शारदा यूनिवर्सिटी में खाद्य सुरक्षा पर मंथन, AI और नवाचार से पोषण बेहतर बनाने पर जोर
टेन न्यूज नेटवर्क
Greater Noida News (28/10/2026): सुरक्षित भोजन, बेहतर पोषण और सतत खाद्य प्रणाली के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से शारदा विश्वविद्यालय में विश्व खाद्य दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। शारदा स्कूल ऑफ बायो-साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के आहार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में खाद्य सुरक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक तकनीक और पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कहा कि भविष्य की खाद्य चुनौतियों से निपटने के लिए नवाचार, पारंपरिक ज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को साथ लेकर चलना आवश्यक है।
इस वर्ष की थीम ‘Innovate Today, Nourish Tomorrow’ (आज नवाचार, कल पोषण) के माध्यम से इस बात पर जोर दिया गया कि वर्तमान में किए गए वैज्ञानिक प्रयास और तकनीकी नवाचार आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, पौष्टिक और टिकाऊ खाद्य व्यवस्था तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने पोस्टर मेकिंग और रंगोली के माध्यम से पौष्टिक भोजन अपनाने, खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने और भोजन की बर्बादी रोकने का संदेश दिया।
खाद्य सुरक्षा में AI और वैज्ञानिक अनुसंधान की अहम भूमिका
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में AFSTI दिल्ली चैप्टर की कोषाध्यक्ष और खाद्य प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ डॉ. विपाशा तनेजा उपस्थित रहीं। उन्होंने विद्यार्थियों को खाद्य क्षेत्र में उभरती चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और पारंपरिक कृषि ज्ञान के समन्वय पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन, कृषि संसाधनों पर बढ़ता दबाव और खाद्य पदार्थों की बर्बादी जैसी चुनौतियां टिकाऊ खाद्य प्रणाली के विकास की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं। ऐसे में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल खाद्य उत्पादन, प्रसंस्करण, भंडारण और वितरण को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक हो सकता है।
कार्यक्रम में बेहतर भंडारण और पैकेजिंग तकनीकों को अपनाने, खाद्य आपूर्ति श्रृंखला में तकनीकी सुधार करने तथा डेटा आधारित प्रणालियों के उपयोग पर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा बनाए रखने के साथ-साथ पोषण से भरपूर भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी जरूरी है।

‘खाद्य सुरक्षा के लिए नवाचार और स्थिरता में संतुलन जरूरी’
अपने संबोधन में डॉ. विपाशा तनेजा ने कहा कि भविष्य में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए वैज्ञानिक नवाचार, पर्यावरणीय स्थिरता और पोषण संबंधी जरूरतों के बीच संतुलन बनाना होगा। उन्होंने खाद्य अपव्यय कम करने, पौष्टिक खाद्य पदार्थों को प्रोत्साहित करने और टिकाऊ खाद्य प्रणालियों के विकास में युवाओं तथा शोधकर्ताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि ‘Innovate Today, Nourish Tomorrow’ केवल एक थीम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश है। भोजन मानव जीवन की बुनियादी जरूरत होने के साथ अच्छे स्वास्थ्य और बेहतर जीवन की नींव भी है। इसलिए भोजन की गुणवत्ता, सुरक्षा और उपलब्धता को प्राथमिकता देना आवश्यक है।

किसानों से लेकर आम लोगों तक, सबकी भागीदारी जरूरी
शारदा स्कूल ऑफ बायो-साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के डीन प्रो. अमित कुमार सिंह ने कहा कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना किसी एक क्षेत्र या संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए किसानों, वैज्ञानिकों, खाद्य उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों, नीति-निर्माताओं और आम नागरिकों को मिलकर काम करना होगा।
उन्होंने कहा कि ऐसी खाद्य व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है, जो वर्तमान की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ भविष्य की पीढ़ियों के हितों की भी रक्षा करे। उन्होंने शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए शारदा विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।
कार्यक्रम में स्थानीय कृषि परंपराओं और आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे कृषि संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग करने, पर्यावरण पर पड़ने वाले दबाव को कम करने और खाद्य उत्पादन को टिकाऊ बनाने में मदद मिल सकती है।

आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना
कार्यक्रम के सफल आयोजन में संयोजक प्रो. पीतम चंद्र, सह-संयोजक डॉ. रंजना पांडे और डॉ. दिनकर बी. कांबले सहित आयोजन समिति के सदस्यों की भूमिका की सराहना की गई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्यक्रम के आयोजन और इसके उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में योगदान देने वाली पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को खाद्य सुरक्षा, पोषण और पर्यावरणीय स्थिरता से जुड़े मुद्दों को समझने का अवसर दिया। साथ ही, यह संदेश भी दिया गया कि वैज्ञानिक सोच, जिम्मेदार उपभोग और तकनीकी नवाचार के माध्यम से भविष्य के लिए अधिक सुरक्षित एवं टिकाऊ खाद्य प्रणाली विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जा सकते हैं।
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