भारत ने चार वर्ष में आठ मुक्त व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल
टेन न्यूज नेटवर्क
National News (31 जनवरी 2026): भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर बात करते हुए, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ग्रेटर नोएडा में इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) की ओर से आयोजित विश्व लेखा मंच को संबोधित करते हुए कहा कि यह समझौता लगभग एक तिहाई आबादी को कवर करता है, और ग्लोबल जीडीपी का लगभग 25 प्रतिशत हिस्से को प्रभावित करता है और वैश्विक व्यापार में एक महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखता है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय आयोग की अध्यक्षा की ओर से भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को “सभी समझौतों की जननी” कहना कोई छोटी बात नहीं है।
यूरोपीय बाजार की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि अकेले यूरोपीय संघ लगभग 7 ट्रिलियन डॉलर मूल्य की वस्तुएं और 3 ट्रिलियन डॉलर मूल्य की सेवाएं आयात करता है, जो मिलकर 10 ट्रिलियन डॉलर का बाजार बनाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत का वर्तमान निर्यात इस क्षमता का एक छोटा सा हिस्सा भर है और इस विषय पर जोर दिया कि भारत के सामने अभूतपूर्व अवसर हैं, जिन्हें निश्चित रूप से भुनाया जाना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत ने बीते चार वर्ष में आठ मुक्त व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ देश की भागीदारी में एक आधारभूत बदलाव को प्रतिबिंबित करते हैं। उन्होंने कहा कि ये समझौते यूरोप और अन्य क्षेत्रों की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं को कवर करते हैं, जिनमें 27 देशों का यूरोपीय संघ, स्विट्जरलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और आइसलैंड से मिलकर बना चार देशों का ईएफटीए ब्लॉक, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान शामिल हैं। मंत्री जी ने कहा कि ये समझौते भारतीय प्रतिभा, कौशल और युवा पेशेवरों के लिए नए और महत्वपूर्ण मौके पैदा कर रहे हैं, साथ ही वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ भारत के एकीकरण को सुदृढ़ कर रहे हैं।
वाणिज्य मंत्री ने आगे जोड़ते हुए कहा कि भारत जल्द ही चिली के साथ एक मुक्त व्यापार समझौता करेगा, जिससे महत्वपूर्ण खनिजों तक पहुंच सुनिश्चित होगी। ईएफटीए देशों के साथ हुए समझौते का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें भारत में 100 बिलियन डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की प्रतिबद्धता शामिल है, जिसका उद्देश्य इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण, नवाचार और सुस्पष्ट मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहन देना है। उन्होंने कहा कि इस निवेश से लगभग 50 लाख रोजगार निर्मित होने की संभावना है। उन्होंने यह भी बताया कि न्यूजीलैंड अगले 15 वर्ष में भारत में 20 बिलियन डॉलर का निवेश करने के प्रति प्रतिबद्ध है, जबकि बीते 25 वर्ष में उसका कुल निवेश केवल 70 मिलियन डॉलर रहा है।
पियूष गोयल ने कहा कि ये प्रतिबद्धताएं भारत की आर्थिक विकास की गति, युवा जनसांख्यिकीय लाभ, कौशल आधार और ईमानदारी में बढ़ते वैश्विक भरोसे को स्पष्ट रूप से प्रतिबिंबित करती हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय पेशेवर शिक्षित, महत्वाकांक्षी, मेहनती और वैश्विक स्तर पर भरोसेमंद हैं।
केंद्रीय मंत्री गोयल ने 2047 तक भारत को एक विकसित और समृद्ध राष्ट्र बनाने की दिशा में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने भारत को विकसित भारत के लक्ष्य का अभिन्न अंग बनाने का निश्चय किया है। उनका लक्ष्य है कि जब देश स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ मनाए, तब तक भारत 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन चुका हो। उन्होंने इस विषय पर जोर दिया कि चार्टर्ड अकाउंटेंट्स न केवल भारत में बल्कि भारत और बाकी दुनिया के बीच एक ब्रिज के तौर पर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
