विधायकों ने खर्च नहीं किया 800 करोड़ का विकास फंड, सवालों के घेरे में सरकार!

टेन न्यूज़ नेटवर्क

नई दिल्ली (1 अप्रैल 2025): दिल्ली की सातवीं विधानसभा (2020-25) के विधायकों को उनके क्षेत्रों के विकास कार्यों के लिए 1,764.5 करोड़ रुपये का MLALAD (विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास) फंड आवंटित किया गया था, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इस राशि का केवल 45% ही खर्च हो पाया। पांच सालों में जहां जरूरत थी, वहां पैसा खर्च नहीं हुआ, और 800 करोड़ रुपये की बड़ी रकम बिना उपयोग के रह गई।

चुनावी साल में खर्च में आई सबसे ज्यादा गिरावट

MLALAD फंड का सबसे कम उपयोग 2024-25 में हुआ, जो कि चुनावी साल था। इस वित्तीय वर्ष में विधायकों के लिए 800 करोड़ रुपये का फंड आवंटित किया गया था, लेकिन मार्च 19, 2025 तक केवल 281 करोड़ रुपये ही जारी हो पाए। दिल्ली सरकार के अधिकारियों का कहना है कि कुछ विकास योजनाओं को मंजूरी तो मिली थी, लेकिन उनकी धनराशि पूरी तरह से जारी नहीं हुई। अब, चूंकि विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो गया है, तो यह बची हुई राशि खत्म मानी जाएगी। हालांकि चुनावी वर्ष होने के कारण आचार संहिता लगाए जाने से विकास कार्यों पर प्रभाव मन जा रहा है।

AAP सरकार ने बढ़ाया था फंड, बीजेपी सरकार ने घटाया

अक्टूबर 2024 में आम आदमी पार्टी सरकार ने MLALAD फंड को 10 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 15 करोड़ रुपये कर दिया था। लेकिन 2025-26 के बजट में बीजेपी सरकार ने इसे फिर से घटाकर 5 करोड़ रुपये कर दिया। इसके अलावा, नई सरकार ने ‘सीएम डेवलपमेंट फंड’ के नाम से 1,400 करोड़ रुपये का अलग बजट तैयार किया है, जिसे मुख्यमंत्री के अधीन रखा गया है।

विकास योजनाएं अधर में, जनता को नहीं मिला लाभ

MLALAD फंड का इस्तेमाल दिल्ली नगर निगम (MCD), दिल्ली जल बोर्ड (DJB), दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB), बिजली वितरण कंपनियों और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग जैसी एजेंसियों के जरिए किया जाता है। यदि किसी वित्तीय वर्ष में विधायक अपने क्षेत्र का पूरा फंड खर्च नहीं कर पाते, तो वह राशि अगले वर्ष जोड़ दी जाती है, लेकिन यह केवल पांच साल के लिए मान्य होती है। चूंकि अब नई विधानसभा आ चुकी है, इसलिए बची हुई राशि अब वापस सरकारी खजाने में चली गई है।

विधायक बोले: सरकार ने नहीं दी पर्याप्त फंडिंग

फंड खर्च न कर पाने पर विधायकों ने अलग-अलग कारण बताए। कुछ विधायकों का कहना है कि जब किसी योजना को तैयार किया जाता है, तो उसकी लागत ज्यादा आंकी जाती है, लेकिन जब ठेकेदार कम कीमत पर काम करने को तैयार हो जाते हैं, तो राशि बच जाती है। वहीं, कुछ विपक्षी विधायकों ने आरोप लगाया कि सरकार ने उनके क्षेत्रों में अन्य योजनाओं के जरिए पैसा खर्च कर दिया, जिससे MLALAD फंड का उपयोग नहीं हो सका।

जनता के पैसों का क्या होगा हिसाब?

विपक्षी दलों का आरोप है कि अगर पूरी राशि खर्च होती, तो दिल्ली के विकास कार्यों में बड़ा बदलाव देखने को मिलता। लेकिन इस लापरवाही के चलते कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पूरे नहीं हो सके। अब सवाल यह उठता है कि क्या भविष्य में भी फंड का यही हाल होगा, या नई सरकार इसे बेहतर तरीके से इस्तेमाल करेगी? जनता को विकास कार्यों का लाभ मिले, इसके लिए फंड के सही इस्तेमाल को लेकर कड़ी निगरानी की जरूरत है।


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