संघर्ष से शिखर तक: हार्दिक पांड्या की प्रेरणादायक सफलता की कहानी

टेन न्यूज नेटवर्क

National News (05/02/2026): भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या का जन्म 11 अक्टूबर 1993 को सूरत में हुआ था। उनके पिता हिमांशु पांड्या एक व्यवसायी थे। बच्चों के क्रिकेट के प्रति जुनून को देखते हुए उन्होंने वर्ष 1998 में अपना कारोबार छोड़ दिया और परिवार के साथ वडोदरा शिफ्ट हो गए, ताकि हार्दिक और उनके भाई कुणाल को किरण मोरे क्रिकेट एकेडमी में प्रशिक्षण मिल सके।

वडोदरा में परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई। पिता को तीन बार हार्ट अटैक आया और काम भी नहीं मिल सका। इस दौरान कई बार दोनों भाइयों ने मात्र 10 रुपये की मैगी खाकर पूरा दिन गुजारा। कठिन हालात के बावजूद उन्होंने क्रिकेट से नाता नहीं छोड़ा।

हार्दिक की शुरुआत, एक लेग स्पिनर के रूप में हुई थी, लेकिन एक दिन एकेडमी में तेज गेंदबाज न होने के कारण कोच ने उन्हें पेस बॉलिंग करने को कहा। उनकी रफ्तार और प्रदर्शन ने सभी को प्रभावित किया और यहीं से उनके करियर को नई दिशा मिली।

साल 2015 में मुंबई इंडियंस ने उन्हें 10 लाख रुपये में खरीदा। चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ एक मैच में 8 गेंदों पर 21 रन बनाकर उन्होंने सबका ध्यान खींचा। उनके टैलेंट को देखकर सचिन तेंदुलकर ने भविष्यवाणी की थी कि वह जल्द ही भारत के लिए खेलेंगे। सात महीने के भीतर ही हार्दिक ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया।

वर्ष, 2018 में पीठ की गंभीर चोट के कारण उनके करियर पर संकट आ गया था और उन्हें सर्जरी करानी पड़ी। इसके बावजूद उन्होंने मेहनत जारी रखी और एक मजबूत ऑलराउंडर के रूप में वापसी की।

साल 2019 में एक टॉक शो में दिए गए बयानों के कारण वह विवादों में आ गए और उन्हें निलंबन झेलना पड़ा। इस दौर में उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने प्रदर्शन से दोबारा खुद को साबित किया।

2022 में हार्दिक पांड्या को गुजरात टाइटंस की कप्तानी सौंपी गई। उन्होंने पहले ही सीजन में टीम को आईपीएल चैंपियन बना दिया। यह उनके करियर की बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा।

आईपीएल 2024 के दौरान उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और आलोचना का सामना करना पड़ा। इसके बाद टी-20 वर्ल्ड कप में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ फाइनल मुकाबले के अंतिम ओवर में जीत दिलाकर वह भावुक हो गए और मैदान पर ही रो पड़े।

हार्दिक पांड्या को महंगी घड़ियों का शौक है। इसके पीछे उनके पिता की याद जुड़ी है। उनके पिता को घड़ियों का शौक था, लेकिन आर्थिक स्थिति के कारण वह इन्हें खरीद नहीं पाए। हार्दिक अपनी घड़ियों के जरिए अपने पिता के संघर्ष को सम्मान देते हैं।

हार्दिक पांड्या की यह कहानी संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास की मिसाल है। उन्होंने गरीबी, चोट, विवाद और आलोचना का सामना करते हुए अपने दम पर भारतीय क्रिकेट में एक मजबूत पहचान बनाई है।

डिस्क्लेमर: यह लेख / न्यूज आर्टिकल सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध जानकारी और प्रतिष्ठित / विश्वस्त मीडिया स्रोतों से मिली जानकारी पर आधारित है।यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। पाठक कृपया स्वयं इस की जांच कर सूचनाओं का उपयोग करे ॥


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