गौतमबुद्ध नगर की बदहाली की IBA अध्यक्ष अमित उपाध्याय ने खोली पोल, बोले बेसिक सुविधाएं नहीं तो इंडस्ट्री कैसे ग्रो करेगी?
टेन न्यूज़ नेटवर्क
Greater Noida News (12/09/2026): गौतमबुद्ध नगर के औद्योगिक क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं को लेकर इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन (IBA) के अध्यक्ष अमित उपाध्याय ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि शहर के इंडस्ट्रियल और रेजिडेंशियल दोनों क्षेत्रों में समस्याओं का अंबार है। सड़कों, ड्रेनेज, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट, ग्रीन बेल्ट और जल निकासी जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर उन्होंने चिंता जताई।
टेन न्यूज़ नेटवर्क से खास बातचीत में अमित उपाध्याय ने कहा कि शहर में चाहे इंडस्ट्रीज हों या जनमानस, इंडस्ट्रियल एरिया हो या रेजिडेंशियल एरिया, हर जगह समस्याएं हैं। उन्होंने ग्रीन बेल्ट की खराब स्थिति, सड़कों पर गड्ढों और नालियों व ड्रेन के चोक होने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण थोड़ी सी बारिश में ही सड़कें और औद्योगिक परिसर पानी से भर जाते हैं। अमित उपाध्याय के मुताबिक, सड़कें साल भर में ही टूट जा रही हैं और जगह-जगह गड्ढे हैं। नालियां और ड्रेन चोक हैं। जल निकासी का पर्याप्त साधन नहीं है। पेड़ सूख रहे हैं और रेजिडेंशियल से लेकर इंडस्ट्रियल सेक्टर तक कई जगहों पर अंधेरा रहता है।
“टेंडर दिखाए जा रहे हैं, बेसिक सुविधाओं पर ध्यान नहीं”
IBA अध्यक्ष ने प्राधिकरणों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि लगातार नए टेंडर और सड़क चौड़ीकरण की योजनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन जिन बुनियादी सुविधाओं की जरूरत है, उन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा, “पहले मूलभूत सुविधाएं दीजिए। प्रॉपर ड्रेनेज, प्रॉपर सीवरेज, अच्छी सड़कें, अच्छे पार्क और अच्छी स्ट्रीट लाइट्स दीजिए। जब बेसिक एमेनिटीज मिलेंगी, तभी बिजनेस का एक्सपेंशन होगा।”
उन्होंने कहा कि गौतमबुद्ध नगर देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। यहां देश-विदेश से खरीदार और निवेशक आते हैं। ऐसे में शहर की खराब स्थिति औद्योगिक विकास की छवि को प्रभावित कर सकती है। अमित उपाध्याय ने कहा, “आज गौतमबुद्ध नगर वैश्विक निवेश का मंच बना हुआ है। देश-विदेश के बायर यहां आ रहे हैं। लेकिन जब वे शहर से गुजरते हैं और बदहाल स्थिति देखते हैं, तो सवाल उठता है कि इतना बड़ा इंडस्ट्रियल एरिया ऐसी स्थिति में क्यों है?”
“धरातल पर सुधार के बिना 1 ट्रिलियन इकॉनमी की बात बेमानी”
उन्होंने कहा कि यदि औद्योगिक क्षेत्रों में सड़क, ड्रेनेज, सीवरेज, साफ-सफाई और जल निकासी जैसी सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं होंगी, तो उद्योगों के विस्तार की बात करना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा, “हम 1 ट्रिलियन इकॉनमी की बात करते हैं, आत्मनिर्भर भारत की बात करते हैं और विजन 2047 की बात करते हैं। लेकिन धरातल पर जब तक इन समस्याओं का सुधार नहीं होगा, ये बातें बेमानी हैं।” उन्होंने बताया कि कई फैक्ट्रियों में पानी भरने, सड़कों पर जलभराव, गंदगी, धूल और कूड़ा न उठने जैसी समस्याएं लगातार बनी हुई हैं।
“पिछले 4-5 साल के टेंडरों की जांच होनी चाहिए”
IBA अध्यक्ष ने पिछले वर्षों में हुए विकास कार्यों और टेंडरों की जांच की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा, “पिछले 4-5 सालों में जितने भी टेंडर हुए हैं, उनकी जांच होनी चाहिए कि किस-किस को टेंडर हुए हैं और किस तरह का काम हुआ है।”
उन्होंने जल निकासी के लिए पंप लगाए जाने पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि ड्रेनेज सिस्टम सही तरीके से विकसित किया जाए तो बार-बार पंप लगाकर पानी निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा, “पंप लगाने की जरूरत क्यों पड़ती है? पंप से पानी क्यों निकाला जा रहा है? इतने बड़े-बड़े टेंडर जल निकासी और सिविल कार्यों के लिए हो रहे हैं, फिर भी समस्या जस की तस है।”
पानी की सुविधा नहीं, फिर लाखों रुपये के बिल क्यों?
