डीपफेक पर सरकार का बड़ा एक्शन, गैरकानूनी सामग्री हटाने की समयसीमा अब सिर्फ 3 घंटे
टेन न्यूज़ नेटवर्क
New Delhi News (06 August 2026): केंद्र सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से तैयार किए जा रहे डीपफेक और भ्रामक डिजिटल कंटेंट पर सख्ती बढ़ाते हुए नियामक ढांचे को और मजबूत कर दिया है। सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियम, 2021 में संशोधन कर एआई से तैयार सामग्री पर स्पष्ट लेबल और पहचान योग्य मेटाडेटा अनिवार्य कर दिया है, ताकि उपयोगकर्ता यह आसानी से पहचान सकें कि कोई कंटेंट कृत्रिम रूप से बनाया गया है। इसके साथ ही सरकार या अदालत के आदेश मिलने पर गैरकानूनी सामग्री हटाने की समयसीमा 36 घंटे से घटाकर केवल 3 घंटे कर दी गई है। यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में दी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि डीपफेक, फर्जी ऑडियो-वीडियो, पहचान की चोरी, प्रतिरूपण, बिना सहमति के अंतरंग तस्वीरें, बाल यौन शोषण सामग्री और अन्य एआई-जनित गैरकानूनी सामग्री पर अब और सख्त कार्रवाई होगी। संशोधित नियमों के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य मध्यस्थों को ऐसी सामग्री की पहचान करने, उसे रोकने और शिकायत मिलने या जानकारी सामने आने पर तत्काल हटाने के लिए प्रभावी तकनीकी उपाय अपनाने होंगे। संवेदनशील मामलों में शिकायतों के निस्तारण की समयसीमा भी पहले की तुलना में काफी कम कर दी गई है।
सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही भी बढ़ा दी है। 50 लाख या उससे अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ताओं वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को एआई-जनित सामग्री की निगरानी के लिए स्वचालित उपकरण लगाने, नियमित अनुपालन रिपोर्ट प्रकाशित करने, शिकायत अधिकारी नियुक्त करने और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। यदि कोई मध्यस्थ आईटी नियमों का पालन नहीं करता है तो उसे सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा समाप्त हो जाएगी और उसके खिलाफ मौजूदा कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकेगी।
डीपफेक और साइबर अपराधों से निपटने के लिए सरकार ने कई संस्थागत व्यवस्थाएं भी मजबूत की हैं। नागरिक राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर डीपफेक, वित्तीय धोखाधड़ी और अन्य साइबर अपराधों की शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जबकि हेल्पलाइन 1930 भी सक्रिय है। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी), शिकायत अपीलीय समिति (जीएसी) और सहयोग पोर्टल के माध्यम से गैरकानूनी डिजिटल सामग्री हटाने और राज्यों के साथ समन्वय को तेज किया गया है। सरकार के अनुसार समन्वय प्लेटफॉर्म की मदद से अब तक 12,987 आरोपियों की गिरफ्तारी और 1.51 लाख से अधिक आपराधिक संबंधों का पता लगाया जा चुका है।
सरकार ने बताया कि एआई के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने के लिए नवंबर 2025 में भारत एआई प्रशासन दिशानिर्देश जारी किए गए थे। इसके तहत देशभर के शैक्षणिक संस्थानों में डीपफेक की पहचान और रोकथाम से जुड़ी 13 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर की परियोजनाएं भी शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य नागरिकों को सुरक्षित, विश्वसनीय और जवाबदेह डिजिटल वातावरण उपलब्ध कराना तथा एआई के दुरुपयोग पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।
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