घाटे से निकालकर मुनाफे में लाने वाले IDBI बैंक को बेच रही सरकार : राहुल गांधी
टेन न्यूज़ नेटवर्क
New Delhi News (30 October 2026): कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने IDBI बैंक के निजीकरण को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने बैंक के कर्मचारियों के प्रति समर्थन जताते हुए सरकार के उस फैसले पर सवाल उठाए हैं, जिसके तहत मुनाफे में चल रहे IDBI बैंक को कनाडाई कंपनी फेयरफैक्स (Fairfax) को बेचने की तैयारी है। राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में देश के उद्योगों को मजबूती देने के उद्देश्य से IDBI जैसे बैंक स्थापित किए गए थे, लेकिन मौजूदा सरकार सरकारी संस्थानों को बेचने में जुटी है। उन्होंने कहा कि जिस बैंक को कर्मचारियों ने अपनी मेहनत से घाटे से निकालकर मुनाफे तक पहुंचाया, उसी बैंक को सरकार निजी हाथों में सौंप रही है।
राहुल गांधी ने IDBI बैंक के कर्मचारियों को लिखे खुले पत्र में बताया कि पिछले साल मार्च में बैंक के कर्मचारियों का एक प्रतिनिधिमंडल संसद भवन में उनसे मिलने आया था। इस दौरान कर्मचारियों ने सवाल उठाया था कि जिस बैंक को उन्होंने मुश्किलों से निकालकर मुनाफे में पहुंचाया, उसे सरकार क्यों बेच रही है। राहुल गांधी के मुताबिक, उन्होंने यह मुद्दा लोकसभा में भी उठाया था और सरकार से पूछा था कि मुनाफे में चल रहे सरकारी बैंक को बेचने की क्या वजह है और इसके कर्मचारियों तथा जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा कैसे की जाएगी। हालांकि, उनका आरोप है कि सरकार की ओर से इन सवालों का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। उन्होंने बताया कि सात साल पहले IDBI बैंक घाटे में था, लेकिन पिछले साल बैंक ने 9 हजार करोड़ रुपये से अधिक का मुनाफा दर्ज किया। राहुल गांधी ने इस उपलब्धि का श्रेय बैंक कर्मचारियों की मेहनत को दिया।
कांग्रेस नेता ने बैंक के निजीकरण से कर्मचारियों और सामाजिक आरक्षण पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर भी चिंता जताई है। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि वर्तमान में IDBI बैंक में केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की कुल 95 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो बिक्री के बाद घटकर 34 प्रतिशत रह जाएगी। राहुल गांधी ने 2003 में संसद में सरकार की ओर से किए गए उस वादे का भी जिक्र किया, जिसमें IDBI बैंक में कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सेदारी बनाए रखने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि भले ही यह वादा कानून में दर्ज न हो, लेकिन संसद में किया गया वादा देश की जनता से किया गया वादा होता है। राहुल गांधी ने आशंका जताई कि बैंक के निजी स्वामित्व में जाने के बाद SC, ST और OBC वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आरक्षण समाप्त हो सकता है। इसके साथ ही कर्मचारियों की सेवा शर्तों और उनके अधिकारों पर भी असर पड़ सकता है।
राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस मजबूत सार्वजनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्र, दोनों के अस्तित्व में विश्वास करती है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक केवल कारोबारी संस्थान नहीं हैं, बल्कि देश के निर्माण और आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण साधन हैं। उन्होंने IDBI बैंक के कर्मचारियों से एकजुट रहने की अपील करते हुए उनकी जायज मांगों का पूरा समर्थन करने का भरोसा दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना पत्र साझा करते हुए राहुल गांधी ने सरकार की नीतियों पर तंज कसते हुए कहा, “कांग्रेस के समय में देश के उद्योगों को खड़ा करने के लिए IDBI की स्थापना की गई थी। मोदी के समय में पहले बोली लगाई गई, फिर कीमत तय की गई। कांग्रेस के समय में बैंक बनते थे और मोदी के समय में बिकते हैं।” उन्होंने दोहराया कि वह IDBI बैंक के कर्मचारियों की लड़ाई में उनके साथ खड़े हैं।
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