अमित उपाध्याय ने औद्योगिक इकाइयों को भेजे जा रहे पानी के बिलों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि यदि प्राधिकरण पर्याप्त पानी की सुविधा उपलब्ध नहीं करा रहा है तो उद्यमियों से पानी का शुल्क किस आधार पर लिया जा रहा है। उन्होंने कहा, “आप बिना पानी की सुविधा दिए पानी का बिल दे रहे हैं। लाखों रुपये के पानी के बिल भेजे जा रहे हैं और पानी दे नहीं रहे हैं। जब आप कोई सर्विस नहीं दे रहे हैं तो बिना सर्विस दिए आप बिल कैसे ले सकते हैं?” उन्होंने लीज रेंट और सर्विस चार्ज को लेकर भी पारदर्शिता की मांग की। उनके अनुसार, उद्यमियों को यह बताया जाना चाहिए कि उनसे लिए जा रहे शुल्क के बदले कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
“सुनवाई नहीं हुई तो उद्यमी भी सड़क पर उतरेंगे”
अमित उपाध्याय ने चेतावनी दी कि यदि लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो उद्यमियों के पास आंदोलन का रास्ता अपनाने के अलावा विकल्प नहीं बचेगा। उन्होंने कहा, “बहुत जल्दी अगर इन सुविधाओं का विकास नहीं हुआ, सड़क और ड्रेनेज सिस्टम की समस्याएं दूर नहीं हुईं, तो उद्यमी सड़क पर उतरेंगे। आज किसान सड़क पर उतर रहे हैं, कल को उद्यमी जब सड़क पर उतर जाएंगे तो स्थिति अलग होगी।” उन्होंने यह भी कहा कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो उद्यमी अपनी फैक्ट्रियों की चाबियां अधिकारियों को सौंपने पर मजबूर हो सकते हैं।
इंडस्ट्रियल एरिया में अतिक्रमण पर भी उठाए सवाल
अमित उपाध्याय ने औद्योगिक क्षेत्रों में अतिक्रमण और सड़कों पर वाहनों की पार्किंग का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि कई जगहों पर अतिक्रमण के कारण उद्यमियों को अपनी फैक्ट्रियों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा, “इंडस्ट्रियल एरिया में अतिक्रमण इतना है कि कोई अपनी फैक्ट्री में नहीं जा सकता। गाड़ियां रोड पर पार्क हो रही हैं। कई बार अतिक्रमण हटाने के लिए कहा गया, लेकिन सुनवाई नहीं होती।”
“अधिकारी धरातल पर आएं और समस्याएं देखें”
अमित उपाध्याय ने प्राधिकरणों के वरिष्ठ अधिकारियों से औद्योगिक और रिहायशी क्षेत्रों का मौके पर निरीक्षण करने की अपील की। उन्होंने कहा, “प्राधिकरण के सीनियर अधिकारी रोड पर आएं, धरातल पर आएं। चाहे रेजिडेंशियल सेक्टर हो या इंडस्ट्रियल सेक्टर, हमारा जो ग्रेटर नोएडा और गौतमबुद्ध नगर पहले सुंदर और हरा-भरा था, वही हमें दोबारा चाहिए।”
हालांकि, उन्होंने गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उद्योग बंधु की बैठकों के माध्यम से उद्यमियों की समस्याओं को संज्ञान में लिया जा रहा है। अमित उपाध्याय ने कहा, “जिलाधिकारी महोदय का विजन इंडस्ट्री वालों के लिए सकारात्मक है। लगातार हमारी मीटिंग्स हो रही हैं और वे उपलब्ध भी रहती हैं। हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में सुविधाओं का विकास होगा और वर्षों से चली आ रही समस्याओं का समाधान होगा।”
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