EPI 2024 रिपोर्ट: निर्यात की दौड़ में महाराष्ट्र आगे, नीति आयोग का ज़िलों पर बड़ा फोकस

टेन न्यूज़ नेटवर्क

National News (15/01/2026): नीति आयोग ने ‘निर्यात तैयारी सूचकांक (EPI) 2024’ की नई रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट एक तरह का रिपोर्ट कार्ड है जो बताता है कि भारत के अलग-अलग राज्य और केंद्र शासित प्रदेश दूसरे देशों में सामान बेचने यानी एक्सपोर्ट करने के लिए कितने तैयार हैं। भारत का लक्ष्य है कि साल 2030 तक हम 1 ट्रिलियन डॉलर का सामान विदेशों में बेचें और 2047 तक भारत को एक ‘विकसित राष्ट्र’ बनाएँ। इस रिपोर्ट में साफ़ कहा गया है कि अगर हमें देश को तेज़ी से आगे बढ़ाना है, तो राज्यों के साथ-साथ अब ज़िलों को भी एक्सपोर्ट के लिए पूरी तरह तैयार करना होगा।

नीति आयोग ने राज्यों को परखने के लिए चार मुख्य बातें तय की हैं। पहली है सरकारी नीतियां, यानी राज्य सरकार ने व्यापार के लिए कितने अच्छे नियम बनाए हैं। दूसरी है बिजनेस का माहौल, यानी वहां व्यापारियों को पैसा और अच्छे कामगार कितनी आसानी से मिलते हैं। तीसरी है बुनियादी ढांचा, जिसमें सड़कें, बंदरगाह और बिजली जैसी सुविधाएं देखी जाती हैं। और चौथी है निर्यात का प्रदर्शन, यानी राज्य वास्तव में कितना सामान विदेश भेज पा रहा है और वह सामान दुनिया के बाजारों में टिक पाता है या नहीं।

रैंकिंग के मामले में राज्यों को उनकी बनावट के हिसाब से अलग-अलग समूहों में बांटा गया है, जैसे बड़े राज्य, छोटे राज्य और केंद्र शासित प्रदेश। बड़े राज्यों में महाराष्ट्र सबसे आगे रहा है, उसके बाद तमिलनाडु, गुजरात, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश का नंबर आता है। वहीं छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और नागालैंड जैसे राज्यों ने अपनी कैटेगरी में बहुत शानदार प्रदर्शन किया है।

इस बार की रिपोर्ट की सबसे खास बात यह है कि अब पूरा ध्यान ज़िलों पर दिया जा रहा है। नीति आयोग का मानना है कि असली मुकाबला अब ज़िलों के बीच होना चाहिए। अगर हर ज़िला अपने यहां से कुछ खास सामान बाहर भेजने की तैयारी करेगा, तभी पूरा देश आगे बढ़ पाएगा। इसके लिए ज़िलों के छोटे उद्योगों को मज़बूत बनाने पर ज़ोर दिया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक अगर भारत को दुनिया का लीडर बनना है, तो हमें दो चीज़ों पर सबसे ज़्यादा काम करना होगा: पहली है सामान की क्वालिटी, ताकि हमारे प्रोडक्ट दुनिया के मानकों पर खरे उतरें। और दूसरी है विविधता, यानी हमें सिर्फ एक-दो चीज़ों के भरोसे नहीं रहना चाहिए, बल्कि अलग-अलग तरह के प्रोडक्ट्स को ग्लोबल मार्केट तक पहुँचाना चाहिए।

यह 2024 की रिपोर्ट राज्यों के लिए एक गाइड या ‘नक्शे’ की तरह है, जो उन्हें बताती है कि वे कहाँ मज़बूत हैं और कहाँ उन्हें सुधार करने की ज़रूरत है। जब राज्यों के बीच आगे बढ़ने का मुकाबला होगा और ज़िला स्तर पर सड़कों, बिजली और सरकारी नियमों को बेहतर बनाया जाएगा, तो भारत का सामान पूरी दुनिया में और ज़्यादा बिकेगा। इससे न केवल देश में लाखों नई नौकरियाँ पैदा होंगी, बल्कि हम 1 ट्रिलियन डॉलर के एक्सपोर्ट के अपने बड़े सपने को भी आसानी से पूरा कर पाएंगे।

डिस्क्लेमर: यह लेख / न्यूज आर्टिकल सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध जानकारी और प्रतिष्ठित / विश्वस्त मीडिया स्रोतों से मिली जानकारी पर आधारित है।यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। पाठक कृपया स्वयं इस की जांच कर सूचनाओं का उपयोग करे ॥


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