BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ SC में याचिका दायर, हटाने की मांग
टेन न्यूज़ नेटवर्क
New Delhi News (22 August 2026): बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) में कथित कुप्रबंधन और संस्थागत पारदर्शिता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका में BCI के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा को पद से हटाने और उनके लगातार लंबे समय तक अध्यक्ष बने रहने के मामले की न्यायिक जांच की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने अदालत से BCI के कामकाज में सुधार और संस्था को अधिक पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने की अपील की है।
याचिका में दावा किया गया है कि मनन कुमार मिश्रा 10 साल से अधिक समय से BCI के अध्यक्ष पद पर बने हुए हैं। इसे लेकर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के कार्यकाल की स्पष्ट सीमा निर्धारित करने की मांग की गई है। साथ ही यह भी कहा गया है कि किसी व्यक्ति को लगातार कई बार इस पद पर चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। याचिका में दो कार्यकालों के बीच अनिवार्य ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ लागू करने का सुझाव भी दिया गया है, ताकि लंबे समय तक एक ही व्यक्ति के हाथों में संस्था की कमान रहने की स्थिति से बचा जा सके।
याचिका में BCI को एक वैधानिक नियामक संस्था बताते हुए उसके अध्यक्ष पद को राजनीतिक गतिविधियों से मुक्त, स्वतंत्र और निष्पक्ष रखने की जरूरत पर जोर दिया गया है। इसमें संस्था के भीतर कथित रूप से शक्ति के लंबे समय तक केंद्रीकरण, संस्थागत नियंत्रण के संकेंद्रण, चुनाव से जुड़े नियमों के कथित उल्लंघन और नियामक फैसलों में पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से राज्य बार काउंसिलों और BCI के चुनाव भी निर्धारित समयसीमा के भीतर कराने के लिए निर्देश देने की मांग की है।
वित्तीय मामलों को लेकर भी याचिका में गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इसमें BCI के वैधानिक कोष, ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE) से मिलने वाली फीस और संस्था के अन्य राजस्व का स्वतंत्र एवं पूर्ण ऑडिट कराने की मांग की गई है। इसके अलावा BCI और उससे जुड़े 1974 ट्रस्ट, B.C.I. ट्रस्ट PEARL-FIRST तथा IIULER (गोवा) के बीच वित्तीय संबंधों, ठेकों और लेन-देन की भी गहन और समयबद्ध जांच की मांग की गई है। याचिका में इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच के जरिए वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने की अपील की गई है।
इस जनहित याचिका के जरिए सुप्रीम कोर्ट के सामने BCI के प्रशासनिक ढांचे, चुनाव प्रक्रिया, नेतृत्व की अवधि और वित्तीय पारदर्शिता से जुड़े व्यापक सवाल रखे गए हैं। हालांकि, याचिका में लगाए गए आरोपों पर अंतिम स्थिति अदालत के विचार और आगे होने वाली सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल याचिका का मुख्य उद्देश्य BCI के कामकाज में जवाबदेही बढ़ाना, नेतृत्व के कार्यकाल को सीमित करना और संस्था से जुड़े वित्तीय लेन-देन की स्वतंत्र जांच सुनिश्चित कराना है।
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