Delhi-NCR में प्रदूषण पर CAQM का बड़ा फैसला, 2027 से डीजल-पेट्रोल LGV के नए रजिस्ट्रेशन रोक

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (20 August 2026): दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने बड़ा कदम उठाया है। 18 अगस्त 2026 को चेयरपर्सन राजेश वर्मा की अध्यक्षता में हुई आयोग की 29वीं बैठक में नई लाइट गुड्स व्हीकल्स (LGVs) के स्वच्छ ईंधन वाले विकल्पों को बढ़ावा देने से जुड़ा Direction No. 102 मंजूर किया गया। आयोग ने बताया कि LGV कुल सक्रिय वाहनों का करीब 1.2 प्रतिशत ही हैं, लेकिन कुल वाहन बेड़े से होने वाले PM उत्सर्जन में इनकी हिस्सेदारी लगभग 3.3 प्रतिशत है। इसी वजह से इनके नए रजिस्ट्रेशन को चरणबद्ध तरीके से नियंत्रित करने का फैसला किया गया है।

CAQM के आदेश के अनुसार दिल्ली में डीजल, पेट्रोल और CNG से चलने वाले N1 LGV के नए रजिस्ट्रेशन पर प्रतिबंध 1 जनवरी 2027 से लागू होगा। इसके बाद हाई व्हीकल डेंसिटी वाले NCR जिलों—गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर—में यह व्यवस्था 1 जुलाई 2027 से लागू की जाएगी। NCR के बाकी जिलों में डीजल और पेट्रोल N1 LGV के नए रजिस्ट्रेशन पर रोक 1 जनवरी 2028 से लागू होगी। वहीं N2 श्रेणी के हल्के मालवाहक वाहनों के लिए भी चरणबद्ध प्रतिबंध की शुरुआत 1 जनवरी 2028 से होगी, जिसके बाद 1 जुलाई 2028 और 1 जनवरी 2029 को अगले चरण लागू किए जाएंगे।

प्रदूषण के खिलाफ आयोग ने केवल वाहनों पर ही कार्रवाई नहीं की है, बल्कि NCR की स्टोन क्रशिंग इकाइयों के लिए भी सख्त दिशा-निर्देश जारी करने का फैसला किया है। Direction No. 103 के तहत CPCB की 2023 की Environmental Guidelines for Stone Crushing Units में निर्धारित धूल नियंत्रण उपायों को इन इकाइयों की Consent to Operate (CTO) की शर्तों में शामिल किया जाएगा। साथ ही वीडियो सर्विलांस, PM2.5 और PM10 सेंसर तथा व्हील-वॉशिंग जैसी तकनीक आधारित व्यवस्थाओं के जरिए लगातार निगरानी और प्रदूषण नियंत्रण को मजबूत किया जाएगा।

CAQM ने उन इकाइयों के लिए भी नियम कड़े किए हैं, जिनके खिलाफ पहले Closure Direction जारी किया जा चुका है और वे दोबारा संचालन शुरू करना चाहती हैं। आयोग ने इसके लिए प्रक्रिया में संशोधन को मंजूरी दी है। अब संबंधित इकाइयों को सुधारात्मक और निवारक अनुपालन की जानकारी, आवश्यक प्रमाण और नोटरीकृत हलफनामा जमा करना होगा। इसके साथ ही संबंधित SPCB या DPCC पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की वसूली और अनुपालन का सत्यापन करेगा। CAQM जरूरत पड़ने पर CPCB की Flying Squads के जरिए स्वतंत्र या अचानक जांच भी करा सकेगा और नियमों का पालन नहीं मिलने पर दोबारा बंद करने की कार्रवाई की जा सकती है।

बैठक में प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े अनुसंधान एवं विकास कार्यों को बढ़ावा देने के लिए चार R&D परियोजनाओं को वित्तीय सहायता देने को भी मंजूरी दी गई। इन परियोजनाओं में सड़क की धूल से होने वाले प्रदूषण, मैकेनिकल रोड स्वीपिंग तकनीक समेत अन्य उपायों पर काम किया जाएगा। CAQM के इन फैसलों से साफ है कि दिल्ली-NCR में प्रदूषण नियंत्रण की रणनीति अब वाहनों के साथ-साथ सड़क की धूल, स्टोन क्रशिंग और औद्योगिक गतिविधियों की निगरानी पर भी केंद्रित की जा रही है। चरणबद्ध तरीके से नए वाहन रजिस्ट्रेशन पर रोक और तकनीक आधारित निगरानी के जरिए क्षेत्र की वायु गुणवत्ता में सुधार लाने का लक्ष्य रखा गया है।


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