Engineer Yuvraj Death Case: उच्च न्यायालय ने अभय कुमार की रिहाई के दिए आदेश

टेन न्यूज नेटवर्क

GREATER NOIDA News (06/02/2026): युवराज की मौत से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने गिरफ्तारी के दौरान सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय अनिवार्य दिशा-निर्देशों की अवहेलना को संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन मानते हुए याचिकाकर्ता अभय कुमार को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने हैबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट कहा कि पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारी कानून की मूल भावना के विपरीत थी। अदालत ने माना कि गिरफ्तारी के समय अरेस्ट मेमो से जुड़ी आवश्यक औपचारिकताओं, विशेष रूप से क्लॉज-13, का पालन नहीं किया गया, जबकि यह सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत अनिवार्य है।

एमजेड बिजटाउन के निदेशक अभय कुमार की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया था कि पुलिस ने उन्हें नियमों की अनदेखी करते हुए हिरासत में लिया। याचिका में यह भी मांग की गई थी कि उनकी गिरफ्तारी, पुलिस हिरासत और न्यायिक रिमांड को अवैध घोषित किया जाए। कोर्ट ने दलीलों पर सहमति जताते हुए कहा कि जब गिरफ्तारी ही वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बिना की गई हो, तो उसके आधार पर आगे की गई समस्त कार्रवाई स्वतः ही कानूनन टिकाऊ नहीं रह जाती।

हाईकोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा 20 जनवरी और 21 जनवरी 2026 को पारित किए गए रिमांड आदेशों को भी अवैध ठहराया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि गैरकानूनी गिरफ्तारी पर आधारित कोई भी रिमांड आदेश वैध नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर संबंधित अधिकारियों को अभय कुमार को तत्काल मुक्त करने का निर्देश दिया गया।

खंडपीठ ने कहा कि यह मामला हाल में दिए गए ‘उमंग रस्तोगी बनाम राज्य सरकार’ फैसले से पूरी तरह मेल खाता है। इसके साथ ही अदालत ने ‘मिहिर राजेश बनाम महाराष्ट्र राज्य’ मामले का उल्लेख करते हुए दोहराया कि गिरफ्तारी के समय पारदर्शिता, जवाबदेही और आरोपी के अधिकारों की रक्षा पुलिस की संवैधानिक जिम्मेदारी है।

अभय कुमार की ओर से पेश अधिवक्ता रिंकू तोंगड़ और राजीव तोंगड़ ने अदालत को बताया कि गिरफ्तारी से पहले न तो अरेस्ट मेमो की प्रति दी गई और न ही उसमें उल्लिखित अनिवार्य शर्तों का पालन किया गया। गौरतलब है कि इस मामले में लोटस ग्रीन के दो कर्मचारियों—रवि बंसल और सचिन करनवाल—को पहले ही जमानत मिल चुकी है, जबकि निर्मल सिंह के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट को भी निरस्त किया जा चुका है।

हालांकि, इससे पहले गौतमबुद्ध नगर की निचली अदालत ने अभय कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी थी और मामले की अगली सुनवाई 13 फरवरी को निर्धारित की गई थी। लेकिन हाईकोर्ट के इस फैसले ने पूरे प्रकरण को नई दिशा दे दी है।


प्रिय पाठकों एवं दर्शकों, प्रतिदिन भारत सरकार , दिल्ली सरकार, राष्ट्रीय एवं दिल्ली राजनीति ,   दिल्ली मेट्रो, दिल्ली पुलिस तथा दिल्ली नगर निगम, NDMC, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र की ताजा एवं बड़ी खबरें पढ़ने के लिए hindi.tennews.in : राष्ट्रीय न्यूज पोर्टल को विजिट करते रहे एवं अपनी ई मेल सबमिट कर सब्सक्राइब भी करे। विडियो न्यूज़ देखने के लिए TEN NEWS NATIONAL यूट्यूब चैनल को भी ज़रूर सब्सक्राइब करे।

टेन न्यूज हिंदी | Ten News English | New Delhi News | Greater Noida News | NOIDA News | Yamuna Expressway News | Jewar News | NOIDA Airport News.


Discover more from टेन न्यूज हिंदी

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

टिप्पणियाँ बंद हैं।