64.70% अतिरिक्त प्रतिकर के बाद भी 4% प्लॉट क्यों लंबित? 44 गांवों के किसानों का बड़ा ऐलान
टेन न्यूज नेटवर्क
Greater Noida News (30/09/2026): ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र के 44 गांवों के किसानों ने शेष 4 प्रतिशत आबादी भूखंड की मांग को लेकर आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। बुधवार को आयोजित प्रेस वार्ता में किसानों ने कहा कि लंबे समय से लंबित उनकी मांग का समाधान नहीं होने पर वे 22 अक्टूबर 2026 से परिवार सहित ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के समक्ष अनिश्चितकालीन किसान सत्याग्रह शुरू करेंगे।
किसानों के मुताबिक भूमि अधिग्रहण से जुड़े समझौते के तहत 64.70 प्रतिशत अतिरिक्त प्रतिकर और 10 प्रतिशत आबादी भूखंड दिए जाने की व्यवस्था से संबंधित मामला है। किसानों का सवाल है कि जब समझौते के तहत 64.70 प्रतिशत अतिरिक्त प्रतिकर का भुगतान किया जा चुका है और कई किसानों को 10 प्रतिशत आबादी भूखंड भी दिया गया है, तो पात्र किसानों के शेष 4 प्रतिशत भूखंड का मामला अब तक लंबित क्यों है।
10% और 6% भूखंड के आवंटन को लेकर किसानों ने उठाए सवाल
किसान प्रतिनिधि अमित भाटी ने टेन न्यूज नेटवर्क से बातचीत में कहा कि उनकी मुख्य मांग केवल शेष 4 प्रतिशत आबादी भूखंड प्राप्त करना है। उनके अनुसार, पूर्व में न्यायिक प्रक्रिया में जाने वाले कुछ किसानों को 10 प्रतिशत भूखंड दिए गए, जबकि अन्य किसानों को 6 प्रतिशत भूखंड की व्यवस्था बताई गई।
अमित भाटी ने दावा किया कि उस समय तत्कालीन ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के CEO रमा रमण की ओर से किसानों को 10 प्रतिशत भूखंड दिए जाने का भरोसा दिया गया था और न्यायालय जाने से विकास कार्य प्रभावित होने की बात कही गई थी। उनके अनुसार, कई किसानों ने इसी भरोसे के चलते न्यायालय का रुख नहीं किया, लेकिन बाद में भूखंड आवंटन को लेकर अलग स्थिति सामने आई।
किसानों का कहना है कि इसी अंतर को लेकर वे शेष 4 प्रतिशत आबादी भूखंड की मांग कर रहे हैं। उन्होंने प्राधिकरण से पूरे मामले पर स्पष्ट और पारदर्शी स्थिति सामने रखने की मांग की है।
मौन जुलूस से पैदल मार्च तक कर चुके हैं प्रदर्शन
किसानों के मुताबिक अपनी मांग को लेकर वे पहले भी कई शांतिपूर्ण कार्यक्रम कर चुके हैं। इनमें मौन जुलूस, एक दिवसीय अनशन और पैदल मार्च शामिल हैं।
अमित भाटी ने बताया कि करीब एक महीने पहले भारी बारिश के बीच किसानों ने घोड़ी-बछेड़ा किसान शहीद पार्क से ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण तक पैदल मार्च किया था। उनके अनुसार, इस दौरान करीब 2,000 लोग शामिल हुए थे। किसानों का कहना है कि उस समय उन्होंने प्राधिकरण से सितंबर तक मामले का समाधान करने की अपेक्षा जताई थी, लेकिन उनकी मांग पर कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया। इसके बाद अब आंदोलन के अगले चरण की घोषणा की गई है।
2 अक्टूबर से 44 गांवों में किसान सत्याग्रह पदयात्रा
प्रस्तावित अनिश्चितकालीन सत्याग्रह से पहले किसान 2 अक्टूबर, गांधी जयंती के दिन से 44 गांवों में किसान सत्याग्रह पदयात्रा शुरू करेंगे। इस अभियान के जरिए गांव-गांव जाकर किसानों और ग्रामीण परिवारों को शेष 4 प्रतिशत आबादी भूखंड के मुद्दे तथा आगामी आंदोलन की जानकारी दी जाएगी।
किसान प्रतिनिधियों के मुताबिक यह पदयात्रा 44 गांवों में आयोजित की जाएगी और इसके बाद 22 अक्टूबर को प्राधिकरण के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।
