चलती कार में चलता था अवैध अल्ट्रासाउंड रैकेट, 4 आरोपी गिरफ्तार

टेन न्यूज नेटवर्क

Ghaziabad News (08/07/2026): गाजियाबाद पुलिस ने एक ऐसे संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने भ्रूण लिंग परीक्षण पर लगे कानूनी प्रतिबंध को धता बताते हुए चलती कार को ही अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर बना दिया था। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि गिरोह न केवल अवैध रूप से भ्रूण का लिंग बताता था, बल्कि महिलाओं को गुमराह कर गर्भपात कराने का भी नेटवर्क संचालित कर रहा था।

पुलिस के अनुसार, गिरोह का सरगना 35 वर्षीय संदीप है, जो 12वीं तक पढ़ा है और एक निजी अस्पताल का संचालन करता है। उसके साथ हापुड़ निवासी सलमान (32), गाजियाबाद निवासी शाहिद (29) और बुलंदशहर निवासी तस्लीम (27) को 4 जुलाई की रात करीब दो बजे गिरफ्तार किया गया। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद 5 जुलाई की रात जेल भेज दिया गया।

चलती कार में होता था भ्रूण लिंग परीक्षण

डीसीपी धवल जायसवाल ने बताया कि आरोपी अस्पताल में जांच कराने के बजाय एक अर्टिगा कार का इस्तेमाल करते थे। कार के अंदर पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन लगाकर महिलाओं का भ्रूण लिंग परीक्षण किया जाता था ताकि किसी को भनक न लगे। पुलिस ने छापेमारी के दौरान कार, पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन और अन्य मेडिकल उपकरण बरामद किए हैं। पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि यह पोर्टेबल मशीन नेपाल के रास्ते चीन से मंगाई गई थी।

आधार कार्ड से धर्म की पहचान, फिर बनाई जाती थी रणनीति

जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि गिरोह महिलाओं का आधार कार्ड व्हाट्सएप पर मंगवाता था। इसका उद्देश्य पहचान सत्यापित करना नहीं, बल्कि यह जानना था कि महिला हिंदू है या मुस्लिम। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे हिंदू महिलाओं को अक्सर झूठी रिपोर्ट देते थे। यदि गर्भ में बेटा होता था, तब भी उन्हें बेटी होने की जानकारी दी जाती थी ताकि वे गर्भपात के लिए तैयार हो जाएं। आरोपियों का दावा है कि कई मामलों में महिलाएं इसी आधार पर स्वयं गर्भपात कराने के लिए संपर्क करती थीं।

जांच के बाद गुपचुप अस्पताल ले जाकर कराया जाता था गर्भपात

गिरोह पहले महिलाओं से 8 से 10 हजार रुपये लेकर भ्रूण लिंग परीक्षण करता था। यदि महिला गर्भपात के लिए तैयार हो जाती, तो उसे रात के समय लोनी क्षेत्र के एक निजी अस्पताल ले जाया जाता था। अस्पताल का नाम पहले से नहीं बताया जाता था। पूरे ऑपरेशन को गोपनीय रखने के लिए महिलाओं को किसी पुरुष परिजन को साथ लाने की अनुमति नहीं दी जाती थी। कार में बैठते ही उनका मोबाइल फोन बंद कर अपने कब्जे में ले लिया जाता था ताकि किसी को लोकेशन या गतिविधि की जानकारी न मिल सके।

पहले होती थी पूरी पड़ताल, फिर मिलता था ‘अपॉइंटमेंट’

पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह किसी भी महिला की जांच करने से पहले चार से पांच दिन तक उसकी पूरी जानकारी जुटाता था। यह सुनिश्चित किया जाता था कि महिला पुलिस, स्वास्थ्य विभाग या किसी सरकारी एजेंसी की ओर से भेजी गई मुखबिर तो नहीं है। गिरोह का नेटवर्क पूरी तरह रेफरल सिस्टम पर आधारित था। जो महिलाएं पहले इस अवैध जांच का हिस्सा बन चुकी थीं, वही बाद में दूसरी महिलाओं को गिरोह तक पहुंचाती थीं।

500 से अधिक महिलाओं की जांच, 100 से ज्यादा गर्भपात का दावा

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि पिछले एक वर्ष के दौरान उन्होंने दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ, बागपत, बुलंदशहर सहित एनसीआर के अलावा राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड की करीब 500 महिलाओं का अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण किया। इनमें से 100 से अधिक मामलों में गर्भपात भी कराया गया। हालांकि पुलिस इन दावों का स्वतंत्र सत्यापन कर रही है।

अविवाहित युवतियों से वसूले जाते थे ज्यादा पैसे

जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह अविवाहित गर्भवती युवतियों का भी गर्भपात कराता था। जून महीने में दिल्ली की एक अविवाहित युवती से गर्भपात के लिए 40 हजार रुपये वसूले गए थे। पुलिस का कहना है कि सामाजिक बदनामी के डर का फायदा उठाकर गिरोह ऐसी युवतियों से सामान्य महिलाओं की तुलना में दोगुने से भी अधिक पैसे वसूलता था।

पहले भी पकड़ा जा चुका है मास्टरमाइंड संदीप

यह पहला मौका नहीं है जब संदीप का नाम इस तरह के मामले में सामने आया हो। 6 जनवरी 2025 को टीलामोड़ थाना पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने भ्रूण लिंग परीक्षण के एक अन्य गिरोह का भंडाफोड़ किया था, जिसमें संदीप समेत आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। उस समय गुरुग्राम की एक महिला से 15 हजार रुपये लेकर अवैध लिंग परीक्षण कराने का आरोप लगा था। पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई कर कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

महामाया फ्लाईओवर के पास बिछाया गया जाल

पुलिस के अनुसार, 4 जुलाई को दो महिलाओं का भ्रूण लिंग परीक्षण करने के बाद आरोपी महामाया स्टेडियम फ्लाईओवर के पास एक अन्य महिला का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान पहले से निगरानी कर रही पुलिस टीम ने छापा मारकर चारों आरोपियों को दबोच लिया।

भारत में गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व नैदानिक तकनीक (PCPNDT) अधिनियम, 1994 के तहत भ्रूण लिंग परीक्षण और लिंग के आधार पर गर्भपात कराना पूरी तरह प्रतिबंधित है। दोषी पाए जाने पर कठोर सजा, जुर्माना और संबंधित चिकित्सा संस्थान का पंजीकरण रद्द किए जाने का प्रावधान है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अस्पतालों, दलालों, मशीन सप्लायरों और अन्य सहयोगियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। साथ ही बरामद पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन की खरीद और उसकी तस्करी के स्रोत का भी पता लगाया जा रहा है।


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