नवोली में 500 एकड़ जमीन के मालिकाना हक पर घमासान, किसानों ने मांगी SIT जांच

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (09/09/2026): नवोली गांव में करीब 500 एकड़ जमीन के मालिकाना हक को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। किसान परिवारों का आरोप है कि पुराने राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज उनके नाम कथित तौर पर हटाकर दूसरे लोगों के नाम दर्ज कर दिए गए। इस मामले को लेकर करीब 250 किसान परिवार लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। किसानों ने पूरे मामले की निष्पक्ष SIT जांच कराने और जमीन का वास्तविक मालिकाना हक तय होने तक मुआवजे की राशि किसी भी पक्ष को जारी नहीं करने की मांग की है।

टेन न्यूज नेटवर्क से बातचीत में किसान आशीष कसाना ने बताया कि उनके दादा ने वर्ष 1943 में नवोली गांव में करीब 2,500 बीघा, यानी लगभग 500 एकड़ जमीन खरीदी थी। उनके अनुसार, परिवार लंबे समय तक इस जमीन पर खेती करता रहा और राजस्व सहित अन्य करों का भुगतान करता रहा। आशीष कसाना का दावा है कि पुराने खेवट और खतौनी समेत राजस्व रिकॉर्ड में उनके परिवार का नाम दर्ज था, लेकिन बाद में कथित तौर पर नाम हटाकर दूसरे लोगों के नाम दर्ज कर दिए गए।

कसाना के मुताबिक, इस मामले को लेकर उनका परिवार वर्ष 1990 से अदालतों में कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। मामला जिला अदालत से होते हुए हाईकोर्ट तक पहुंचा। उनके अनुसार, नवोली गांव की जमीन से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड की जांच के लिए SIT जांच की बात भी सामने आई थी। किसान पक्ष का सवाल है कि 1359 फसली के रिकॉर्ड में श्रेणी-1 के रूप में दर्ज किसानों के नाम आखिर किस आधार पर हटाए गए और उनकी जगह दूसरे लोगों के नाम कैसे दर्ज किए गए।

किसानों का कहना है कि रेलवे विभाग से जुड़ी जमीन की कार्रवाई के दौरान उन्होंने पटवारी, तहसीलदार, SDM और सिटी मजिस्ट्रेट समेत कई अधिकारियों को पत्र और शिकायतें दीं। उनका आरोप है कि राजस्व रिकॉर्ड में नाम बदले जाने को लेकर लगातार जानकारी और जांच की मांग की गई, लेकिन अब तक उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।

मामला मुआवजे की राशि को लेकर भी विवादित है। किसान पक्ष के अनुसार करीब 20 करोड़ रुपये का मुआवजा सरकारी खजाने में जमा है, जिस पर उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई है। किसानों की मांग है कि जब तक जमीन के वास्तविक मालिकाना हक का फैसला नहीं हो जाता, तब तक मुआवजे की राशि किसी भी पक्ष को जारी न की जाए।

आशीष कसाना ने बताया कि किसानों की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, PMO और राजस्व विभाग तक शिकायतें पहुंचाई गई हैं। किसानों की मांग है कि नवोली गांव के पुराने राजस्व रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कर यह पता लगाया जाए कि मूल किसानों के नाम कब, क्यों और किस आधार पर हटाए गए और उनकी जगह नए नाम किस प्रक्रिया के तहत दर्ज किए गए।

किसान पक्ष का कहना है कि यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है और वे पिछले करीब 36 वर्षों से न्याय का इंतजार कर रहे हैं। किसानों ने सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जमीन का वास्तविक मालिकाना हक तय करने और तब तक मुआवजे की राशि सुरक्षित रखने की मांग की है।

अब किसानों की नजर सरकार और प्रशासन की कार्रवाई पर है कि इस पुराने जमीन विवाद में जांच कब शुरू होती है और मुआवजे की राशि को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है।


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