JNU में आरक्षण पर ‘हमला’! PhD एडमिशन में SC-ST कोटे में कटौती का आरोप, SFI ने उठाए सवाल

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (27 October 2026): जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के PhD एडमिशन प्रॉस्पेक्टस 2026-27 में आरक्षण के संवैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने आरोप लगाया कि PhD की कुल 711 सीटों में अनुसूचित जनजाति (ST) और अनुसूचित जाति (SC) के लिए निर्धारित आरक्षण के अनुपात के मुकाबले कम सीटें घोषित की गई हैं। SFI ने इसे सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है।

SFI की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, कुल 711 सीटों में ST वर्ग के लिए 38 सीटें यानी 5.34% निर्धारित की गई हैं, जबकि संगठन के मुताबिक निर्धारित आरक्षण 7.5% होना चाहिए। SFI ने इसमें 15 सीटों की कमी का दावा किया है। इसी तरह, SC वर्ग के लिए 103 सीटें यानी 14.49% घोषित किए जाने पर संगठन ने सवाल उठाते हुए कहा कि 15% आरक्षण के अनुपात में चार सीटों की कमी है। दिव्यांग (PwD) श्रेणी के लिए भी 17 सीटें निर्धारित किए जाने पर SFI ने आपत्ति जताई है।

NCSC ने लिया संज्ञान, JNU से सात दिन में जवाब देने को कहा

SFI के मुताबिक, संगठन की दिल्ली राज्य समिति की सदस्य और JNUSU की उपाध्यक्ष कॉमरेड गोपिका बाबू की ओर से शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने मामले का संज्ञान लिया है। संगठन का दावा है कि 27 अक्टूबर 2026 को आयोग ने रिमाइंडर जारी करते हुए उल्लेख किया कि निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के बाद भी JNU ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की थी। आयोग ने विश्वविद्यालय को सात दिनों के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है।

SFI ने यह भी बताया कि SFI JNU के हस्तक्षेप के बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने भी इस मामले में शिकायत दर्ज की है।

आरक्षण रोस्टर सार्वजनिक करने की मांग

SFI ने आरोप लगाया कि सीटों के बंटवारे के तरीके के जरिए आरक्षण के प्रावधानों को कमजोर किया जा रहा है और इससे केंद्रीय विश्वविद्यालयों में वंचित समुदायों के विद्यार्थियों के लिए अवसर प्रभावित हो सकते हैं। संगठन ने मांग की है कि PhD एडमिशन प्रॉस्पेक्टस में तत्काल सुधार किया जाए, पारदर्शी आरक्षण रोस्टर जारी किया जाए, सभी श्रेणियों के लिए सीटों का विस्तृत आंकड़ा सार्वजनिक किया जाए और बैकलॉग रिक्तियों को भरा जाए।

SFI के अध्यक्ष आदर्श एम. साजी और महासचिव सृजन भट्टाचार्य ने कहा कि आरक्षण संवैधानिक अधिकार है, कोई दान नहीं। संगठन ने छात्र समुदाय से सामाजिक न्याय के मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की है।

फिलहाल, इस प्रेस विज्ञप्ति में लगाए गए आरोपों और आयोगों की कार्रवाई से संबंधित विवरण SFI के दावों पर आधारित हैं। इस मामले में JNU प्रशासन का पक्ष उपलब्ध होने पर खबर को अपडेट किया जा सकता है।


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