108 देशों की बेटियों से मिलीं सेशेल्स की प्रथम महिला, मिशन शक्तिसैट में बोलीं- बेटियों के सपनों की कोई सीमा नहीं
टेन न्यूज नेटवर्क
Greater Noida News (29/08/2026): महिला सशक्तीकरण, अंतरिक्ष विज्ञान और वैश्विक सहयोग का अनूठा संगम शुक्रवार को ग्रेटर नोएडा में देखने को मिला, जब सेशेल्स की प्रथम महिला मैडम वेरोनिक हर्मिनी ने मिशन शक्तिसैट का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने 108 देशों से जुड़ी युवा छात्राओं और बालिका वैज्ञानिकों से मुलाकात की और उन्हें विज्ञान, तकनीक तथा अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
अपने देश में स्नेहपूर्वक ‘सेशेल्स की माँ’ के नाम से पहचानी जाने वाली मैडम वेरोनिक हर्मिनी ने मिशन शक्तिसैट की प्रेरक शक्ति और नेतृत्वकर्ता से भी मुलाकात की, जिन्हें प्रतिभागियों के बीच प्यार से ‘स्पेस मॉम’ कहा जाता है। इस मुलाकात को महिला नेतृत्व और युवा पीढ़ी के सपनों को नई दिशा देने वाले महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा गया।
108 देशों की युवा वैज्ञानिकों से किया संवाद
मिशन शक्तिसैट में आयोजित विशेष कार्यक्रम में मैडम हर्मिनी ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आईं छात्राओं और युवा प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि लड़कियों को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त अवसर, शिक्षा और प्रोत्साहन मिलना बेहद जरूरी है। उन्होंने युवा बेटियों से बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और अपने सपनों को सीमाओं में न बांधने का आह्वान किया। उनके संबोधन में महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने और दुनिया भर की लड़कियों के लिए विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में नए अवसर तैयार करने पर विशेष जोर रहा।
‘दो मातृशक्तियों’ का संदेश बना आकर्षण
मैडम वेरोनिक हर्मिनी और मिशन शक्तिसैट की ‘स्पेस मॉम’ की मुलाकात को कार्यक्रम में दो मातृशक्तियों के मिलन के तौर पर देखा गया। एक ओर सेशेल्स की प्रथम महिला, जिन्हें उनके देश में ‘सेशेल्स की माँ’ के रूप में सम्मान मिलता है, तो दूसरी ओर अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति बेटियों में रुचि पैदा करने वाली ‘स्पेस मॉम’। इस मुलाकात ने एक स्पष्ट संदेश दिया कि बेटियों की प्रतिभा और महत्वाकांक्षाओं के सामने कोई भौगोलिक या सामाजिक सीमा नहीं होनी चाहिए। उचित मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर लड़कियां विज्ञान, तकनीक, अंतरिक्ष अनुसंधान और नेतृत्व के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं।
दुनिया की बेटियों को चंद्र मिशन से जोड़ने की पहल
आयोजकों के अनुसार, मिशन शक्तिसैट दुनिया की सबसे बड़ी ऑल-गर्ल्स चंद्र पहलों में से एक है। इस वैश्विक पहल के माध्यम से 108 देशों की बालिका वैज्ञानिकों और छात्राओं को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। मिशन का प्रमुख उद्देश्य अगली पीढ़ी की महिलाओं को अंतरिक्ष विज्ञान और अन्वेषण के क्षेत्र से जोड़ना है। इसके तहत युवा प्रतिभागियों को वैज्ञानिक सोच विकसित करने, तकनीकी कौशल हासिल करने और नेतृत्व क्षमता को मजबूत करने के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
महिला नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मिला बल
मिशन शक्तिसैट में सेशेल्स की प्रथम महिला की मौजूदगी को इस वैश्विक अभियान के लिए महत्वपूर्ण समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। उनकी यात्रा ने महिला नेतृत्व, विज्ञान शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व को एक साथ रेखांकित किया। कार्यक्रम के दौरान यह संदेश भी प्रमुखता से सामने आया कि अंतरिक्ष विज्ञान केवल रॉकेट, उपग्रह और प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में वे युवा वैज्ञानिक और नेतृत्वकर्ता भी हैं, जो आने वाली पीढ़ी को नए विचारों और बड़े सपनों के लिए प्रेरित करते हैं।

मिशन शक्तिसैट का लक्ष्य क्या है?
मिशन शक्तिसैट का उद्देश्य केवल किसी अंतरिक्ष अभियान को आगे बढ़ाना नहीं है, बल्कि दुनिया के विभिन्न देशों की बेटियों को विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान के साझा मंच से जोड़ना है। पहल के तहत छात्राओं को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की व्यावहारिक जानकारी, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और भविष्य के अवसरों से परिचित कराने का प्रयास किया जा रहा है।
आयोजकों के मुताबिक, यह पहल डॉ. श्रीमती केसन के नेतृत्व में संचालित की जा रही है। इसका लक्ष्य दुनिया भर की लड़कियों और महिलाओं को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की शिक्षा, प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें सशक्त बनाना है।
स्पेस किड्ज इंडिया से जुड़ा है मिशन
मिशन शक्तिसैट को स्पेस किड्ज इंडिया से भी जोड़ा गया है। संगठन युवाओं को अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जोड़ने तथा विज्ञान शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने के लिए काम करता है। आयोजकों का दावा है कि स्पेस किड्ज इंडिया को अब तक 27 उपग्रह मिशनों के निर्माण और प्रक्षेपण का अनुभव है। संगठन ने विद्यार्थी-केंद्रित अंतरिक्ष विज्ञान कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं की अंतरिक्ष क्षेत्र में भागीदारी को बढ़ावा देने पर काम किया है।
मिशन शक्तिसैट को संगठन की व्यापक वैश्विक पहलों में शामिल किया जा रहा है, जिसका दायरा भारत से आगे बढ़ाकर दुनिया के विभिन्न देशों की बेटियों तक पहुंचाने का प्रयास है।
‘धरती से अंतरिक्ष तक बेटियों की उड़ान’
मैडम वेरोनिक हर्मिनी की यात्रा ने मिशन शक्तिसैट को महिला नेतृत्व, विज्ञान शिक्षा और वैश्विक सहयोग के एक साझा मंच के रूप में नई मजबूती दी। कार्यक्रम से यह संदेश उभरा कि यदि बेटियों को सही शिक्षा, अवसर, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिले, तो वे अपनी प्रतिभा के दम पर धरती से लेकर अंतरिक्ष तक नई ऊंचाइयां हासिल कर सकती हैं। मिशन शक्तिसैट का व्यापक संदेश यही है—बेटियों के सपनों की कोई सीमा नहीं होती और अंतरिक्ष की दुनिया में भी उनके लिए अवसरों का आकाश खुला है।
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