दिल्ली में 28.87 करोड़ का कथित चावल घोटाला, CBI ने दर्ज की FIR

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (01 September 2026): दिल्ली में गरीबों, दिहाड़ी मजदूरों और प्रवासी कामगारों को किफायती दर पर चावल उपलब्ध कराने की योजना में कथित बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भारतीय खाद्य निगम (FCI), उत्तर पूर्व क्षेत्रीय कृषि विपणन निगम (NERAMAC) और दिल्ली सरकार से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। CBI ने 27 अगस्त 2026 को इस मामले में नियमित FIR दर्ज की है। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस पूरे मामले में करीब 28.87 करोड़ रुपये के वित्तीय नुकसान का आरोप है।

CBI की जांच का मुख्य आधार ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के नियमों से जुड़ा है। जांच एजेंसी के अनुसार, इस व्यवस्था के तहत बिना ई-नीलामी चावल आवंटन का लाभ राज्य सरकारों या उनके अधिकृत निगमों को मिल सकता था, जबकि NERAMAC केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम होने के कारण इस श्रेणी में पात्र नहीं था। आरोप है कि इस नियम की बाधा को दूर करने के लिए NERAMAC के अधिकारियों ने दिल्ली सरकार के तत्कालीन खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा को पत्र भेजा। इसके बाद दिल्ली सरकार ने प्रस्ताव को FCI को अग्रसारित किया और FCI के तत्कालीन दिल्ली क्षेत्र के अधिकारियों ने चावल आवंटन को मंजूरी दे दी।

जांच के मुताबिक, असम की दो और कोलकाता की एक निजी कंपनी ने NERAMAC के माध्यम से FCI से 50,645 मीट्रिक टन चावल हासिल किया। दावा किया गया था कि यह चावल दिल्ली में राशन कार्ड नहीं रखने वाले गरीबों, मजदूरों और प्रवासी कामगारों को किफायती दरों पर उपलब्ध कराया जाएगा। आरोप है कि इसके बजाय चावल को निजी बाजार में बेच दिया गया। जनवरी से मई 2026 के बीच महज पांच महीनों में इस प्रक्रिया से करीब 28.87 करोड़ रुपये का अनुचित मुनाफा कमाए जाने की बात FIR में सामने आई है।

मामले में कीमतों को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं। CBI के अनुसार, निजी कंपनियों ने NERAMAC के साथ समझौते किए और FCI डिपो में लगभग 23.25 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से भुगतान कर चावल हासिल किया, जबकि उस समय प्रचलित दर करीब 28.90 रुपये प्रति किलोग्राम बताई गई है। जांच एजेंसी का आरोप है कि निजी कंपनियों ने NERAMAC को माध्यम बनाकर FCI से चावल हासिल किया और इस पूरी प्रक्रिया में दिल्ली सरकार के पत्र का इस्तेमाल किया गया। CBI के मुताबिक, इससे FCI को लगभग 28.87 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ।

इस मामले को लेकर दिल्ली की राजनीति भी गरमा गई है। इससे पहले आम आदमी पार्टी ने विधानसभा के मानसून सत्र में चावल आवंटन को लेकर दिल्ली सरकार पर सवाल उठाए थे। वहीं मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा था कि दिल्ली सरकार ने चावल न खरीदा और न बेचा, बल्कि प्रस्ताव को FCI के पास अग्रसारित किया था। अब FIR दर्ज होने के बाद CBI यह पता लगाने में जुटी है कि चावल आवंटन की प्रक्रिया में किस स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ और किन अधिकारियों या निजी पक्षों की इसमें भूमिका रही।

CBI ने FIR में FCI और NERAMAC के कई तत्कालीन अधिकारियों के साथ निजी कंपनियों से जुड़े लोगों को भी नामजद किया है। इनमें FCI की तत्कालीन महाप्रबंधक (दिल्ली क्षेत्र) कुंभीरामन पद्मिनी आशा, सहायक महाप्रबंधक ब्रह्म प्रकाश, प्रबंधक अमरेंद्र विक्रम, NERAMAC के तत्कालीन प्रबंध निदेशक भास्कर बरुआ, अतिरिक्त महाप्रबंधक अंजल कुमार दता और उप प्रबंधक दिलीप साहा के अलावा निजी कंपनियों के निदेशक राजेश बजाज और पंकज सराफ के नाम शामिल हैं। CBI ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। अब जांच में दस्तावेजों, भुगतान, चावल की आपूर्ति और निजी बाजार में बिक्री की पूरी कड़ी खंगाली जाएगी।

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