IEA ने शासन के सामने उठाए 11 बड़े औद्योगिक मुद्दे, ई-ऑक्शन से OTS तक सुधार की मांग

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (13/08/2026): इंडस्ट्रियल एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन (IEA) ने उत्तर प्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार, आईएएस के समक्ष गौतमबुद्ध नगर सहित प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में उद्यमियों को हो रही विभिन्न समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है। एसोसिएशन ने औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार को गति देने के लिए ई-ऑक्शन व्यवस्था में बदलाव, औद्योगिक क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार, MSME को राहत, सब्सिडी का समयबद्ध भुगतान और लंबित देयताओं के समाधान समेत 11 प्रमुख मांगें रखी हैं।

IEA अध्यक्ष संजीव शर्मा ने शासन को भेजे पत्र में कहा कि औद्योगिक इकाइयों के सामने आने वाली प्रक्रियात्मक एवं आधारभूत समस्याओं का समयबद्ध समाधान जरूरी है। एसोसिएशन का कहना है कि यदि उद्यमियों को सरल प्रक्रियाएं, बेहतर आधारभूत सुविधाएं और निवेश के अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाए, तो प्रदेश में नए उद्योगों की स्थापना के साथ मौजूदा इकाइयों के विस्तार को भी बढ़ावा मिलेगा।

IEA

2000 वर्गमीटर तक के भूखंड ई-ऑक्शन से बाहर रखने की मांग

IEA ने औद्योगिक भूखंडों के आवंटन में लागू ई-ऑक्शन व्यवस्था को छोटे उद्यमियों के लिए चुनौतीपूर्ण बताया है। एसोसिएशन के अनुसार, खासतौर पर सूक्ष्म और छोटे MSME उद्यमियों के लिए नीलामी में प्रतिस्पर्धा कर औद्योगिक भूखंड हासिल करना बेहद कठिन हो गया है।

एसोसिएशन ने मांग की है कि कम से कम 2000 वर्गमीटर तक के औद्योगिक भूखंडों को ई-ऑक्शन से बाहर रखते हुए Draw/लॉटरी के माध्यम से आवंटित किया जाए, जिससे वास्तविक उद्यमियों को उद्योग स्थापित करने का अवसर मिल सके।

लंबे समय से किराये पर चल रहे उद्योगों को प्राथमिकता

IEA ने पांच वर्ष या उससे अधिक समय से किराये के परिसरों में संचालित औद्योगिक इकाइयों के लिए विशेष व्यवस्था की मांग की है। एसोसिएशन का सुझाव है कि ऐसे उद्योगों को औद्योगिक भूखंडों के आवंटन में होने वाले Draw में वरीयता दी जाए। इससे लंबे समय से किराये पर कारोबार कर रहे वास्तविक उद्यमियों को अपना स्थायी औद्योगिक परिसर स्थापित करने का अवसर मिल सकेगा।

ग्रेटर नोएडा, यमुना और न्यू नोएडा में उद्यमियों को आवासीय भूखंड देने का सुझाव

एसोसिएशन ने नोएडा प्राधिकरण की पूर्व व्यवस्था का उदाहरण देते हुए मांग की है कि जिस प्रकार पूर्व में उद्यमियों को आवासीय भूखंड आवंटित किए गए थे, उसी तर्ज पर ग्रेटर नोएडा, यमुना क्षेत्र और प्रस्तावित न्यू नोएडा में भी उद्यमियों के लिए आवासीय भूखंडों की व्यवस्था की जाए।

IEA

IEA का कहना है कि इससे औद्योगिक क्षेत्रों में लंबे समय से निवेश कर रहे उद्यमियों को स्थायी आवासीय सुविधा मिल सकेगी और क्षेत्र के समग्र विकास को भी गति मिलेगी।

