700 करोड़ के Delhi Medical Scam में बड़ा खुलासा! खरीद से जुड़ी अहम फाइलें नष्ट
टेन न्यूज़ नेटवर्क
New Delhi News (20 August 2026): दिल्ली में सामने आए करीब 700 करोड़ रुपये के कथित चिकित्सा खरीद घोटाले की जांच में अब दस्तावेजों को नष्ट किए जाने का गंभीर आरोप सामने आया है। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने अदालत को बताया कि स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय और केंद्रीय खरीद एजेंसी की खरीद प्रक्रिया से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइलें कथित तौर पर जानबूझकर नष्ट की गईं। इन दस्तावेजों में दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और सर्जिकल सामग्री की खरीद से जुड़ी निविदाओं का पूरा विवरण मौजूद था। जांच एजेंसी के मुताबिक, फाइलों के नष्ट होने से उन अधिकारियों और अन्य लोगों की भूमिका सामने लाने में बाधा पैदा हुई है, जो निविदा प्रक्रिया में शामिल थे।
एसीबी के अनुसार, एक्स-रे मशीन, सी-आर्म मशीन और लिनेन जैसी वस्तुओं की खरीद से संबंधित फाइलों में निविदा की शर्तें तैयार करने वाले अधिकारियों और तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन में शामिल लोगों की जानकारी थी। एजेंसी का आरोप है कि इन दस्तावेजों को नष्ट करना महज रिकॉर्ड प्रबंधन की सामान्य प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि कथित अपराधों से जुड़े महत्वपूर्ण सबूतों को खत्म करने की कोशिश थी। जांच में यह भी दावा किया गया है कि निविदा प्रक्रिया में कथित रूप से मिलीभगत की गई और कुछ चुनिंदा संस्थाओं को फायदा पहुंचाने के लिए नियम एवं शर्तें इस तरह तय की गईं कि दूसरे बोलीदाताओं के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाए।
मामले में पूर्व डीजीएचएस प्रमुख डॉ. वत्सला अग्रवाल, पूर्व सीपीए उप लेखा नियंत्रक नीरज चोपड़ा और पूर्व सीपीए कार्यालय प्रमुख डॉ. विनोद कुमार रंगा समेत कई लोगों की भूमिका जांच के दायरे में है। अदालत ने रंगा की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है, जबकि डॉ. अग्रवाल को उनकी चिकित्सकीय स्थिति को देखते हुए चार सप्ताह की अंतरिम जमानत दी गई है। अदालत में दी गई जानकारी के मुताबिक अग्रवाल ने उच्च रक्तचाप, मधुमेह, धड़कन और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याओं का हवाला दिया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि अंतरिम जमानत चिकित्सा आधार पर मानवीय दृष्टिकोण से दी गई है और इसका मामले के आरोपों की गंभीरता पर कोई प्रभाव नहीं है।
यह मामला सतर्कता विभाग की शिकायत से शुरू हुआ था, जिसे 2 जून को प्राथमिकी में बदला गया। एसीबी का आरोप है कि चिकित्सा सामग्री और अस्पताल उपकरणों की खरीद में व्यापक अनियमितताएं हुईं और सरकारी धन के इस्तेमाल में गड़बड़ी की गई। जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि कई विक्रेताओं को सामान की आपूर्ति के लंबे समय बाद तक भुगतान नहीं किया गया, जबकि दूसरी ओर ऐसे लोगों के खातों में बड़ी रकम पहुंचाई गई जिनका आपूर्ति से कोई सीधा संबंध नहीं था। एजेंसी के मुताबिक, इन खातों से करोड़ों रुपये नकद निकाले गए या अन्य खातों में स्थानांतरित किए गए।
जांच में एक दवा आपूर्तिकर्ता और फार्मास्युटिकल कारोबारी राजीव रंगीला के फरार होने का मुद्दा भी अहम बना हुआ है। एसीबी के अनुसार, वह अग्रिम जमानत मिलने के कुछ समय बाद कथित तौर पर देश से बाहर चला गया और अभी तक जांच एजेंसी की पकड़ से बाहर है। वहीं, आरोपियों की ओर से जांच और गिरफ्तारी को लेकर अलग-अलग दलीलें अदालत में रखी गई हैं। अब जांच एजेंसी के सामने नष्ट की गई फाइलों, निविदा प्रक्रिया और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने की चुनौती है। मामले में आगे की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कथित खरीद अनियमितताओं में किन अधिकारियों और निजी संस्थाओं की भूमिका रही और सरकारी धन के कथित दुरुपयोग का वास्तविक दायरा कितना बड़ा था।
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