BRICS Summit 2026: एक क्लिक में 6 Key Points के साथ समझें

टेन न्यूज नेटवर्क

New Delhi News (13 सितम्बर 2026): BRICS देशों ने शनिवार, 12 सितंबर को नई दिल्ली घोषणा-पत्र को अपनाते हुए व्यापार, आतंकवाद, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्थानीय मुद्राओं, वैश्विक शासन और विकास सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर साझा रुख पेश किया। टैरिफ, व्यापारिक तनाव और बढ़ते भू-राजनीतिक विभाजन के बीच जारी इस घोषणा-पत्र में कई ऐसे मुद्दे शामिल हैं, जिनका वैश्विक अर्थव्यवस्था और Global South की राजनीति पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

भारत के लिए भी यह घोषणा-पत्र कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां लेकर आया। विशेष रूप से पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, वित्त और औद्योगिक सहयोग से जुड़ी भारत की पहलों को इसमें प्रमुखता दी गई।

1. एकतरफा टैरिफ और व्यापार प्रतिबंधों का विरोध

BRICS देशों ने एकतरफा व्यापार प्रतिबंधों और संरक्षणवादी उपायों का विरोध करते हुए इन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून और WTO के नियमों के अनुरूप नहीं बताया। घोषणा-पत्र में ऐसे एकतरफा दबावपूर्ण उपायों को समाप्त करने की मांग की गई।

BRICS ने कहा कि उसके सदस्य देश अलग-अलग परिस्थितियों के बावजूद ऐसे अनुचित संरक्षणवादी कदमों से प्रभावित होते हैं। हालांकि, घोषणा-पत्र में किसी देश के खिलाफ सीधे तौर पर प्रतिशोधात्मक व्यापार तंत्र बनाने की घोषणा नहीं की गई। कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट जैसे एकतरफा, भेदभावपूर्ण और संरक्षणवादी उपायों का भी विरोध किया गया।

BRICS Summit 2026

2. आतंकवाद पर सख्त रुख, पहलगाम हमले की कड़ी निंदा

भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा रही। इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी।

BRICS ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के खिलाफ प्रतिबद्धता दोहराते हुए सीमा पार आतंकवाद, आतंकवाद के वित्तपोषण और आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने पर भी चिंता जताई।

घोषणा-पत्र में आतंकवाद के खिलाफ किसी भी प्रकार के दोहरे मानदंड को खारिज करते हुए कहा गया कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। युवाओं में बढ़ते कट्टरपंथ और उग्रवाद को रोकने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

3. पश्चिम एशिया के संघर्ष पर साझा रुख

ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों की मौजूदगी के बीच BRICS के लिए पश्चिम एशिया के मुद्दे पर सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण था। इसके बावजूद घोषणा-पत्र में क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई गई और सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने तथा बातचीत और कूटनीति के जरिए विवादों का समाधान करने की अपील की गई।

गाजा की मानवीय स्थिति पर भी गंभीर चिंता जताई गई। BRICS ने युद्धविराम बनाए रखने, मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने और फिलिस्तीनियों के जबरन विस्थापन का विरोध किया।

घोषणा-पत्र में 1967 की सीमाओं के आधार पर पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य के साथ दो-राष्ट्र समाधान के प्रति समर्थन दोहराया गया।

4. स्थानीय मुद्राओं को बढ़ावा, लेकिन साझा BRICS करेंसी नहीं

BRICS की बैठक में लंबे समय से चर्चा में रही साझा BRICS मुद्रा को लेकर कोई नई घोषणा नहीं हुई। इसके बजाय सदस्य देशों ने स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया।

BRICS Payment Task Force के जरिए सदस्य देशों की भुगतान और मैसेजिंग प्रणालियों के बीच बेहतर तालमेल पर काम जारी है। इसका उद्देश्य सीमा पार भुगतान को तेज, सस्ता, सुरक्षित और अधिक सुलभ बनाना है।

साथ ही, New Development Bank से स्थानीय मुद्राओं में वित्तपोषण बढ़ाने और विकास तथा बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाने का आह्वान किया गया।

5. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर Global South की आवाज

घोषणा-पत्र में AI को आर्थिक विकास और बेहतर शासन के लिए महत्वपूर्ण अवसर के रूप में प्रस्तुत किया गया। BRICS ने AI तक व्यापक पहुंच के साथ-साथ सुरक्षित, समावेशी, विश्वसनीय, ऊर्जा-कुशल और जिम्मेदार AI के विकास पर जोर दिया।

सदस्य देशों ने Global South की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए AI संसाधनों तक पहुंच बढ़ाने की आवश्यकता बताई। साथ ही, फरवरी 2026 में भारत में आयोजित AI Impact Summit की मेजबानी का स्वागत किया गया और AI के वैश्विक शासन से जुड़े BRICS Leaders’ Statement को लागू करने की प्रतिबद्धता जताई गई।

6. भारत की प्राथमिकताओं की झलक: DPI, स्वास्थ्य और Industry 4.0

नई दिल्ली घोषणा-पत्र में भारत की कई प्रमुख पहलों को भी समर्थन मिला। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में BRICS देशों के बीच DPI Repository बनाने और सदस्य देशों में DPI आधारित पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का प्रस्ताव सामने आया।

स्वास्थ्य क्षेत्र में BRICS Training Hub Network और मानसिक स्वास्थ्य के लिए Centres of Excellence का नेटवर्क विकसित करने का समर्थन किया गया। बेंगलुरु स्थित NIMHANS को इस पहल के समन्वय केंद्र के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई।

इसके अलावा, भारत में BRICS Industrial Competencies Centre की स्थापना का स्वागत किया गया, जिसका उद्देश्य विनिर्माण कंपनियों और छोटे व्यवसायों को Industry 4.0 तथा उन्नत डिजिटल तकनीकों को अपनाने में सहायता देना है।

निष्कर्ष

BRICS का नई दिल्ली घोषणा-पत्र ऐसे समय में सामने आया है जब दुनिया व्यापारिक तनाव, टैरिफ, युद्ध और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों से जूझ रही है। घोषणा-पत्र में जहां एक ओर एकतरफा व्यापार प्रतिबंधों का विरोध और आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख दिखाई दिया, वहीं दूसरी ओर स्थानीय मुद्राओं, AI, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास सहयोग के जरिए Global South के लिए साझा मंच को मजबूत करने की कोशिश नजर आई।।


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