बिना कनेक्शन के जल बिल वसूली पर रोक की मांग

GNIDA क्षेत्र में जलापूर्ति से जुड़ी समस्या को भी IEA ने गंभीरता से उठाया है। एसोसिएशन के अनुसार, कई औद्योगिक इकाइयों को अभी तक जल कनेक्शन उपलब्ध नहीं कराया गया है, इसके बावजूद उनके नाम से जल बिल भेजे जा रहे हैं।

IEA का कहना है कि संस्था द्वारा पिछले कई वर्षों से यह मुद्दा उठाए जाने के बाद करीब 40 इकाइयों के जल बिल प्राधिकरण द्वारा माफ किए गए हैं, लेकिन अभी भी अनेक उद्यमियों को बिना जल कनेक्शन के बिल प्राप्त हो रहे हैं।

एसोसिएशन ने मांग की है कि प्राधिकरण कम से कम एक माह का विशेष कैंप आयोजित कर ऐसे सभी मामलों का निस्तारण करे, जहां संबंधित क्षेत्र में जल लाइन या कनेक्शन उपलब्ध ही नहीं है।

LT विद्युत कनेक्शन की सीमा 50 से बढ़ाकर 100 KW करने की मांग

MSME इकाइयों को राहत देने के लिए IEA ने LT श्रेणी में विद्युत कनेक्शन की अधिकतम सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। वर्तमान 50 KW की सीमा को 100 KW तक बढ़ाने की मांग की गई है।

एसोसिएशन के अनुसार, इससे छोटे एवं मध्यम उद्योगों को अतिरिक्त लागत, कनेक्शन प्रक्रिया और अन्य अनावश्यक प्रक्रियात्मक जटिलताओं से राहत मिलेगी तथा उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

YEIDA में शेड के Functional Certificate की शर्तों में बदलाव की मांग

यमुना औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में औद्योगिक शेड के लिए Functional Certificate जारी करने में आ रही समस्याओं को भी IEA ने शासन के समक्ष रखा है।

एसोसिएशन के अनुसार, वर्तमान में 50 प्रतिशत RCC निर्माण की शर्त छोटे और मध्यम उद्यमियों के लिए कई मामलों में आर्थिक एवं व्यावहारिक रूप से कठिन है। साथ ही भवन का स्वरूप और निर्माण आवश्यकता संबंधित उद्योग के उत्पाद एवं उत्पादन प्रक्रिया पर भी निर्भर करता है।

IEA ने मांग की है कि इस शर्त में उद्योग की प्रकृति और वास्तविक आवश्यकता के आधार पर व्यावहारिक छूट अथवा आवश्यक संशोधन किया जाए।

यमुना औद्योगिक क्षेत्र में बुनियादी सुविधाएं विकसित करने की मांग

IEA ने यमुना औद्योगिक क्षेत्र में सड़क, ड्रेनेज, स्ट्रीट लाइट, जल निकासी, बिजली, सार्वजनिक परिवहन समेत अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया है।

एसोसिएशन ने इन सुविधाओं के विकास के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने की मांग की है, ताकि वर्तमान और प्रस्तावित औद्योगिक इकाइयां सुचारु रूप से संचालित हो सकें। साथ ही इकाइयों को कार्यशील करने के लिए निर्धारित समय सीमा में भी आवश्यकतानुसार विस्तार किए जाने का सुझाव दिया गया है।

हर औद्योगिक सेक्टर में Fire Station की मांग

औद्योगिक क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए IEA ने प्रत्येक औद्योगिक सेक्टर में आवश्यकता के अनुसार Fire Station स्थापित करने की मांग की है।

एसोसिएशन के अनुसार, औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मशीनरी, कच्चा माल और ज्वलनशील सामग्री मौजूद रहती है। ऐसे में आग लगने की स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए पर्याप्त अग्निशमन संसाधन और तत्काल प्रतिक्रिया तंत्र बेहद जरूरी है। इससे संभावित जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकेगा।

गौतम बुद्ध नगर में Export Promotion Centre स्थापित करने का प्रस्ताव

निर्यातकों की सुविधा के लिए IEA ने गौतम बुद्ध नगर में Export Promotion Centre स्थापित करने की मांग की है। एसोसिएशन के अनुसार, इस केंद्र पर निर्यातकों को दस्तावेजी प्रक्रिया, बाजार की जानकारी, सरकारी नियमों, आवश्यक मार्गदर्शन और अन्य संबंधित सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

