क्या राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में स्कूलों का समय सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे होना चाहिए? अभिभावकों ने रखी बेबाक राय

सिंह संगीता, टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (05/07/2026): उत्तर भारत में हर साल भीषण गर्मी, कड़ाके की ठंड, घना कोहरा और लगातार बारिश के कारण स्कूलों की छुट्टियां या समय में बदलाव आम बात बन गई है। अचानक जारी होने वाले इन आदेशों का असर केवल विद्यार्थियों की पढ़ाई पर ही नहीं, बल्कि अभिभावकों, शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन की दिनचर्या पर भी पड़ता है।

इसी बीच एक महत्वपूर्ण सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है—क्या राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में स्कूलों का समय सुबह 11:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक होना चाहिए? क्या इससे बच्चों को पर्याप्त नींद, बेहतर एकाग्रता और मौसम संबंधी परेशानियों से राहत मिलेगी, या इससे नई व्यावहारिक समस्याएं खड़ी होंगी? इन्हीं सवालों पर टेन न्यूज नेटवर्क ने ग्रेटर नोएडा और दिल्ली-एनसीआर के अभिभावकों एवं समाज के विभिन्न वर्गों से बातचीत कर उनकी राय जानी।

’11 से 5 का समय व्यावहारिक नहीं, मौसम के अनुसार तय हो स्थायी टाइमिंग’

अनूप कुमार सोनी, सचिव, ग्रेटर नोएडा वेस्ट, गौतम बुद्ध नगर विकास समिति का कहना है कि पूरे वर्ष स्कूलों का समय सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक रखना व्यावहारिक समाधान नहीं है। उनका कहना है कि सर्दियों में यह व्यवस्था कोहरे से कुछ राहत दे सकती है, लेकिन गर्मियों में बच्चों को दिन के सबसे गर्म समय (11 बजे से 3 बजे) में सफर करना पड़ेगा, जब तापमान 45 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। इससे बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि अधिकांश अभिभावकों के कार्यालय सुबह 9 से 10 बजे शुरू हो जाते हैं। ऐसे में बच्चों को 11 बजे तक घर पर संभालना और शाम 5 बजे के बाद उन्हें वापस लाना लाखों परिवारों के लिए बड़ी चुनौती होगी। इसके अलावा बच्चों के खेल, ट्यूशन, संगीत, कला और परिवार के साथ समय बिताने के अवसर भी कम हो जाएंगे। उनके अनुसार समस्या स्कूल के समय की नहीं, बल्कि मौसम के अनुसार लचीली व्यवस्था की है। इसलिए गर्मी और सर्दी के लिए अलग-अलग स्थायी टाइमिंग तय करना अधिक वैज्ञानिक और व्यावहारिक होगा।

’11 से 5 की टाइमिंग बच्चों की पूरी दिनचर्या बिगाड़ देगी’

एक अभिभावक नीता, द इनोवेटिव कंपनी की ऑनर का कहना है कि सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक स्कूल चलाने का प्रस्ताव बच्चों के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि अधिकांश बच्चों को स्कूल के बाद ट्यूशन या अन्य गतिविधियों में भी जाना होता है। यदि वे शाम 5 बजे घर लौटेंगे तो न उनके पास पढ़ाई का समय बचेगा, न खेलकूद का और न ही पर्याप्त आराम का। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में कई स्कूलों की पढ़ाई बोर्ड परीक्षाओं की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं है। कई बार शिक्षक वही पढ़ाते हैं जो इंटरनेट या यूट्यूब से तैयार किया गया होता है, जबकि परीक्षा में ऐसे प्रश्न पूछे जाते हैं जिन्हें कक्षा में पढ़ाया ही नहीं गया। उनके अनुसार शिक्षकों को प्रश्नपत्र तैयार करने और पढ़ाए गए विषयों के बीच बेहतर समन्वय रखना चाहिए।

‘बच्चों के खेलने और आराम का समय खत्म हो जाएगा’

रंजन तोमर, अधिवक्ता, दिल्ली हाई कोर्ट का मानना है कि सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक स्कूल चलाना बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में बच्चे दोपहर तक घर लौट आते हैं, जिससे उन्हें आराम करने, होमवर्क पूरा करने और शाम को खेलने का पर्याप्त समय मिल जाता है। यदि स्कूल शाम 5 बजे तक चलेगा तो बच्चों का पूरा दैनिक संतुलन बिगड़ जाएगा। साथ ही दोपहर की तेज गर्मी में स्कूल परिसर और यात्रा दोनों ही बच्चों के लिए परेशानी का कारण बनेंगे।

‘मौसम के हिसाब से पहले से तय हो वार्षिक टाइमिंग’

आलोक सिंह का कहना है कि स्कूल हमेशा सुबह ही शुरू होने चाहिए, क्योंकि इससे बच्चों में अनुशासन, समय पर उठने और नियमित दिनचर्या की आदत विकसित होती है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार मौसम के पिछले वर्षों के रिकॉर्ड का अध्ययन कर पहले से ही वार्षिक स्कूल टाइमिंग तय करे। उदाहरण के तौर पर मई-जून में स्कूल सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दिसंबर-जनवरी में सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलाए जा सकते हैं। उनका कहना है कि यदि पूरे वर्ष का कैलेंडर पहले से तय होगा तो अभिभावक, स्कूल और परिवहन व्यवस्था सभी अपनी तैयारी पहले ही कर सकेंगे। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक स्कूल चलाने का विचार बिल्कुल उचित नहीं है।

विशेषज्ञों और अभिभावकों की राय से स्पष्ट है कि विद्यालयों की टाइमिंग केवल समय निर्धारण का विषय नहीं है। यह विद्यार्थियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा की गुणवत्ता, अभिभावकों की सुविधा, शिक्षकों की कार्यप्रणाली और संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा हुआ मुद्दा है।

जहां कुछ शिक्षा विशेषज्ञ भविष्य में 11 बजे से 5 बजे तक की व्यवस्था को संभावित विकल्प मानते हैं, वहीं अधिकांश अभिभावक और शिक्षा से जुड़े लोग उत्तर भारत की वर्तमान परिस्थितियों में इसे व्यावहारिक नहीं मानते। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत में मौसम के अनुसार अलग-अलग स्थायी स्कूल टाइमिंग लागू की जानी चाहिए? क्या गर्मी और सर्दी के लिए अलग-अलग समय-सारिणी तय होनी चाहिए, ताकि बार-बार होने वाले अचानक बदलाव से विद्यार्थियों और अभिभावकों को राहत मिल सके?


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