National News (03 फरवरी 2026): सरकार का ध्यान देश की संपूर्ण वस्त्र मूल्य श्रृंखला के समग्र विकास पर केंद्रित है और कपड़ा क्षेत्र को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न योजनाओं/पहल को लागू कर रही है। इन प्रमुख योजनाओं/पहल में प्रधानमंत्री मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन्स एंड अपैरल (पीएम मित्रा) पार्क योजना शामिल है जिसका उद्देश्य आधुनिक, एकीकृत और विश्व स्तरीय वस्त्र अवसंरचना का निर्माण करना है, मानव निर्मित फाइबर और परिधान तथा तकनीकी वस्त्रों पर केंद्रित उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना जिसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर विनिर्माण को बढ़ावा देना और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना है, अनुसंधान, नवाचार और विकास, संवर्धन और बाजार विकास, कौशल विकास और निर्यात संवर्धन पर केंद्रित राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन, रेशम उत्पादन मूल्य श्रृंखला के व्यापक विकास के लिए सिल्क समग्र-2, मांग आधारित, रोजगारोन्मुख और कौशल विकास कार्यक्रम प्रदान करने के उद्देश्य से वस्त्र क्षेत्र में क्षमता निर्माण के लिए समर्थ योजना, हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्रों को पूर्ण समर्थन प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम, कच्चा माल आपूर्ति योजना (आरएमएसएस), राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम और व्यापक हस्तशिल्प क्लस्टर विकास योजना (सीएचसीडीएस) आदि शामिल हैं।
राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम और कच्चा माल आपूर्ति योजना के अंतर्गत पात्र हथकरघा एजेंसियों/श्रमिकों को कच्चे माल, उन्नत करघों और सहायक उपकरणों की खरीद (नई प्रौद्योगिकी प्रदान करने), सौर प्रकाश इकाइयों, कार्यशालाओं के निर्माण, उत्पाद विविधीकरण और डिजाइन नवाचार, तकनीकी और सामान्य बुनियादी ढांचे, भारत हथकरघा ब्रांड (आईएचबी), हथकरघा चिह्न (एचएलएम) और जीआई टैग के माध्यम से प्रचार और ब्रांड विकास , ई-कॉमर्स सुविधाओं, घरेलू/विदेशी बाजारों में हथकरघा उत्पादों के विपणन, बुनकरों की मुद्रा योजना के अंतर्गत रियायती ऋण और सामाजिक सुरक्षा आदि के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम (एनएचडीपी) और व्यापक हस्तशिल्प क्लस्टर विकास योजना के अंतर्गत विपणन कार्यक्रमों, कौशल विकास, क्लस्टर विकास, उत्पादक कंपनियों के गठन, कारीगरों को प्रत्यक्ष लाभ, बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकी सहायता और अनुसंधान एवं विकास सहायता के माध्यम से कारीगरों को संपूर्ण सहायता प्रदान करने के लिए आवश्यकता आधारित वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है जिससे पूरे देश में पारंपरिक शिल्पकारों और कारीगरों को लाभ होता है। इसके अतिरिक्त एनटीटीएम के अनुसंधान, नवाचार और विकास घटक के अंतर्गत एक विशिष्ट हस्तक्षेप जैसे, तकनीकी वस्त्रों के क्षेत्र में उभरते नवप्रवर्तकों के लिए अनुसंधान और उद्यमिता अनुदान (जीआरईएटी) योजना का उद्देश्य तकनीकी वस्त्रों के क्षेत्र में युवा नवप्रवर्तकों, वैज्ञानिकों/प्रौद्योगिकीविदों और स्टार्टअप उद्यमों को उनके विचारों को व्यावसायिक प्रौद्योगिकियों/उत्पादों में परिवर्तित करने के लिए प्रोत्साहित करना है। जीआरईएटी योजना के अंतर्गत, प्रत्येक स्वीकृत परियोजना के लिए 50 लाख रुपए तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
वाराणसी और मेरठ के बुनकर सेवा केंद्रों (डब्ल्यूएससी) और वाराणसी के भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएचटी) के माध्यम से उत्तर प्रदेश के देवरिया और बलिया जिलों के हथकरघा कामगारों/बुनकरों सहित ऐसे कारीगरों के लिए बुनाई, रंगाई, छपाई, डिजाइनिंग आदि जैसे तकनीकी क्षेत्रों में समर्थ (वस्त्र क्षेत्र में क्षमता निर्माण योजना) के अंतर्गत आवश्यकता-आधारित कौशल उन्नयन प्रशिक्षण आयोजित किया जाता है। उत्तर प्रदेश राज्य में समर्थ योजना के अंतर्गत कुल 1,10,940 लाभार्थियों को प्रशिक्षित (सफल) किया गया है जिनमें देवरिया जिले में 205 और बलिया जिले में 6,837 लाभार्थी शामिल हैं।
उच्च गुणवत्ता वाले हथकरघा उत्पादों की ब्रांडिंग के लिए ‘इंडिया हैंडलूम’ ब्रांड (आईएचबी) का शुभारंभ किया गया है। इसका उद्देश्य उच्च गुणवत्ता, प्रामाणिक डिज़ाइन, दोषरहित उत्पाद और पर्यावरण पर शून्य प्रभाव वाले विशिष्ट हथकरघा उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा देना है। बुनकरों के उत्पादों के विपणन और बिक्री के लिए देश के विभिन्न भागों में घरेलू विपणन कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। हथकरघा उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए हथकरघा निर्यात संवर्धन परिषद (हैंडलूम एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल-एचईपीसी) विभिन्न अंतरराष्ट्रीय विपणन मेलों/कार्यक्रमों में भाग लेती है/उनका आयोजन करती है।
कपड़ा राज्य मंत्री पबित्रा मार्गरीटा ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
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