दिल्ली में मोबाइल चोरी के बाद बैंक खाते खाली करने वाले अंतरराज्यीय साइबर गैंग का भंडाफोड़
टेन न्यूज़ नेटवर्क
New Delhi News (10 अगस्त 2026): दिल्ली पुलिस की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस ने मोबाइल फोन चोरी करने के बाद उनसे जुड़े बैंक खातों से रकम निकालने वाले दो-चरणों वाले अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 52 मोबाइल फोन, 4 लैपटॉप और करीब 4 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं।
दिल्ली पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के DCP रोहित राजबीर ने बताया कि यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से वारदात को अंजाम देता था। पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह में अलग-अलग स्तर पर काम करने वाले लोग शामिल थे।
DCP के मुताबिक, 19 जुलाई 2026 को वेस्ट पटेल नगर निवासी 88 वर्षीय बुजुर्ग का मोबाइल फोन चोरी हुआ था। पीड़ित ने 21 जुलाई को अपना सिम दोबारा जारी कराया, लेकिन इस दौरान उनके खाते से करीब 70 हजार रुपये का ट्रांजेक्शन हो चुका था। पीड़ित ने समझदारी दिखाते हुए पुलिस हेल्पलाइन पर संपर्क किया, जिसके बाद 23 जुलाई को मामला दर्ज किया गया।
जांच के दौरान पुलिस को गिरोह के तीन स्तरों पर काम करने की जानकारी मिली। पहले स्तर पर आरोपी मोबाइल फोन चोरी करते थे। दूसरे स्तर पर यूपी में बैठे आरोपी चोरी किए गए मोबाइल फोन खरीदते थे, जबकि तीसरे स्तर पर जयपुर में मौजूद टीम इन मोबाइल से जुड़े बैंक खातों से ट्रांजेक्शन और रकम की निकासी कराती थी।
पुलिस के अनुसार, जयपुर में आरोपियों ने बाकायदा कॉल सेंटर स्थापित कर रखा था, जहां से बैंक खातों और ट्रांजेक्शन से जुड़ी गतिविधियों को संचालित किया जाता था। अब तक जांच में अलग-अलग राज्यों से जुड़ी 19 साइबर शिकायतों को लिंक किया जा चुका है और करीब 65 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है।
DCP रोहित राजबीर ने बताया कि गिरोह में मोबाइल चोरी करने वाले और बैंक खातों से रकम निकालने वाले अलग-अलग लोग थे। छोटे स्तर के अपराधी सिर्फ मोबाइल चोरी करते थे, जबकि बैकएंड में मौजूद तकनीकी रूप से दक्ष आरोपी चोरी हुए मोबाइल और उनसे जुड़े बैंकिंग सिस्टम का इस्तेमाल कर रकम निकालते थे।
पुलिस को जांच के दौरान एक अहम बात यह भी पता चली कि चोरी किए गए मोबाइल और सिम कार्ड का पारंपरिक तरीके से इस्तेमाल किए बिना ही बैंकिंग ट्रांजेक्शन किए गए। इससे पुलिस को आशंका है कि आरोपियों के पास कोई ऐसा विशेष सॉफ्टवेयर या तकनीकी माध्यम था, जिसकी मदद से वे मोबाइल या सिम को सामान्य रूप से इस्तेमाल किए बिना बैंकिंग गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे।
जांच में कुछ बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आई है। आरोप है कि ये कर्मचारी फर्जी लाभार्थियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाने में मदद करते थे। इसके बदले उन्हें नकद या ट्रांजेक्शन में कमीशन मिलता था। पुलिस के मुताबिक, कुछ मामलों में आरोपियों ने बैंक कर्मचारियों के नाम पर LIC खाते भी खुलवाए, जिनके माध्यम से उन्हें कमीशन दिया जाता था।
पुलिस ने इस मामले में मेरठ, गाजियाबाद और जयपुर से जुड़े आरोपियों को गिरफ्तार किया है। DCP ने कहा कि गिरफ्तार आरोपियों का फिलहाल किसी पुराने आपराधिक मामले से जुड़ा रिकॉर्ड सामने नहीं आया है, हालांकि साइबर अपराध में उनकी पहले की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता। पुलिस पूरे नेटवर्क और इसके अन्य सदस्यों की तलाश में जांच आगे बढ़ा रही है।
DCP ने कहा कि साइबर अपराधी लगातार अपने तरीके बदल रहे हैं और पुलिस को भी उसी तेजी से अपनी तकनीक और जांच के तरीकों को विकसित करना होगा।
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