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टेन न्यूज़ नेटवर्क

National News (17 October 2026): केंद्र सरकार ने शिशुओं के पोषण और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने छह माह तक की आयु के शिशुओं के लिए निर्धारित खाद्य उत्पादों में सुक्रोज और फ्रक्टोज मिलाने पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव दिया है। इसके लिए खाद्य सुरक्षा और मानक (शिशु पोषण के लिए खाद्य पदार्थ) विनियम, 2020 में संशोधन का मसौदा जारी किया गया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से 17 अक्टूबर 2026 को जारी जानकारी के अनुसार, इस प्रस्ताव का उद्देश्य शिशुओं की उम्र के अनुरूप पोषण सुनिश्चित करना और जीवन के शुरुआती महीनों में अतिरिक्त शर्करा के सेवन से बचाव करना है। हालांकि, यह अभी संशोधन का मसौदा है, अंतिम नियम नहीं।

FSSAI का यह प्रस्ताव भारत के राजपत्र में 16 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित खाद्य सुरक्षा और मानक (शिशु पोषण के लिए खाद्य पदार्थ) संशोधन विनियम, 2026 के मसौदे का हिस्सा है। वर्तमान नियमों के तहत जन्म से लेकर 24 माह तक के बच्चों के लिए विभिन्न श्रेणियों के शिशु पोषण उत्पादों की संरचना, गुणवत्ता और सुरक्षा से जुड़े मानक निर्धारित हैं। मौजूदा प्रावधानों में लैक्टोज और ग्लूकोज पॉलिमर को कार्बोहाइड्रेट के पसंदीदा स्रोतों में शामिल किया गया है, जबकि निर्धारित सीमाओं और शर्तों के अधीन सुक्रोज तथा फ्रक्टोज मिलाने की अनुमति है। अब प्रस्तावित बदलाव के तहत छह माह तक के शिशुओं के लिए निर्धारित उत्पादों में इन दोनों शर्कराओं को मिलाने पर रोक लगाने की तैयारी है।

इस प्रस्ताव के पीछे मुख्य उद्देश्य शिशुओं के शुरुआती विकास के दौरान उचित पोषण को प्राथमिकता देना है। जीवन के पहले छह महीने बच्चे की वृद्धि और विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसे में खाद्य उत्पादों में अनावश्यक रूप से अतिरिक्त शर्करा मिलाने से बचने पर जोर दिया जा रहा है। मंत्रालय के अनुसार, यह कदम बचपन में मोटापे और उससे जुड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों के संभावित आहार संबंधी जोखिमों को कम करने के व्यापक जनस्वास्थ्य प्रयासों को भी समर्थन दे सकता है। हालांकि, प्रस्तावित प्रतिबंध का संबंध निर्धारित शिशु पोषण उत्पादों में सुक्रोज और फ्रक्टोज मिलाने से है; इसे सभी प्रकार की शर्करा या शिशुओं के लिए निर्धारित सभी खाद्य उत्पादों पर समान रूप से लागू प्रतिबंध नहीं समझना चाहिए।

FSSAI की यह पहल जीवन के पहले छह माह तक केवल स्तनपान को प्रोत्साहित करने वाली स्थापित जनस्वास्थ्य सिफारिशों के अनुरूप भी बताई गई है। प्रस्ताव के जरिए शिशु पोषण उत्पाद बनाने वाली कंपनियों को ऐसे उत्पाद तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिनमें छोटे बच्चों की विशिष्ट पोषण संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखा जाए। नियामक प्राधिकरण का जोर खाद्य उत्पादों की सुरक्षा, वैज्ञानिक मानकों और जिम्मेदार निर्माण प्रक्रियाओं को मजबूत करने पर है। इसका व्यापक उद्देश्य बच्चों को जीवन की शुरुआत से ही बेहतर पोषण उपलब्ध कराने और भविष्य में आहार से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करने के प्रयासों को आगे बढ़ाना है।

फिलहाल संशोधन का मसौदा सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया गया है। FSSAI ने संबंधित हितधारकों से राजपत्र की प्रतियां जनता के लिए उपलब्ध कराए जाने की तारीख से 60 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं। निर्धारित अवधि में प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर विचार करने के बाद ही संशोधन को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसलिए छह माह तक के शिशुओं के लिए निर्धारित खाद्य उत्पादों में सुक्रोज और फ्रक्टोज के इस्तेमाल पर प्रस्तावित रोक को अभी अंतिम रूप से लागू नियम नहीं माना जा सकता। आने वाले समय में इस मसौदे पर प्राप्त प्रतिक्रियाओं और FSSAI के अंतिम निर्णय के आधार पर स्पष्ट होगा कि नए प्रावधान किस रूप में लागू किए जाएंगे।


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