इंजीनियर युवराज की मौत के बाद खुली नींद, 2 साल से लंबित प्रोजेक्ट्स को मिली मंजूरी | Noida Authority

टेन न्यूज नेटवर्क

NOIDA News (05/02/2026): सेक्टर-150 और आसपास के इलाकों में वर्षों से चली आ रही जलभराव की समस्या अब स्थायी समाधान की ओर बढ़ती दिख रही है। जिस बेसमेंट में युवराज की कार डूबी थी, वह करीब 70 फीट गहरा था और वर्ष 2022 से वहां पानी भरना शुरू हो गया था। 2023 में हिंडन और यमुना में आई बाढ़ के बाद स्थिति और गंभीर हो गई, जिससे यह इलाका एक तरह के तालाब में तब्दील हो गया। पानी पुश्ते से टकराकर रुक गया और नदी में वापस नहीं जा सका, जिसके चलते खाली प्लॉट्स और विकसित क्षेत्रों में जलजमाव बढ़ता चला गया।

अब इस समस्या के समाधान के लिए उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग द्वारा सेक्टर-150 में एक हेड रेगुलेटर के निर्माण को अंतिम मंजूरी दे दी गई है। इस परियोजना पर लगभग 23 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिसकी पूरी राशि नोएडा प्राधिकरण द्वारा सिंचाई विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी। यह वही परियोजना है, जो बीते दो वर्षों से फाइलों में दबी हुई थी और 2023 से औपचारिक रूप से बंद मानी जा रही थी।

दरअसल, सिंचाई विभाग ने वर्ष 2015 में ही यह प्रस्ताव तैयार कर लिया था। योजना के तहत सेक्टर-150 समेत आसपास के विकसित हो रहे क्षेत्रों के बारिश के पानी को एक नियंत्रित नाले के माध्यम से हिंडन नदी में प्रवाहित किया जाना था। यदि यह हेड रेगुलेटर समय पर बन जाता, तो खाली भूखंडों और रिहायशी इलाकों में जलभराव की नौबत नहीं आती।

इस लंबे विलंब की पूरी जानकारी 9 अक्टूबर 2023 को सामने आई, जब सिंचाई निर्माण खंड, गाजियाबाद के कार्यकारी अभियंता ने नोएडा प्राधिकरण के वर्क सर्किल-10 के वरिष्ठ प्रबंधक को एक विस्तृत पत्र भेजा। पत्र में 2015 से 2023 तक हुए तमाम पत्राचार का उल्लेख है, जिनमें बार-बार यह चेतावनी दी गई थी कि बारिश के पानी की निकासी के लिए हिंडन नदी तक उचित व्यवस्था आवश्यक है।

पत्र के अनुसार, 4 अक्टूबर 2023 को प्रस्तावित रेगुलेटर स्थल पर संयुक्त निरीक्षण किया गया था। इस निरीक्षण में नोएडा प्राधिकरण के डिप्टी जनरल मैनेजर (सिविल एवं जल), वरिष्ठ और सहायक प्रबंधक, साथ ही सिंचाई विभाग के अभियंता मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि अब अन्य सेक्टरों का स्टॉर्म वॉटर भी इसी नाले से जुड़ चुका है, जिससे भविष्य में पानी के डिस्चार्ज की मात्रा और बढ़ सकती है।

रिकॉर्ड बताते हैं कि फरवरी 2016 में नोएडा प्राधिकरण ने सर्वेक्षण, डिजाइन और ड्रॉइंग के लिए सिंचाई विभाग को 13.5 लाख रुपये जारी किए थे। प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के आधार पर एक कंसल्टेंट के जरिए डिजाइन तैयार कराया गया, जिसे बाद में आईआईटी दिल्ली से तकनीकी स्वीकृति भी मिली।

शुरुआती योजना में मैकेनिकल गेट वाले हेड रेगुलेटर का प्रस्ताव था, लेकिन अक्टूबर 2023 के निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने इसे तकनीकी रूप से अपर्याप्त बताया। बढ़ते डिस्चार्ज को देखते हुए मैकेनिकल गेट के स्थान पर हाइड्रोलिक या न्यूमैटिक गेट लगाने का सुझाव दिया गया। इसके बाद संशोधित डिजाइन तैयार कराया गया, जिस पर करीब 30 लाख रुपये खर्च हुए।

नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश के अनुसार हेड रेगुलेटर के निर्माण का कार्य सिंचाई विभाग द्वारा किया जाएगा और इसके लिए अनुबंध के अनुसार सभी आवश्यक अनुमोदन दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि परियोजना का काम जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा, जिससे सेक्टर-150 और उससे जुड़े अन्य क्षेत्रों को जलभराव की समस्या से स्थायी राहत मिल सकेगी। इस परियोजना के पूरा होने के बाद न सिर्फ बारिश के पानी की वैज्ञानिक निकासी सुनिश्चित होगी, बल्कि भविष्य में बाढ़ जैसी परिस्थितियों में भी क्षेत्र को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।


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