गोवा का फीका पड़ता टूरिज़्म: थाईलैंड–वियतनाम क्यों बन गए भारतीय पर्यटकों की पहली पसंद?
टेन न्यूज नेटवर्क
National News (29 December 2025): कभी भारत की “पार्टी कैपिटल” और बीच टूरिज़्म का सबसे बड़ा केंद्र माने जाने वाला गोवा आज टूरिज़्म स्लोडाउन से जूझ रहा है। 2019 से 2025 तक के पर्यटन आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि जहां भारतीय पर्यटक बड़ी संख्या में विदेशों का रुख कर रहे हैं, वहीं गोवा का टूरिज़्म ग्राफ लगातार नीचे गिरता जा रहा है। महामारी के बाद “रिवेंज टूरिज़्म” के चलते लोगों की घूमने की चाह तो बढ़ी, लेकिन उनकी प्राथमिकता अब गोवा नहीं रह गई है।
इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण थाईलैंड है। प्री-पैंडेमिक स्तर को पार करते हुए यहां भारतीय पर्यटकों की संख्या 21 लाख तक पहुंच चुकी है। वहीं वियतनाम, जो कभी भारतीय पर्यटकों के लिए कम चर्चित डेस्टिनेशन था, उसने पिछले पांच वर्षों में करीब 300 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की है। अज़रबैजान जैसे नए देशों में भी भारतीय पर्यटकों की संख्या लगभग 283 प्रतिशत तक बढ़ गई है। ये आंकड़े बताते हैं कि भारतीय यात्री अब सस्ते, सुविधाजनक और नए अनुभवों वाले अंतरराष्ट्रीय विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
इसके विपरीत गोवा में विदेशी पर्यटकों की संख्या में लगभग 50 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। जहां पहले सालाना करीब 9 लाख विदेशी पर्यटक आते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर लगभग 4 लाख के आसपास रह गई है। घरेलू पर्यटन भी अब संतृप्ति की स्थिति में पहुंचता नजर आ रहा है। महंगे होटल, बढ़ा हुआ टैक्सी किराया, अत्यधिक भीड़, ट्रैफिक और नए अनुभवों की कमी जैसे कारण पर्यटकों को गोवा से दूर कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों ने स्मार्ट टूरिज़्म नीतियों को अपनाया है। आसान वीज़ा प्रक्रिया, किफायती टूर पैकेज, बेहतर नाइटलाइफ, साफ-सुथरे बीच और अंतरराष्ट्रीय स्तर का इंफ्रास्ट्रक्चर इन देशों की बड़ी ताकत बन चुका है। इसके मुकाबले गोवा में रेगुलेशन की जटिलताएं, नीतिगत अस्थिरता और ज़मीनी समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा। पर्यटन मंत्री का हालिया “चाइनीज़ डेटा” से जुड़ा बयान भी प्रशासनिक गंभीरता पर सवाल खड़े करता है।
यह समस्या सिर्फ गोवा तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के टूरिज़्म सेक्टर के भविष्य से जुड़ी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड, कीमतों पर नियंत्रण, टैक्सी और होटल रेगुलेशन, नाइटलाइफ और बीच मैनेजमेंट में सुधार, और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आक्रामक मार्केटिंग पर तुरंत काम करना होगा।
अगर समय रहते ठोस और व्यावहारिक कदम नहीं उठाए गए, तो गोवा की “पार्टी कैपिटल” की पहचान इतिहास तक सिमट कर रह जाएगी और भारतीय पर्यटकों का पैसा थाईलैंड, वियतनाम और अन्य देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करता रहेगा।
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