हालिया वैश्विक परिदृश्य का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि दुनिया अस्थिर, अनिश्चित, जटिल और अस्पष्ट दौर से गुजर रही है। उन्होंने मौजूदा स्थिति को वास्तव में अशांति भरा और अप्रत्याशित दौर बताते हुए कहा कि बदलाव बहुत तेजी से हो रहे हैं और केवल भरोसा, प्रतिभा, कौशल, दूरदृष्टि और भविष्य की योजना बनाने का साहस रखने वाले ही सफल होंगे। पीयूष गोयल ने कहा कि ऐसी अनिश्चितता के बीच भारत स्थिरता के प्रतीक के तौर पर उभरा है।
केंद्रीय मंत्री ने इस विषय पर जोर दिया कि आज भारत के पास मजबूत व्यापक आर्थिक बुनिया है और भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिसमें तेज प्रगति दर और कम महंगाई है। उन्होंने कहा कि भारत की बैंकिंग प्रणाली मजबूत है और विदेशी मुद्रा भंडार भी सुदृढ़ है। वैश्विक व्यापार बाजारों में उथल-पुथल के बावजूद, भारत के वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात मौजूदा वर्ष में भी लगातार बढ़ रहा है। 14 लाख भारतीयों की क्षमता पर भरोसा व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि भारत लगातार विकास करता रहेगा और जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।
पीयूष गोयल ने देश की बदलती मानसिकता के बारे में बात की और याद दिलाया कि 2014 में भारत दुनिया की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था को बदलने, नागरिकों में भरोसा जगाने और विकास को गति देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व की जरूरत थी। उन्होंने जोड़ा कि भारत अब पहले के अनुमानों से कहीं पहले विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के प्रति आश्वस्त है, और यह बदलाव देश के दूरस्थ कोनों में भी दिखाई देता है। उन्होंने बताया कि भारत अब दुनिया के साथ संकोच या रक्षात्मकता की स्थिति से नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और भरोसे के साथ व्यवहार करता है। उन्होंने आगे कहा कि भारत अब निष्पक्ष, न्यायसंगत और संतुलित मुक्त व्यापार समझौतों में प्रवेश करता है।
पेशेवरों की भूमिका पर जोर देते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के पास भारत और विदेशों में, वैश्विक क्षमता केंद्रों, निवेशों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के साथ, महत्वपूर्ण अवसर हैं। उन्होंने कहा कि यह पेशा सही और निष्पक्ष खातों के प्रमाणन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ता है और देश में पूंजी आकर्षित होती है।
मंत्री ने बताया कि भारत में 184 शाखाओं और 47 देशों में कार्यरत 4.25 लाख से अधिक सक्रिय पेशेवरों के साथ-साथ 5.25 लाख से अधिक चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के साथ, यह पेशा वैश्विक स्तर पर भारत की क्षमता को प्रदर्शित करने के लिए अच्छी स्थिति में है। उन्होंने कहा कि भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का कठोर प्रशिक्षण और व्यापक जानकारी उन्हें दुनिया में कहीं भी प्रदर्शित करने में सक्षम बनाता है।
पीयूष गोयल ने पेशेवरों को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करते हुए चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को असीम आकांक्षाएं रखने, साझेदारी बनाने, संचालन का विस्तार करने और वैश्विक मौकों का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कौशल विकास, आराम के दायरे से बाहर निकलने और अमृत काल के अवसरों के लिए तैयार रहने का आह्वान किया।
मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार, मैन्युफैक्चरिंग और सेवाओं जैसे क्षेत्रों को शामिल करते हुए व्यावसायिक प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम में वैश्विक अनुभव को एकीकृत करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी देश दुनिया से संपर्क किए बिना विकास नहीं कर सकता और उन्होंने इस पेशे से जुड़े लोगों से वैश्विक अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने के लिए खुद को तैयार करने का आग्रह किया।
अपने संबोधन के समापन में पीयूष गोयल ने कहा कि यदि पेशेवर लोग सामूहिक तौर पर भारत के विकास में बड़ी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध हों, तो चार्टर्ड अकाउंटेंसी पेशे में अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने और अमृतकाल के दौरान भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की क्षमता है। उन्होंने भरोसा जताया कि यह पेशा भारत को एक विकसित राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय महाशक्ति बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
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