New Delhi News (09/07/2025): दिल्ली की रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) की सरकार ने एक और बजटीय वादा पूरा कर दिखाया है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में ‘एकीकृत जिला परियोजना निधि’ और ‘जिला परियोजना निधि’ को मंज़ूरी दे दी गई, जिसके तहत राजधानी के सभी 11 सरकारी जिलों में छोटे लेकिन महत्वपूर्ण विकास कार्यों को गति दी जाएगी। इस योजना के तहत कुल 53 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे जनता को बुनियादी सुविधाएं ज़मीनी स्तर पर जल्द उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
मुख्यमंत्री ने बैठक के बाद कहा कि यह पहल “परफॉर्म, रिफॉर्म और ट्रांसफॉर्म” के सिद्धांत पर आधारित है और इसका लक्ष्य शासन में विकेंद्रीकरण को बढ़ावा देना है। रेखा गुप्ता के अनुसार, सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि ज़मीनी स्तर पर निर्णय लेने और योजनाएं लागू करने की शक्ति जिलाधिकारियों को मिले ताकि जरूरतमंद इलाकों में छोटे-छोटे लेकिन प्रभावी काम बिना देरी के पूरे हों।
इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक जिले को तीन करोड़ रुपये की राशि सीधे आवंटित की जाएगी। यह फंड पूरी तरह दिल्ली सरकार द्वारा वित्तपोषित होगा, जिसमें से 20 करोड़ रुपये ‘इंटीग्रेटेड डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट फंड’ और 33 करोड़ रुपये ‘डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट फंड’ के अंतर्गत विभाजित किए गए हैं। इस राशि का उपयोग बुनियादी ढांचे, सामुदायिक सुविधाओं और सामाजिक कल्याण संबंधी कार्यों के लिए किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जिन कार्यों को इस निधि के अंतर्गत पूरा किया जाएगा, उनमें सड़कें, पुल, राजस्व जिला कार्यालय जैसी संरचनाओं की मरम्मत, स्कूलों और डिस्पेंसरियों का रखरखाव, गौशालाओं का संरक्षण, स्ट्रीट लाइट और सीसीटीवी कैमरों की मरम्मत, तालाबों का पुनर्जीवन, सार्वजनिक शौचालयों और पार्कों की सफाई व पुनर्निर्माण जैसे कार्य शामिल हैं। इनसे जनता को सीधा और त्वरित लाभ मिलेगा।
प्रत्येक जिले में इस निधि के क्रियान्वयन के लिए एक प्रोजेक्ट अप्रूवल कमेटी (PAC) बनाई जाएगी। जिलाधिकारी इसके अध्यक्ष होंगे जबकि अतिरिक्त जिलाधिकारी सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे। इस समिति में एसडीएम (मुख्यालय), बीडीओ, वरिष्ठ लेखा अधिकारी और लाभार्थी विभाग का प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस संरचना से योजना की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
सरकार के अनुसार, योजना का संचालन लोक निर्माण विभाग (PWD), सिंचाई व बाढ़ नियंत्रण विभाग और दिल्ली नगर निगम (MCD) जैसे विभागों के माध्यम से किया जाएगा। इस प्रकार विभिन्न विभागों के समन्वय से स्थानीय ज़रूरतों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। यह मॉडल रेखा सरकार की उस नीति को दर्शाता है जो सशक्त और परिणामोन्मुख शासन पर ज़ोर देती है।
दिल्ली में पहली बार जिला स्तर पर इस तरह की विकेन्द्रीकृत परियोजना निधि को कानूनी और प्रशासनिक मान्यता दी गई है। सरकार का मानना है कि कई बार बड़े बजट वाली योजनाओं में छोटे लेकिन जरूरी कार्य उपेक्षित रह जाते हैं, जिन्हें अब इस फंड के माध्यम से तुरंत पूरा किया जा सकेगा। यह न सिर्फ त्वरित विकास को बढ़ावा देगा बल्कि स्थानीय जनभागीदारी भी सुनिश्चित करेगा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इस योजना से सरकारी स्कूलों, डिस्पेंसरियों, सामुदायिक भवनों और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों की दशा सुधरेगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई जिलों में स्कूलों की छतें जर्जर हो चुकी हैं या सामुदायिक केंद्रों में बिजली और शौचालय की समस्या बनी रहती है—इन सब कार्यों को अब बिना लंबे प्रशासनिक हस्तक्षेप के जल्दी निपटाया जा सकेगा।
रेखा सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में तेज़ी से बढ़ती जनसंख्या और अवसंरचनात्मक दबाव के चलते प्रशासन को स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की आवश्यकता बढ़ती जा रही है। यह योजना सरकार की “स्मार्ट सुशासन” की दिशा में एक बड़ा प्रयोग मानी जा रही है जो विकास को जिलों तक पहुंचाने की नई प्रणाली स्थापित करेगी।
कुल मिलाकर, यह फंड दिल्ली के आम नागरिकों के जीवन को सीधे प्रभावित करने वाली समस्याओं के समाधान की दिशा में एक व्यावहारिक और पारदर्शी प्रयास है। योजना के सफल क्रियान्वयन से न सिर्फ जनता का विश्वास बढ़ेगा बल्कि यह पूरे देश में राजधानी के विकास मॉडल को एक उदाहरण के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।।
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