दिल्ली HC का बड़ा आदेश: स्कूल की जमीन पर बने मंदिर को हटाएं

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (11 September 2026): दिल्ली हाई कोर्ट ने नर्सरी स्कूल के लिए निर्धारित सरकारी जमीन पर बने एक मंदिर को नियमित करने की मांग खारिज कर दी है। जस्टिस जसमीत कौर की पीठ ने स्पष्ट कहा कि जिस जमीन का आवंटन मूल रूप से नर्सरी स्कूल के लिए किया गया था, उस पर धार्मिक ढांचे के निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने मंदिर को अवैध ढांचा बताते हुए उसे हटाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, याचिकाकर्ताओं से कहा गया है कि मंदिर में स्थापित मूर्तियों को वहां से सम्मानपूर्वक हटा लिया जाए।

मामले में याचिकाकर्ता एक पंजीकृत सोसायटी थी, जिसने दिल्ली विकास प्राधिकरण यानी डीडीए के वर्ष 2021 के फैसले को रद्द करने और मंदिर को नियमित करने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि संबंधित जमीन हाउसिंग सोसायटी विकसित करते समय नर्सरी स्कूल के लिए निर्धारित की गई थी। डीडीए ने वर्ष 1987 में सोसायटी से अलग धार्मिक सोसायटी बनाकर जमीन के आवंटन के लिए आवेदन करने को कहा था, जिसके बाद याचिकाकर्ता सोसायटी का गठन किया गया। हालांकि, अदालत के अनुसार वर्ष 1991-92 में बिना जमीन के उपयोग में बदलाव कराए और बिना डीडीए की मंजूरी के मंदिर का निर्माण कर दिया गया।

याचिकाकर्ता सोसायटी ने अपने पक्ष में डीडीए के वर्ष 2016 के उस फैसले का हवाला दिया था, जिसमें मंदिर के लिए प्लॉट आवंटित करने को मंजूरी दी गई थी। लेकिन हाई कोर्ट ने पाया कि दिसंबर 2017 में एक खंडपीठ ने डीडीए को इस आवंटन के मामले पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया था। इसके बाद डीडीए ने मामले की समीक्षा करते हुए निष्कर्ष निकाला कि सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक श्रेणियों के लिए सरकारी जमीन का निपटारा नीलामी के जरिए किया जाना चाहिए और किसी भी अनधिकृत कब्जे को नियमित करने के अनुरोध पर विचार नहीं किया जा सकता।

डीडीए ने अदालत को बताया कि वर्ष 2021 की अधिसूचना के बाद स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक-सांस्कृतिक और खेल सुविधाओं के लिए सरकारी जमीन की नीलामी की नीति अपनाई गई है, जिसका उद्देश्य राजस्व बढ़ाना भी है। डीडीए के मुताबिक, संबंधित सोसायटी यदि मंदिर के लिए जमीन चाहती है तो वह ऐसी नीलामी प्रक्रिया में हिस्सा ले सकती है। हाई कोर्ट ने डीडीए के रुख को स्वीकार करते हुए साफ कर दिया कि बिना मंजूरी और निर्धारित भूमि उपयोग के विपरीत सरकारी जमीन पर बने धार्मिक ढांचे को नियमित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।


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