नई दिल्ली (28 फरवरी 2025): भारत उपभोक्ता बाजार में एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है और 2026 तक दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार बनने की राह पर है। डेलाइट इंडिया और रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (RAI) की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत की निजी खपत 2013 में 1 ट्रिलियन डॉलर थी, जो 2024 में बढ़कर 2.1 ट्रिलियन डॉलर हो गई है। यह वृद्धि 7.2 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से हो रही है, जो अमेरिका, चीन और जर्मनी जैसे बड़े बाजारों की तुलना में अधिक है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2030 तक भारत में सालाना 10,000 डॉलर से अधिक कमाने वाले लोगों की संख्या तीन गुना होकर 16.5 करोड़ तक पहुंच जाएगी। यह मध्यम वर्ग के तेजी से विस्तार और बढ़ते उपभोक्ता खर्च का संकेत देता है। इसके साथ ही, भारत की प्रति व्यक्ति आय 2030 तक 4,000 डॉलर से अधिक होने का अनुमान है, जिससे संगठित खुदरा उद्योग और डिजिटल वाणिज्य में भारी वृद्धि होगी। भारत में डिजिटल भुगतान और फिनटेक क्रांति ने उपभोक्ता खर्च को अभूतपूर्व तरीके से बढ़ावा दिया है। 2024 में जहां 10.2 करोड़ क्रेडिट कार्ड थे, वहीं 2030 तक इनकी संख्या तीन गुना होकर 29.6 करोड़ हो जाने की उम्मीद है। डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन, यूपीआई और ई-कॉमर्स के बढ़ते प्रभाव से उपभोक्ता ब्रांडों से अधिक जुड़ रहे हैं और ऑनलाइन खरीदारी की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
भारत में संगठित खुदरा उद्योग 2030 तक 230 अरब डॉलर का हो जाने की संभावना है। खुदरा विक्रय क्षेत्र में डिजिटल तकनीकों के बढ़ते उपयोग और नए व्यापार मॉडल के साथ पारंपरिक और आधुनिक खुदरा दोनों तेजी से विकसित हो रहे हैं। जनवरी 2024 की तुलना में खुदरा बिक्री में 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसमें पश्चिम भारत ने 7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जबकि उत्तर और दक्षिण भारत में 5-5 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई।भारतीय उपभोक्ताओं की प्राथमिकताएं बदल रही हैं। अब वे केवल कीमत नहीं, बल्कि गुणवत्ता और सुविधा को भी अधिक महत्व दे रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जेन Z और मिलेनियल्स आबादी का 52 प्रतिशत हिस्सा हैं और वे विवेकाधीन खर्च बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।
वाहन उद्योग में वृद्धि के संकेत
वाहन क्षेत्र भी इस उपभोक्ता बदलाव का लाभ उठा रहा है। 2025-26 तक वाहनों की खुदरा बिक्री में 8-10 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है। दोपहिया वाहनों की बिक्री में भी वृद्धि की संभावना है, जिससे ऑटोमोबाइल उद्योग को मजबूती मिलेगी। भारत का उपभोक्ता बाजार एक नए युग में प्रवेश कर रहा है, जहां बढ़ती आय, डिजिटल बदलाव और उपभोक्ता वरीयताओं में बदलाव प्रमुख कारक बनेंगे। जैसे-जैसे संगठित खुदरा और डिजिटल वाणिज्य मॉडल का विस्तार होगा, वैसे-वैसे व्यापार और नवाचार के लिए अपार अवसर खुलेंगे।
डेलाइट इंडिया के पार्टनर आनंद रामनाथन के अनुसार, “भारत का उपभोक्ता बाजार एक संरचनात्मक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। 2030 तक भारत की प्रति व्यक्ति आय 4,000 डॉलर से अधिक हो जाएगी, जिससे विवेकाधीन खर्च में तेजी आएगी और नए बाजार खुलेंगे।भारत की अर्थव्यवस्था तेज गति से बढ़ रही है और 2026 तक यह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार बनने की ओर अग्रसर है। बढ़ती डिजिटल पहुंच, संगठित खुदरा उद्योग का विस्तार और मध्यम वर्ग के बढ़ते उपभोग से देश में व्यापार और निवेश के नए द्वार खुल रहे हैं। आने वाले वर्षों में यह वृद्धि भारत को वैश्विक बाजार में एक महत्वपूर्ण उपभोक्ता शक्ति बना सकती है।।
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