दूषित पेयजल से ग्रेटर नोएडा में स्वास्थ्य संकट, समिति ने DM और GNIDA CEO से की त्वरित कार्रवाई की मांग
टेन न्यूज नेटवर्क
GREATER NOIDA News (08/01/2025): ग्रेटर नोएडा एवं आसपास के क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता लगातार खराब होती जा रही है, जिससे गंभीर जन-स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हो गया है। इस संबंध में गौतमबुद्ध नगर विकास समिति ने जिलाधिकारी गौतमबुद्ध नगर और ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप और ठोस कार्रवाई की मांग की है।
समिति द्वारा भेजी गई शिकायत में बताया गया है कि नागरिकों द्वारा कराए गए जल परीक्षणों और विभिन्न समाचार रिपोर्टों के अनुसार ग्रेटर नोएडा वेस्ट/नोएडा एक्सटेंशन की कई आवासीय सोसायटियों के साथ-साथ बीटा-1, गामा-2 समेत अन्य सेक्टरों में पेयजल का TDS स्तर 1200 से 2200 पीपीएम तक दर्ज किया गया है, जो निर्धारित सुरक्षित मानकों से कहीं अधिक है। इतना अधिक TDS स्तर मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर रूप से हानिकारक माना जाता है।
इसके अलावा, समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार डेल्टा-1 सेक्टर के सी-ब्लॉक (मकान संख्या 152 से 202) एवं आसपास के क्षेत्रों में कई दिनों तक सीवर-मिश्रित पानी की आपूर्ति की गई। इस दूषित जल के सेवन से कम से कम आठ लोग बीमार पड़ गए, जबकि इससे पहले भी लगभग 15 लोगों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आ चुकी है। स्थानीय नागरिकों द्वारा बार-बार शिकायत किए जाने के बावजूद समस्या के समाधान में हुई देरी से जल-जनित रोगों का खतरा और अधिक बढ़ गया है।
गौतमबुद्ध नगर विकास समिति ने चिंता जताते हुए कहा कि दूषित पेयजल की यह स्थिति लाखों निवासियों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर रही है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों की जान को इससे सीधा खतरा है। समिति का कहना है कि नागरिकों की जीवन-सुरक्षा से जुड़ी इस समस्या को नजरअंदाज करना अत्यंत चिंताजनक है।
समिति की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
* प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सरकारी स्तर पर जल गुणवत्ता परीक्षण कराया जाए।
* TDS और सीवर-कंटैमिनेशन से संबंधित सभी रिपोर्टें सार्वजनिक की जाएं।
* डेल्टा-1 सेक्टर में सीवर-मिश्रित पानी की आपूर्ति के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
* दूषित और क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों की तुरंत मरम्मत कर सुरक्षित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
अत्यधिक प्रभावित क्षेत्रों में अस्थायी रूप से शुद्ध पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
* रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) और नागरिक समूहों को नियमित रूप से स्थिति से अवगत कराया जाए।
* भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी जल-गुणवत्ता मॉनिटरिंग प्रणाली स्थापित की जाए।
समिति ने स्पष्ट किया है कि, भविष्य में दूषित जल आपूर्ति की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए स्थायी निगरानी तंत्र, नियमित लैब परीक्षण, पाइपलाइन ऑडिट और आपातकालीन प्रोटोकॉल लागू करना अनिवार्य है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और भी गंभीर रूप ले सकती है। समिति की ओर से इस पत्र पर रश्मि पांडेय और अनूप कुमार सोनी ने हस्ताक्षर कर प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।



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