जीबीयू में ‘मिशन शक्तिसैट–स्पेसवॉक’ ने जगाई अंतरिक्ष की नई जिज्ञासा

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (30/08/2026): गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) में चल रहे ‘मिशन शक्तिसैट’ के तहत शनिवार को आयोजित ‘स्पेसवॉक’ कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए विज्ञान, अंतरिक्ष तकनीक और अंतरिक्ष यात्रा की वास्तविक दुनिया से जुड़ने का खास अवसर बना। कार्यक्रम में भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए अपने अंतरिक्ष मिशन के अनुभव साझा किए और अंतरिक्ष से पृथ्वी के लिए गए वीडियो एवं तस्वीरें प्रदर्शित कीं।

कार्यक्रम में सेशेल्स की प्रथम महिला श्रीमती वेरोनिक हर्मिनी, स्पेस किड्ज इंडिया की संस्थापक एवं सीईओ डॉ. श्रीमथी केसन, IN-SPACe के निदेशक डॉ. विनोद कुमार और गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह समेत बड़ी संख्या में विद्यार्थी और प्रतिभागी मौजूद रहे।

अंतरिक्ष से पृथ्वी के नजारे बने आकर्षण का केंद्र

कार्यक्रम का सबसे खास पहलू ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला और विद्यार्थियों के बीच हुआ सीधा संवाद रहा। उन्होंने अंतरिक्ष मिशन के दौरान सामने आए अनुभवों को सरल अंदाज में विद्यार्थियों के साथ साझा किया। अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखने के अनुभव और वहां से रिकॉर्ड किए गए दृश्य विद्यार्थियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।

शुभांशु शुक्ला ने कहा कि अंतरिक्ष यात्रा सिर्फ वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जिज्ञासा, अनुशासन, टीमवर्क, निरंतर सीखने और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में निर्णय लेने की प्रक्रिया भी है। उन्होंने विद्यार्थियों को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में नए प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े वैज्ञानिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रतिभा के साथ आत्मविश्वास, समस्या का समाधान खोजने की क्षमता और असफलताओं से सीखकर आगे बढ़ने का साहस जरूरी है। उन्होंने युवाओं से देश के वैज्ञानिक एवं तकनीकी विकास में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

कुलपति बोले- विद्यार्थियों को वास्तविक वैज्ञानिक अनुभव से जोड़ना जरूरी

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने मिशन शक्तिसैट को विश्वविद्यालय के लिए महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी पहल बताया। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान अब केवल वैज्ञानिकों या विशेषज्ञों तक सीमित क्षेत्र नहीं रह गया है। युवा अपनी कल्पनाशक्ति, तकनीकी दक्षता और नवाचार के माध्यम से इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल कक्षा तक सीमित शिक्षा देने के बजाय उन्हें वास्तविक जीवन के वैज्ञानिक अनुभवों से जोड़ना है। मिशन शक्तिसैट इसी सोच को आगे बढ़ाने वाला मंच है, जो विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार, रचनात्मकता और वैश्विक सोच को मजबूत करने में मदद करेगा। कुलपति ने कहा कि मिशन में भारत के साथ 108 देशों की छात्राओं की भागीदारी इसके अंतरराष्ट्रीय स्वरूप और व्यापक पहुंच को दर्शाती है।

छात्राओं को सैटेलाइट निर्माण से मिशन संचालन तक का अनुभव

स्पेस किड्ज इंडिया की संस्थापक एवं सीईओ डॉ. श्रीमथी केसन ने कहा कि मिशन शक्तिसैट का उद्देश्य विभिन्न देशों की छात्राओं को एक साझा मंच पर लाकर उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान की व्यावहारिक समझ देना है। उन्होंने बताया कि मिशन के तहत छात्राओं को केवल अंतरिक्ष विज्ञान की सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी जा रही, बल्कि उन्हें सैटेलाइट निर्माण, पेलोड डेवलपमेंट, सिस्टम इंजीनियरिंग और अंतरिक्ष मिशन की कार्यप्रणाली से भी परिचित कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया के अलग-अलग देशों की बेटियों को एक मंच पर लाकर विज्ञान, तकनीक और अंतरिक्ष के क्षेत्र में उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने का अवसर देना मिशन की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। डॉ. केसन ने गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय को इस अंतरराष्ट्रीय पहल की मेजबानी के लिए धन्यवाद दिया।

सेशेल्स की प्रथम महिला की मौजूदगी ने बढ़ाया अंतरराष्ट्रीय महत्व

कार्यक्रम में सेशेल्स की प्रथम महिला श्रीमती वेरोनिक हर्मिनी की उपस्थिति ने आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। उन्होंने युवा प्रतिभागियों से संवाद किया और शिक्षा, विज्ञान एवं अंतरिक्ष क्षेत्र में विभिन्न देशों के बीच सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।
वहीं, IN-SPACe के निदेशक डॉ. विनोद कुमार ने प्रतिभागियों को भारत में तेजी से विकसित हो रहे स्पेस सेक्टर और इस क्षेत्र में युवाओं के लिए उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने भारत के उभरते अंतरिक्ष इकोसिस्टम से जुड़ी संभावनाओं पर भी प्रतिभागियों का ध्यान आकर्षित किया।

विद्यार्थियों ने पूछे अंतरिक्ष से जुड़े सवाल

स्पेसवॉक के दौरान विद्यार्थियों ने शुभांशु शुक्ला से अंतरिक्ष यात्रा के अनुभव, अंतरिक्ष में जीवन, पृथ्वी को अंतरिक्ष से देखने की अनुभूति और अंतरिक्ष क्षेत्र में करियर की संभावनाओं को लेकर कई सवाल किए। शुक्ला ने विद्यार्थियों के सवालों का जवाब देते हुए अपने अनुभव साझा किए। अंतरिक्ष से ली गई पृथ्वी की तस्वीरों और वीडियो ने विद्यार्थियों के बीच खास उत्साह पैदा किया। कार्यक्रम के दौरान युवाओं में अंतरिक्ष विज्ञान को लेकर जिज्ञासा और भविष्य में इस क्षेत्र में काम करने की रुचि भी देखने को मिली।

प्रमाण पत्र वितरण के साथ हुआ समापन

कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इसके बाद अतिथियों, आयोजकों और प्रतिभागियों के साथ ग्रुप फोटोग्राफ भी लिया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन आर.जी. सिद्धार्थ और असिस्टेंट प्रोफेसर रिया राज ने किया।
मिशन शक्तिसैट–स्पेसवॉक ने विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान को केवल किताबों और कक्षाओं के विषय के रूप में देखने के बजाय उसे वास्तविक अनुभवों, संवाद और प्रयोगों से समझने का अवसर दिया। आयोजन ने युवा प्रतिभाओं को अंतरिक्ष और STEM क्षेत्रों में नए सपने देखने तथा उन्हें साकार करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।


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