श्री धार्मिक रामलीला में सीता स्वयंवर से राम वनवास तक का भावपूर्ण मंचन, दर्शकों की आंखें हुईं नम
टेन न्यूज नेटवर्क
Greater Noida News (17/10/2026): श्री धार्मिक रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित भव्य रामलीला एवं दशहरा महोत्सव में 16 अक्टूबर को छठे दिन सीता स्वयंवर, भगवान श्रीराम-सीता विवाह, माता सीता की विदाई, मंथरा-कैकई संवाद और श्रीराम वनवास की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। मंचन के दौरान जहां सीता स्वयंवर और विवाह के प्रसंगों ने दर्शकों को आनंदित किया, वहीं राम वनवास के दृश्य ने सभी को भावुक कर दिया। पूरा रामलीला परिसर भगवान श्रीराम और माता सीता के जयकारों से गूंज उठा।
संस्था के अध्यक्ष आनंद भाटी ने बताया कि परम पूज्य गोस्वामी सुशील जी महाराज के दिशा-निर्देशन में रामलीला का भव्य मंचन किया जा रहा है। सीता स्वयंवर के प्रसंग में राजा जनक ने शर्त रखी कि जो भी शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी से माता सीता का विवाह होगा। स्वयंवर में आए कई राजा-महाराजा धनुष को उठाने का प्रयास करते हैं, लेकिन कोई सफल नहीं हो पाता। इस पर राजा जनक निराश होकर कहते हैं कि लगता है धरती वीरों से खाली हो गई है। लक्ष्मण इस बात पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हैं, जिसके बाद महर्षि विश्वामित्र की आज्ञा से भगवान श्रीराम धनुष उठाते हैं। प्रत्यंचा चढ़ाते समय धनुष टूट जाता है और स्वयंवर संपन्न होने का मार्ग प्रशस्त होता है।
इसके बाद भगवान परशुराम के आगमन और लक्ष्मण के साथ उनके तीखे संवाद का मंचन हुआ। भगवान श्रीराम के शांतिपूर्ण व्यवहार से परशुराम का क्रोध शांत होता है। भगवान श्रीराम के स्वरूप को पहचानने के बाद वे उन्हें आशीर्वाद देकर प्रस्थान करते हैं। इसके बाद अयोध्या से राजा दशरथ बारात लेकर जनकपुर पहुंचते हैं, जहां चारों राजकुमारों का विवाह संपन्न होता है। माता सीता की विदाई के दृश्य में जनकपुरवासियों का भावुक चित्रण किया गया। अयोध्या लौटने पर चारों भाइयों और उनकी वधुओं का भव्य स्वागत किया जाता है।

रामलीला के अगले प्रसंग में राजा दशरथ भगवान श्रीराम का राजतिलक करने का निर्णय लेते हैं, लेकिन मंथरा के बहकावे में आकर कैकई राजा दशरथ से भरत के लिए राजगद्दी और श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांग लेती हैं। इसके बाद भगवान श्रीराम के वन जाने का दृश्य प्रस्तुत किया गया। इस प्रसंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया और कई लोगों की आंखें नम हो गईं। पूरे आयोजन में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा।
रामलीला कमेटी के अनुसार, 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर 2026 तक प्रतिदिन शाम 7 बजे रामलीला का मंचन किया जा रहा है। 17 अक्टूबर को राम-भरत मिलाप, शबरी प्रसंग, राम-हनुमान मिलन, किष्किंधा प्रसंग, बाली वध और अशोक वाटिका से जुड़े प्रसंगों का मंचन होगा। 18 अक्टूबर को लंका दहन, सेतु निर्माण और रावण-अंगद संवाद तथा 19 अक्टूबर को लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध और राम-कुंभकरण-रावण युद्ध के प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे।
इस अवसर पर संस्था के संस्थापक गोस्वामी सुशील जी महाराज, राजकुमार नागर, प्रदीप शर्मा, शेर सिंह भाटी, हरवीर मावी, मुख्य संरक्षक नरेश गुप्ता, संरक्षक सुशील नागर, धीरेंद्र भाटी, धीरज शर्मा, बालकिशन सफीपुर, दिनेश गुप्ता, पवन नागर, मनोज गुप्ता, सतीश भाटी, अध्यक्ष आनंद भाटी, महासचिव ममता तिवारी, कोषाध्यक्ष अजय नागर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेश शर्मा बदौली, उमेश गौतम, सत्यवीर मुखिया, रोशनी सिंह, महेश कमांडो, चैन पाल प्रधान, जितेंद्र भाटी, सुभाष भाटी, मनीष डाबर, मीडिया प्रभारी अतुल आनंद सहित संस्था के अन्य पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे।।
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