विद्यार्थियों में आत्महत्या की घटनाओं पर सरकार का विशेष फोकस

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (10 August 2026): विद्यार्थियों में आत्महत्या की घटनाओं को लेकर सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर कई कदम उठाए हैं। शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांता मजूमदार ने सोमवार को लोकसभा में लिखित उत्तर में बताया कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) पुलिस में दर्ज आत्महत्या के मामलों के आधार पर आंकड़े जुटाता है। एनसीआरबी की वार्षिक ‘भारत में आकस्मिक मृत्यु और आत्महत्या’ रिपोर्ट में विद्यार्थियों की आत्महत्या से जुड़े आंकड़े वर्ष, राज्य, लिंग और आयु वर्ग के आधार पर उपलब्ध हैं। रिपोर्टों में आत्महत्या के पीछे पेशेवर और करियर संबंधी समस्याओं, अकेलेपन, दुर्व्यवहार, हिंसा, पारिवारिक समस्याओं, मानसिक विकार, आर्थिक नुकसान और लंबे समय से चले आ रहे दर्द जैसे विभिन्न कारणों का उल्लेख किया गया है।

सरकार ने विद्यार्थियों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को मजबूत करने के लिए शिक्षा मंत्रालय की ‘मनोदर्पण’ पहल शुरू की है। इसके तहत विद्यार्थियों, शिक्षकों और परिवारों को प्रशिक्षित परामर्शदाताओं के माध्यम से मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन, लाइव संवाद सत्र, वेबिनार और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े जागरूकता कार्यक्रम इसके प्रमुख हिस्से हैं। इन कार्यक्रमों का प्रसारण पीएम ई-विद्या चैनलों के साथ एनसीईआरटी के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर भी किया जाता है। वहीं, सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में काउंसलर और वेलनेस शिक्षक की नियुक्ति अनिवार्य की गई है। जवाहर नवोदय विद्यालयों में फरवरी 2026 तक 830 काउंसलर नियुक्त किए जा चुके हैं, जबकि केंद्रीय विद्यालयों में भी अनुबंध के आधार पर काउंसलर नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों पर शैक्षणिक दबाव, तनाव, करियर की चिंता, अवसाद और अन्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से निपटने के लिए यूजीसी ने भी कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जनवरी और अप्रैल 2023 में जारी दिशा-निर्देशों में शारीरिक गतिविधियों और खेलों को बढ़ावा देने, सकारात्मक सोच विकसित करने और विद्यार्थियों के लिए सहयोगी नेटवर्क तैयार करने पर जोर दिया गया है। जुलाई 2023 में शिक्षा मंत्रालय ने उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों के भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक विस्तृत रूपरेखा जारी की थी। इसमें परामर्श सेवाओं, मानसिक परेशानी की शुरुआती पहचान, आत्महत्या रोकथाम की मानक प्रक्रिया, विद्यार्थी सहायता नेटवर्क और शिकायत निवारण व्यवस्था को मजबूत करने की बात कही गई है। साथ ही, यूजीसी ने रैगिंग के खिलाफ 24 घंटे चलने वाली राष्ट्रीय हेल्पलाइन और जागरूकता अभियान भी संचालित किए हैं।

कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी सरकार ने विशेष प्रावधान किए हैं। शिक्षा मंत्रालय ने जनवरी 2024 में कोचिंग केंद्रों के नियमन संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए, जिनमें परामर्श सुविधाएं उपलब्ध कराने, शुल्क व्यवस्था में पारदर्शिता रखने और विद्यार्थियों पर अनावश्यक शैक्षणिक दबाव डालने वाली गतिविधियों से सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। वहीं, मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों को विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की शुरुआती पहचान और समय पर सहायता देने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। आईआईटी मद्रास में जुलाई 2026 में आयोजित क्षेत्रीय कार्यशाला में शिक्षण संस्थानों के प्रमुखों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने परिसर में मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की।

देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में भी मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं। आईआईटी खड़गपुर ने ‘सेतु’ नाम से चौबीसों घंटे सहायता और रोकथाम पर केंद्रित व्यवस्था लागू की है। आईआईटी मद्रास, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी गुवाहाटी, आईआईटी गांधीनगर और आईआईटी रुड़की समेत कई संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन को लेकर कार्यशालाएं आयोजित की गई हैं। सभी आईआईटी, आईआईएम, एनआईटी और आईआईआईटी परिसरों में मानसिक स्वास्थ्य या परामर्श केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां काउंसलर, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट और कुछ संस्थानों में मनोचिकित्सक भी सेवाएं दे रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से विद्यार्थियों को तनाव प्रबंधन, समस्याओं से निपटने और मानसिक परेशानी के शुरुआती संकेत पहचानने के बारे में जागरूक किया जा रहा है।

मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम और राष्ट्रीय टेली-मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम संचालित कर रहा है। सरकार के अनुसार, देशभर में एक लाख 81 हजार से अधिक उप-स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में बदला गया है और यहां मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को भी प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल का हिस्सा बनाया गया है। वर्ष 2022 में शुरू किए गए राष्ट्रीय टेली-मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 6 अगस्त 2026 तक 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में टेली-मानस के 53 सेल स्थापित किए जा चुके हैं। इस सेवा के माध्यम से 43 लाख 25 हजार से अधिक कॉल का जवाब दिया गया है। सरकार ने टेली-मानस मोबाइल ऐप और वीडियो परामर्श की सुविधा भी शुरू की है, ताकि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के लिए लोगों को समय पर विशेषज्ञ सहायता मिल सके।


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