New Delhi News (31 October 2026): उत्तराखंड (Uttarakhand) के चमोली (Chamoli) जिले के जोशीमठ (Joshimath) इलाके में हुए भीषण हेलीकॉप्टर हादसे ने दिल्ली (Delhi) के शालीमार बाग (Shalimar Bagh) में भी मातम पसरा दिया है। इस दुर्घटना में हेलीकॉप्टर के पायलट कैप्टन हिमांशु सवारवाल समेत सभी छह लोगों की मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक, हेलीकॉप्टर बद्रीनाथ धाम (Badrinath Dham) से तीर्थयात्रियों को लेकर देहरादून (Dehradun) के सहस्रधारा हेलीपैड के लिए रवाना हुआ था। उड़ान भरने के कुछ ही मिनट बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल से उसका संपर्क टूट गया और जोशीमठ के हाथी पर्वत तथा चाईं गांव के पास हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे की खबर मिलते ही हिमांशु के परिवार और परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई।
करीब 48 वर्षीय कैप्टन हिमांशु सवारवाल दिल्ली के वेस्ट शालीमार बाग में अपने परिवार के साथ रहते थे। उनके परिवार में माता-पिता, पत्नी और दो बच्चे हैं। हिमांशु की मौत की खबर से उनके घर के आसपास सन्नाटा पसरा हुआ है। पड़ोसी उनके मिलनसार और जिंदादिल स्वभाव को याद कर भावुक हैं। पड़ोस में रहने वालीं रेणु ने बताया कि वह पिछले 45 वर्षों से इस इलाके में रह रही हैं और हिमांशु को बचपन से जानती थीं। उन्होंने बताया कि हिमांशु बेहद शरीफ और संस्कारी बच्चा था। वह उनके घर के बच्चों के साथ खेला करता था और दोनों परिवारों के बीच पारिवारिक संबंध थे। हिमांशु ने सामने स्थित मॉडर्न पब्लिक स्कूल से 12वीं की पढ़ाई पूरी की थी और इसके बाद नौकरी शुरू कर दी थी।
रेणु ने बताया कि पिछले शनिवार को ही उनकी हिमांशु से मुलाकात हुई थी। वह जब भी घर आता था, अपने माता-पिता से मिलने के साथ मोहल्ले के बड़ों का सम्मान करना नहीं भूलता था। पिछली मुलाकात में हिमांशु और उनकी पत्नी ने उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया था। रेणु ने भावुक होकर कहा कि जिस बच्चे को उन्होंने अपने सामने खेलते-बढ़ते देखा, उसके इस तरह दुनिया छोड़कर चले जाने की खबर ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया है। वहीं, हिमांशु के घर से दो मकान छोड़कर रहने वालीं निधि जैन ने बताया कि वह उन्हें पिछले 30-32 वर्षों से जानती हैं। उनके मुताबिक, हिमांशु बेहद जेंटलमैन और हंसमुख इंसान थे। वह पिछले वीकेंड भी मोहल्ले में आए थे और हमेशा की तरह सभी से हंसकर मिले थे। सुबह हादसे की खबर सुनकर उन्हें यकीन ही नहीं हुआ कि हिमांशु अब उनके बीच नहीं रहे।
इस दुर्घटना में हिमांशु के अलावा पांच यात्रियों की भी जान चली गई, जिनका संबंध कर्नाटक से बताया गया है। मृतकों की पहचान प्रताप, अरुण सालुंके, वीबी शंकर गौड़ा, सुधीर के. और एचएस नटराजा के रूप में हुई है। बताया गया है कि हादसे के वक्त हेलीकॉप्टर ट्रांस भारत एविएशन कंपनी द्वारा संचालित किया जा रहा था। दुर्घटना के बाद राहत और जांच एजेंसियां मौके पर पहुंचीं और मलबे से ब्लैक बॉक्स समेत अन्य तकनीकी साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई शुरू की गई। हादसे के पीछे मौसम की खराबी या तकनीकी गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है, हालांकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही होगा।
हादसे पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने गहरा दुख व्यक्त किया है और घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। वहीं, एहतियाती कदम उठाते हुए संबंधित नागरिक उड्डयन प्राधिकरण (UCDA) ने ट्रांस भारत एविएशन के पूरे हेलीकॉप्टर बेड़े को फिलहाल ग्राउंडेड कर दिया है। इस दुर्घटना ने चारधाम यात्रा के दौरान संचालित होने वाली हेलीकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर हादसे में जान गंवाने वाले यात्रियों के परिवार अपनों को खोने के गम में डूबे हैं, वहीं दिल्ली के शालीमार बाग में रहने वाले लोग अपने उस पड़ोसी को याद कर रहे हैं, जिसे वे बचपन से जानते थे और जो हमेशा मुस्कुराकर सबसे मिला करता था।
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