नोएडा में 85 एकड़ जमीन का पुरानी दरों पर आवंटन? 15 साल पुराने प्रस्ताव ने खड़े किए बड़े सवाल

टेन न्यूज़ नेटवर्क

Noida News (28 October 2026): नोएडा में जमीन आवंटन से जुड़ा एक प्रस्ताव प्राधिकरण की कार्यप्रणाली और सरकारी संपत्तियों के मूल्य निर्धारण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सेक्टर-150 में करीब 85 एकड़ जमीन बिल्डरों को वर्ष 2011 में निर्धारित आवंटन दरों पर देने का प्रस्ताव प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में लाए जाने की तैयारी है। यदि यह प्रस्ताव इसी आधार पर आगे बढ़ता है, तो जमीन के मौजूदा बाजार मूल्य और पुरानी आवंटन दर के बीच का अंतर जांच का अहम विषय बन सकता है।

2011 की दर पर आज जमीन देने की तैयारी क्यों?

रिपोर्ट में दिए गए विवरण के मुताबिक, संबंधित जमीन के लिए वर्ष 2011 में लगभग 12,050 रुपये प्रति वर्ग मीटर की आवंटन दर निर्धारित थी। वहीं, खबर में मौजूदा बाजार मूल्य करीब 5 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर तक होने का उल्लेख किया गया है। इन दोनों दरों के बीच भारी अंतर होने के कारण यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इतने वर्षों बाद भी पुरानी दर को आधार बनाने के पीछे क्या वजह है और इससे प्राधिकरण को मिलने वाले राजस्व पर क्या असर पड़ सकता है।

85 एकड़ जमीन का मामला, फैसले से पहले पारदर्शिता जरूरी

सेक्टर-150 नोएडा का एक महत्वपूर्ण आवासीय क्षेत्र है। ऐसे में इतनी बड़ी जमीन के आवंटन से जुड़े किसी भी निर्णय में नियमों, पुरानी आवंटन शर्तों, संबंधित आवंटियों के अधिकारों और प्राधिकरण के वित्तीय हितों की स्पष्टता आवश्यक है। यदि जमीन का मामला पुराने आवंटन, लंबित विवाद या किसी अन्य कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा है, तो उसकी स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट होनी चाहिए।

प्राधिकरण के सामने ये सवाल अहम

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या प्रस्ताव केवल पुराने आवंटन की शर्तों को पूरा करने के लिए लाया जा रहा है या इसके पीछे कोई अन्य प्रशासनिक अथवा कानूनी आधार है? क्या जमीन की मौजूदा कीमत का स्वतंत्र आकलन किया गया है? क्या प्राधिकरण ने संभावित राजस्व अंतर का आकलन किया है? और क्या प्रस्ताव से संबंधित सभी कानूनी एवं वित्तीय पहलुओं की समीक्षा की गई है?

इन सवालों के जवाब इसलिए भी जरूरी हैं, क्योंकि नोएडा प्राधिकरण की जमीन सार्वजनिक संसाधनों का हिस्सा है। उसके आवंटन से जुड़ा कोई भी निर्णय पारदर्शी प्रक्रिया और स्पष्ट नियमों के अनुरूप होना चाहिए।

बोर्ड बैठक के फैसले पर टिकी नजरें

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्ताव को बोर्ड बैठक में लाने की तैयारी है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं होता कि बोर्ड ने इस पर अंतिम मंजूरी दे दी है या नहीं। इसलिए प्रस्ताव और अंतिम निर्णय के बीच अंतर करना जरूरी है।

अब निगाहें प्राधिकरण के आधिकारिक पक्ष, प्रस्ताव के कानूनी आधार और बोर्ड के फैसले पर रहेंगी। इन पहलुओं की पुष्टि के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि 85 एकड़ जमीन का मामला पुरानी आवंटन शर्तों से जुड़ा है या इसमें सरकारी राजस्व और भूमि प्रबंधन से संबंधित कोई बड़ा प्रश्न सामने आता है।


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