इससे स्थानीय उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने और जिले से निर्यात बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

MSME Subsidy का भुगतान समयसीमा में हो

IEA ने MSME इकाइयों के लिए स्वीकृत सब्सिडी और प्रोत्साहन राशि के भुगतान को लेकर भी चिंता जताई है। एसोसिएशन ने मांग की है कि सब्सिडी भुगतान के लिए स्पष्ट समयसीमा निर्धारित की जाए और लंबे समय से लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण कर उद्यमियों को राशि उपलब्ध कराई जाए।

औद्योगिक क्षेत्रों में Scheme Display Boards लगाने की मांग

केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न MSME योजनाओं, सब्सिडी और प्रोत्साहनों की जानकारी कई बार पात्र उद्यमियों तक समय पर नहीं पहुंच पाती। इसे देखते हुए IEA ने सभी औद्योगिक प्राधिकरणों के कार्यालयों और औद्योगिक क्षेत्रों में Scheme Display Boards लगाने का सुझाव दिया है।

इसके साथ ही समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर उद्यमियों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने की मांग की गई है, ताकि अधिक से अधिक MSME इकाइयां इन योजनाओं का लाभ उठा सकें।

ड्रेनेज, सड़क, पानी और सीवर की समस्याओं के समाधान पर जोर

IEA ने GNIDA और UPSIDA के औद्योगिक क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई है। एसोसिएशन के अनुसार कई औद्योगिक क्षेत्रों में ड्रेनेज सफाई, सड़क, पानी और सीवर से संबंधित समस्याएं बनी हुई हैं।

इन समस्याओं का शीघ्र समाधान कर औद्योगिक क्षेत्रों में नियमित रखरखाव और बेहतर नागरिक सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

पुरानी देयताओं के समाधान के लिए एकमुश्त समाधान योजना

IEA ने GNIDA में पूर्व में पूरी तरह ऑनलाइन व्यवस्था नहीं होने के कारण उत्पन्न हुई पुरानी देयताओं का मुद्दा भी शासन के सामने रखा है। एसोसिएशन के अनुसार, पहले कई आवंटियों को समय पर उनकी देयताओं की जानकारी नहीं मिल पाती थी। इसके चलते कुछ मामलों में ब्याज और उस पर ब्याज जुड़ने से उद्यमियों पर देय राशि काफी अधिक हो गई।

ऐसे पुराने मामलों के समाधान के लिए IEA ने एकमुश्त समाधान योजना (OTS) लागू करने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि इससे वास्तविक उद्यमियों को बड़ी वित्तीय देनदारी से राहत मिलेगी और प्राधिकरण के पुराने लंबित मामलों का भी निस्तारण हो सकेगा।

उद्योगों के अनुकूल माहौल बनाने पर जोर

IEA अध्यक्ष संजीव शर्मा ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों की ये समस्याएं केवल व्यक्तिगत उद्यमियों से जुड़ी नहीं हैं, बल्कि इनका सीधा प्रभाव निवेश, उत्पादन, उद्योगों के विस्तार और रोजगार सृजन पर पड़ता है। इसलिए समस्याओं का समाधान विभागीय स्तर पर लंबित रखने के बजाय निर्धारित समयसीमा में किया जाना जरूरी है।

एसोसिएशन ने उत्तर प्रदेश शासन से संबंधित विभागों और औद्योगिक विकास प्राधिकरणों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है। IEA ने उम्मीद जताई कि शासन के सकारात्मक हस्तक्षेप से गौतम बुद्ध नगर समेत प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में कारोबार और निवेश के लिए अधिक अनुकूल वातावरण तैयार होगा तथा इन मांगों पर की जाने वाली कार्रवाई से एसोसिएशन को भी अवगत कराया जाएगा।


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