पवई स्टूडियो कांड: आखिर क्यों रोहित आर्या ने चुना मौत का रास्ता

टेन न्यूज नेटवर्क

National News (29/12/2025): 30 अक्टूबर 2025 को मुंबई के पवई इलाके में एक बहुत ही डरावनी घटना घटी। पवई के ‘आर एस स्टूडियो’ (RS Studio) में एक वेब सीरीज के लिए ऑडिशन चल रहे थे, लेकिन आखिरी दिन यह मामला अचानक बिगड़ गया।

रोहित आर्या नाम के एक व्यक्ति ने, जो वहां ऑडिशन ले रहा था, दोपहर करीब 1:00 बजे स्टूडियो का दरवाजा अंदर से बंद कर दिया। उसने 17 बच्चों और एक बुजुर्ग समेत कुल 19 लोगों को बंधक (Hostage) बना लिया। रोहित का कहना था कि वह कोई आतंकवादी नहीं है और उसे कोई पैसा भी नहीं चाहिए, बल्कि वह सरकार के कुछ अधिकारियों से अपने कुछ नैतिक और जरूरी सवालों के जवाब चाहता था।

स्टूडियो के अंदर रोहित ने बच्चों को अलग-अलग समूहों में बांट दिया था और पुलिस की हलचल पर नजर रखने के लिए अपने फोन से जुड़े ‘मोशन सेंसर’ लगा दिए थे। उसने धमकी दी थी कि अगर पुलिस ने अंदर घुसने की कोशिश की, तो वह ज्वलनशील रसायनों (Chemicals) और लाइटर से पूरे स्टूडियो में आग लगा देगा। अपनी मांगों के लिए रोहित ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो डाला और पुलिस से बात करते हुए महाराष्ट्र के पूर्व शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर से मिलने की जिद की। पुलिस ने उसे करीब दो घंटे तक समझाने की कोशिश की, लेकिन रोहित लगातार गुस्से में आता गया और उसे पुलिस की बातों पर भरोसा नहीं रहा।

जब बातचीत से कोई रास्ता नहीं निकला, तो मुंबई पुलिस और क्यूआरटी (QRT) कमांडोज ने एक रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। एक तरफ इंस्पेक्टर ने रोहित को बातों में उलझाकर उसका ध्यान भटकाया, तो दूसरी तरफ कमांडोज ने पीछे के बाथरूम की खिड़की की जाली काटकर अंदर प्रवेश किया। अंदर घुसते ही रोहित ने कथित तौर पर अधिकारियों पर अपनी एयर गन से फायरिंग शुरू कर दी। बचाव में एक कमांडो ने तुरंत गोली चलाई जो रोहित के सीने में जा लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस तरह करीब तीन घंटे तक चली इस मुसीबत के बाद सभी 19 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया।

जांच में रोहित आर्या के बारे में यह पता चला कि वह एक बहुत पढ़ा-लिखा इंसान था। उसने पहले महाराष्ट्र के बड़े राजनेताओं के साथ मिलकर काम किया था, जिनमें मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी शामिल थे। रोहित ने उनके साथ “स्वच्छता मॉनिटर” (Swachhata Monitor) नाम की एक सरकारी योजना के लिए काम किया था।

रोहित के इस खौफनाक कदम के पीछे की वजह शिक्षा विभाग के साथ उसका पैसों और काम को लेकर चल रहा विवाद था। रोहित का दावा था कि उसके काम के बदले सरकार को उसे ₹2.41 करोड़ देने थे और उसे उसके आइडिया का क्रेडिट भी नहीं दिया गया। दूसरी ओर, सरकार का कहना था कि रोहित की कंपनी ने जरूरी कागजात जमा नहीं किए थे और वह बिना इजाजत स्कूलों से रजिस्ट्रेशन फीस वसूल रही थी। पुलिस ने रोहित को मानसिक रूप से बीमार बताया, लेकिन उसके परिवार और पड़ोसियों का कहना था कि वह एक बहुत ही शांत और सामान्य इंसान था। इस दुखद अंत ने सरकारी सिस्टम की कमियों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह घटना समाज और सरकार के सामने कई गहरे सवाल छोड़ गई है। एक तरफ जहां मुंबई पुलिस और क्यूआरटी (QRT) की मुस्तैदी ने 19 मासूम जिंदगियों को सुरक्षित बचा लिया, वहीं दूसरी तरफ एक पढ़े-लिखे और सम्मानित प्रोफेशनल का इस तरह हिंसक रास्ता चुनना सिस्टम की विफलता की ओर इशारा करता है। रोहित आर्या और शिक्षा विभाग के बीच का यह विवाद अंततः एक दुखद अंत पर खत्म हुआ। पुलिस ने भले ही इस केस को सुलझा लिया हो, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य, सरकारी भुगतान में देरी और एक आम आदमी की बेबसी जैसे मुद्दों पर अब भी गंभीर चर्चा की जरूरत है।

डिस्क्लेमर: यह लेख / न्यूज आर्टिकल सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध जानकारी और प्रतिष्ठित / विश्वस्त मीडिया स्रोतों से मिली जानकारी पर आधारित है।यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। पाठक कृपया स्वयं इस की जांच कर सूचनाओं का उपयोग करे ॥


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