नोएडा (22 मार्च 2025): नोएडा में एक सनसनीखेज धोखाधड़ी मामले में, पश्चिम बंगाल और असम के बैंकों के खातों का इस्तेमाल करके 3.14 करोड़ रुपये की ठगी की गई है। यह धोखाधड़ी आरबीआई के एक पूर्व कर्मचारी और उनकी पत्नी के खिलाफ की गई। पीड़ित व्यक्ति ने आरोप लगाया कि उसके साथ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों को लेकर डिजिटल तरीके से ठगी की गई, और आरोपियों ने उसे झांसा देकर 15 दिन के अंदर विभिन्न खातों में पैसे ट्रांसफर करवा लिए।
धोखाधड़ी की शुरुआत और डिजिटल अरेस्ट
पीड़ित ने अपनी शिकायत में बताया कि 26 फरवरी से 12 मार्च के बीच उनके और उनकी पत्नी के नाम पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर उन्हें डिजिटल अरेस्ट किया गया। इस दौरान, आरोपियों ने मुंबई के कोलाबा थाने और सीबीआई के नाम पर उन्हें धमकाया और फिर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के सामने पेश करने का डर दिखा कर उनसे पैसे ऐंठे। इस प्रक्रिया में 7 बार रकम ट्रांसफर की गई, जिसमें कुल 3.14 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
पुलिस की कार्रवाई और टीमों का गठन
इस मामले की जानकारी मिलने के बाद नोएडा पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। साइबर पुलिस ने दो टीमों का गठन किया, जिनमें एक टीम पश्चिम बंगाल और दूसरी असम के लिए रवाना की गई, ताकि ठगी में शामिल खातों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके। डीसीपी साइबर, प्रीति यादव ने बताया कि पुलिस टीमों को इन दोनों राज्यों के खातों की डिटेल प्राप्त करने के लिए भेजा गया है। जांच के दौरान, पुलिस ने पाया कि आरोपियों ने पीड़ित को झांसा देकर उसे विभिन्न खातों में पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया था।
39 लाख रुपये हुए फ्रीज
इस मामले में पीड़ित की शिकायत के बाद, पुलिस ने मामले को नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्ट पोर्टल पर अपडेट किया और तुरंत कार्रवाई करते हुए 39 लाख रुपये फ्रीज करवा दिए। पुलिस विभाग ने यह सुनिश्चित किया कि ठगी के इस पूरे नेटवर्क को पूरी तरह से उजागर किया जाए। डीसीपी प्रीति यादव ने बताया कि इस ठगी में शामिल सभी आरोपियों की पहचान की जा रही है, और उन्हें जल्द ही गिरफ्तार करने के लिए पुलिस की टीमें विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर रही हैं।
ठगी के नेटवर्क का खुलासा
पुलिस द्वारा किए गए शुरुआती जांच में यह पता चला है कि ठगी का नेटवर्क केवल नोएडा तक सीमित नहीं था। इसमें पश्चिम बंगाल और असम के विभिन्न बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी काफी संगठित तरीके से काम कर रहे थे, और उनका लक्ष्य लोगों को धोखा देकर बड़ी रकम हड़पना था। पुलिस इन दोनों राज्यों में जांच की प्रक्रिया को तेज कर रही है और आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत जुटाने के प्रयास में है।
यह मामला साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे को उजागर करता है, जहां तकनीकी धोखाधड़ी के माध्यम से लोगों को बड़े पैमाने पर ठगा जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले को पूरी गंभीरता से ले रहे हैं और जल्द ही आरोपी गिरफ्तार किए जाएंगे।
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