूद जानवरों को खरीदने के बजाय एक्सचेंज प्रोग्राम और सरकारी डोनेशन के माध्यम से लाया गया है।
भविष्य में बायोडायवर्सिटी क्रेडिट्स को लेकर भी वंतारा की, भूमिका अहम मानी जा रही है। वर्ष 2024 से लागू नियमों के अनुसार, जंगलों की कटाई करने वाली कंपनियों को बायोडायवर्सिटी यूनिट्स खरीदनी होती हैं। वंतारा में मौजूद लगभग 39 हजार प्रजातियां इसे जैव विविधता के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करती हैं।
वंतारा की प्रयोगशालाओं में जानवरों का डीएनए डेटा सुरक्षित किया जा रहा है। इस जेनेटिक जानकारी को भविष्य में दवाओं और टीकों के विकास के लिए महत्वपूर्ण बौद्धिक संपदा के रूप में देखा जा रहा है।
जल संसाधनों को लेकर भी, वंतारा पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। जामनगर एक सूखा क्षेत्र माना जाता है, लेकिन वंतारा के अंदर कृत्रिम झीलें और वेटलैंड्स विकसित किए गए हैं। किसी क्षेत्र के संरक्षित वन घोषित होने के बाद वहां गिरने वाले वर्षा जल और भूजल पर संबंधित संस्था का नियंत्रण स्थापित हो जाता है।
वंतारा प्रोजेक्ट का असर कंपनी के ईएसजी (एनवायरनमेंटल, सोशल और गवर्नेंस) स्कोर पर भी पड़ता है। बेहतर ईएसजी रेटिंग के चलते अंतरराष्ट्रीय बैंकों से कम ब्याज दर पर कर्ज मिलने में मदद मिलती है। वंतारा को कंपनी की पर्यावरण-अनुकूल छवि मजबूत करने के माध्यम के रूप में देखा जा रहा है।
पूरे मामले में यह सवाल उठ रहा है कि, वंतारा वास्तव में वन्यजीव संरक्षण का केंद्र है या फिर पर्यावरण, संसाधनों और जैव विविधता को आर्थिक रणनीति से जोड़ने का एक नया मॉडल। इस परियोजना को लेकर आने वाले समय में और चर्चा होने की संभावना है।
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