आली गांव में 1800 मकान-दुकानों पर खाली करने का नोटिस, कार्रवाई के विरोध में धरना तेज

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (28 September 2026): दक्षिणी दिल्ली के आली गांव में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की जमीन पर बने करीब 1800 मकान-दुकानों को खाली कराने की कार्रवाई के विरोध में स्थानीय लोगों का प्रदर्शन तेज हो गया है। आली चौक से शिव मंदिर तक पुश्ता रोड के दोनों ओर करीब 1500 मकान-दुकानों और पीर मोहल्ले में करीब 300 मकानों पर खाली करने के नोटिस लगाए गए हैं। नोटिस में तय समयसीमा के भीतर परिसर खाली करने का निर्देश दिया गया है। समयसीमा खत्म होने के बाद पुलिस बल की मौजूदगी में कब्जा हटाने की कार्रवाई की तैयारी है।

स्थानीय लोगों ने कार्रवाई के खिलाफ धरना शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर अपने घर और दुकानें खाली नहीं करेंगे। उनका दावा है कि कई परिवार आजादी के बाद से यहां रह रहे हैं और उनके पास पहचान पत्र, बिजली-पानी के बिल सहित कई दस्तावेज हैं। लोगों ने कानूनी लड़ाई जारी रखने के साथ सरकार से पुनर्वास की स्पष्ट व्यवस्था करने की मांग की है। उनका कहना है कि अचानक मकान खाली कराने से हजारों लोगों के सामने रहने का संकट खड़ा हो जाएगा।

आली गांव में करीब 8.48 एकड़ जमीन को लेकर उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग और स्थानीय लोगों के बीच करीब 24 साल से विवाद चल रहा है। उपलब्ध अदालती रिकॉर्ड और रिपोर्टों के मुताबिक, वर्ष 2002 में जमीन से जुड़े मामले में फैसला सिंचाई विभाग के पक्ष में आया था। वर्ष 2004 में जमीन के कुछ हिस्सों से कब्जा हटाया गया था, लेकिन आबादी वाले हिस्से में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। पिछले वर्ष साकेत कोर्ट से भी विभाग के पक्ष में फैसला आने के बाद जमीन खाली कराने की प्रक्रिया फिर तेज हुई है।

नोटिस के बाद इलाके में करीब 15 हजार लोगों के सामने दोबारा आशियाना बसाने की चिंता पैदा हो गई है। दिवाली से पहले संभावित कार्रवाई को लेकर स्थानीय परिवार परेशान हैं। कई लोगों का कहना है कि उन्होंने जीवनभर की कमाई से अपने घर बनाए हैं और अब उन्हें खाली करने का निर्देश मिला है। वहीं, दुकानदारों के सामने मकान के साथ रोजी-रोटी का संकट भी खड़ा हो गया है। स्थानीय निवासी राजकुमार और ठाकुर विकास प्रधान ने बताया कि उनके परिवार की कई पीढ़ियां इसी इलाके में रह रही हैं और अब बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।

दुकानदारों के लिए भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। स्थानीय दुकानदार मेहंत पांडेय के मुताबिक, दिवाली के मद्देनजर उन्होंने कर्ज लेकर दुकान में सजावट का सामान भरा था। दुकान खाली होने की स्थिति में माल और कर्ज दोनों का संकट खड़ा हो सकता है। उनका कहना है कि उनके कारोबार से करीब 150 कारीगरों का रोजगार भी जुड़ा हुआ है। दूसरी ओर, सिंचाई विभाग अदालत के आदेश के तहत जमीन से कब्जा हटाने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में अब स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई और पुनर्वास को लेकर सरकार के रुख पर है।


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