दिल्ली पुलिस में बड़ा बदलाव, जांच और लॉ एंड ऑर्डर का काम होगा अलग; कमिश्नर का नया आदेश

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (13 July 2026): दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव करने की दिशा में पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा ने अहम निर्देश जारी किए हैं। नए आदेश के तहत अब आपराधिक मामलों की जांच और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के काम को अलग-अलग किया जाएगा। इसका उद्देश्य जांच अधिकारियों को केवल विवेचना पर केंद्रित रखना और मामलों की जांच को अधिक तेज, पेशेवर और प्रभावी बनाना है। इस व्यवस्था को लागू करने से पहले राजधानी के हर जिले में एक-एक थाने को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना जाएगा।

पुलिस मुख्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान सभी जिला पुलिस उपायुक्तों (DCP) को निर्देश दिया गया कि वे अपने जिले से ऐसे थाने का चयन करें, जहां अपराध, एफआईआर, शिकायतों, पीसीआर कॉल और कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए नई व्यवस्था लागू की जा सके। चयनित थानों में जांच अधिकारी केवल आपराधिक मामलों की विवेचना करेंगे, जबकि अलग पुलिस टीम कानून-व्यवस्था और अन्य ड्यूटी संभालेगी। पायलट प्रोजेक्ट के नतीजों की समीक्षा के बाद इसे पूरे दिल्ली पुलिस तंत्र में लागू करने पर निर्णय लिया जाएगा।

दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से थाना स्तर पर पुलिसिंग में व्यापक सुधार देखने को मिलेगा। अब तक जांच अधिकारियों को वीआईपी ड्यूटी, धरना-प्रदर्शन, त्योहारों की सुरक्षा और अन्य कानून-व्यवस्था संबंधी जिम्मेदारियों में भी लगाया जाता था, जिससे कई मामलों की जांच प्रभावित होती थी। नए आदेश के तहत वरिष्ठ अधिकारियों की लिखित या मौखिक अनुमति के बिना जांच स्टाफ को कानून-व्यवस्था संबंधी ड्यूटी में नहीं लगाया जाएगा। साथ ही जिलों को जांच टीमों, बीट स्टाफ, प्रशासनिक कर्मियों और अन्य संसाधनों का विस्तृत आकलन करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

यह पहल वर्ष 2018 में शुरू किए गए उस पुलिस सुधार मॉडल की याद दिलाती है, जिसे सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह मामले में दिए गए निर्देशों के बाद लागू किया गया था। उस समय भी जांच और कानून-व्यवस्था के कार्यों को अलग करने की कोशिश की गई थी, लेकिन कुछ महीनों बाद यह व्यवस्था बंद हो गई थी। अब दिल्ली पुलिस एक बार फिर उसी मॉडल को नए तरीके से लागू करने की तैयारी कर रही है ताकि विवेचना प्रणाली को अधिक मजबूत बनाया जा सके।

जॉइंट पुलिस कमिश्नर मधुर वर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराध, वित्तीय धोखाधड़ी, संगठित ठगी और तकनीक आधारित अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, जिनकी जांच के लिए विशेषज्ञता और पर्याप्त समय की आवश्यकता होती है। ऐसे में जिला जांच इकाइयों (DIU) को मजबूत करना और जांच अधिकारियों को अन्य ड्यूटी से मुक्त रखना बेहद जरूरी है। उनका कहना है कि इस बदलाव से जांच की गुणवत्ता में सुधार होगा, जटिल मामलों का तेजी से निपटारा संभव होगा, दोषसिद्धि दर बढ़ेगी और आम लोगों का पुलिस व्यवस्था पर भरोसा भी मजबूत होगा।


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