अमित भाटी ने कहा कि किसानों का उद्देश्य टकराव पैदा करना नहीं है, लेकिन वे अपनी मांग के समाधान तक आंदोलन जारी रखने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि 4 प्रतिशत भूखंड का मुद्दा किसानों के लिए लंबे समय से लंबित अधिकार का विषय है।
प्राधिकरण और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल
प्रेस वार्ता के दौरान किसानों ने प्राधिकरण की कार्यप्रणाली को लेकर भी कई सवाल उठाए। किसानों का कहना है कि प्राधिकरण के पास विभिन्न विकास कार्यों और योजनाओं के लिए संसाधन उपलब्ध रहते हैं, लेकिन किसानों के 4 प्रतिशत भूखंड की मांग सामने आने पर जमीन और आर्थिक संसाधनों की कमी का तर्क दिया जाता है।
किसानों ने प्राधिकरण में लंबे समय से तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली तथा संपत्तियों की निष्पक्ष और सक्षम एजेंसी से जांच कराने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को बिना प्रमाण दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए, लेकिन यदि जांच में भ्रष्टाचार या अनियमितता के आरोप प्रमाणित होते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
परिवार और युवाओं के साथ आंदोलन की तैयारी
किसानों ने कहा कि 22 अक्टूबर से प्रस्तावित सत्याग्रह में परिवार के सदस्य, महिलाएं और युवा भी शामिल होंगे। उनका कहना है कि यह मुद्दा केवल वर्तमान पीढ़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि भूमि अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों के भविष्य से भी जुड़ा है।
किसानों ने प्रस्तावित आंदोलन को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से संचालित करने की बात कही है। उन्होंने क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों से 2 अक्टूबर से शुरू होने वाली पदयात्रा तथा 22 अक्टूबर के सत्याग्रह में शामिल होने की अपील की।
जनप्रतिनिधियों को सौंपे जा चुके हैं ज्ञापन
अमित भाटी ने बताया कि किसान क्षेत्र के विभिन्न जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर चुके हैं और उन्हें अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन भी सौंपे गए हैं। किसानों ने जनप्रतिनिधियों से शेष 4 प्रतिशत आबादी भूखंड के मामले में हस्तक्षेप कर समाधान कराने की मांग की है।
किसानों का कहना है कि वे अपनी मांग को लोकतांत्रिक तरीके से प्रशासन, प्राधिकरण और जनप्रतिनिधियों के सामने रखते रहेंगे। उन्होंने कहा कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को आगे भी जारी रखा जाएगा।
किसानों की प्रमुख मांगें
पात्र एवं वंचित किसानों को शेष 4 प्रतिशत आबादी भूखंड दिया जाए।
4 प्रतिशत आबादी भूखंड से जुड़े लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण किया जाए।
भूखंड आवंटन में पात्र किसानों के साथ समान व्यवस्था अपनाई जाए।
प्राधिकरण की भूमि और संसाधनों की स्थिति के संबंध में पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार एवं अनियमितता के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। 22 अक्टूबर से प्रस्तावित किसान सत्याग्रह के दौरान किसानों और उनके परिवारों के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
प्रेस वार्ता में संतराम प्रधान, कपिल गुर्जर, अमित भाटी, मोहित (जुनपत), अभय भाटी, मुखिया जी, देवेंद्र प्रधान और मदन मुखिया समेत कई किसान एवं प्रतिनिधि मौजूद रहे। किसानों ने दोहराया कि उनकी मुख्य मांग शेष 4 प्रतिशत आबादी भूखंड को लेकर है और वे इस मुद्दे के समाधान के लिए आगे भी शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
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