DNA साक्ष्य बना अहम कड़ी, दिल्ली बस गैंगरेप मामले में 398 पन्नों की चार्जशीट दाखिल

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (30 September 2026): दिल्ली में 4 अगस्त को निजी स्लीपर बस में 16 वर्षीय किशोरी के साथ हुए कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने जांच पूरी करते हुए चालक कुलदीप और कंडक्टर संदीप के खिलाफ 398 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया है। पुलिस के अनुसार, मामले की जांच में DNA और अन्य फोरेंसिक साक्ष्यों ने अहम भूमिका निभाई। दोनों आरोपितों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की धारा 6 और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। आरोपपत्र 18 सितंबर को दाखिल किया गया था और अदालत ने 24 सितंबर को इसका संज्ञान लिया।

पुलिस की जांच में बस के अंदर से कई जैविक और अन्य फोरेंसिक नमूने जुटाए गए। सीटों, स्टीयरिंग व्हील, चालक दल की सीट के पास रखे कंबल और बस के गलियारे में बिछी बेडशीट सहित विभिन्न स्थानों से नमूने लिए गए। आरोपितों के घटना के समय पहने कपड़ों को भी जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया। पुलिस के मुताबिक, किशोरी के कपड़ों और बस से मिले नमूनों, बाल तथा अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपितों को घटना से जोड़ने में मदद मिली। जांच में DNA और फिंगरप्रिंट जैसे साक्ष्यों का इस्तेमाल बस के भीतर मौजूदगी और घटनाक्रम से संबंधित कड़ियों की पुष्टि के लिए किया गया।

पुलिस के मुताबिक, मैनपुरी की रहने वाली किशोरी 4 अगस्त को घर से निकलकर नोएडा पहुंची थी और सेक्टर-63 जाने के लिए परी चौक के आसपास बस का इंतजार कर रही थी। आरोप है कि कंडक्टर संदीप ने उसे बस में बैठाया, जिसके बाद चलती स्लीपर बस में उसके साथ दुष्कर्म किया गया। जांच के अनुसार बस नोएडा से दिल्ली की ओर बढ़ती रही और किशोरी को बाद में कश्मीरी गेट के पास छोड़ दिया गया। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार किया और बस को कब्जे में लेकर उससे संबंधित साक्ष्य जुटाए।

चार्जशीट में बस की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई महत्वपूर्ण तथ्य दर्ज किए गए हैं। पुलिस जांच के अनुसार, बस पर 11 ट्रैफिक चालान लंबित थे। बस में लगा CCTV कैमरा काम नहीं कर रहा था और खिड़कियों पर भारी पर्दे लगे थे, जिससे अंदर की गतिविधियां बाहर से दिखाई देना मुश्किल था। जांच में दोनों आरोपितों की नियुक्ति के दौरान कथित तौर पर पर्याप्त सत्यापन नहीं किए जाने की बात भी सामने आई है। पुलिस ने मामले में कुल 50 गवाहों को आरोपपत्र में शामिल किया है और बताया कि चार्जशीट घटना के 48 दिनों के भीतर दाखिल की गई।

मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी स्वतः संज्ञान लेते हुए दिल्ली, गौतम बुद्ध नगर और मैनपुरी पुलिस से जांच की स्थिति तथा पीड़िता को उपलब्ध कराए गए मुआवजे की जानकारी मांगी थी। अब आरोपपत्र दाखिल होने और अदालत द्वारा इसका संज्ञान लिए जाने के बाद मामले की आगे की सुनवाई न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगी। आरोपपत्र में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा।


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