दिल्ली EV नीति 2026 पर घमासान, ट्रांसपोर्ट संगठनों ने खोला मोर्चा
टेन न्यूज़ नेटवर्क
New Delhi News (01 July 2026): दिल्ली सरकार की नई इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति 2026 आज 1 जुलाई से लागू होने के साथ ही राजधानी में विवाद गहरा गया है। देश के प्रमुख परिवहन संगठनों ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) और दिल्ली कॉन्ट्रैक्ट बस एसोसिएशन (DCBA) ने नीति को अव्यावहारिक और परिवहन उद्योग के लिए नुकसानदायक बताते हुए इसका खुला विरोध किया है। संगठनों का कहना है कि सरकार बिना पर्याप्त तैयारी और सभी हितधारकों से व्यापक चर्चा किए कमर्शियल वाहनों, स्कूल बसों और चार्टर्ड बसों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उनका आरोप है कि यदि यही व्यवस्था जारी रही तो परिवहन क्षेत्र के हजारों ऑपरेटर गंभीर आर्थिक संकट में फंस जाएंगे।
ट्रांसपोर्ट संगठनों का कहना है कि मौजूदा समय में अधिकांश बसें CNG या BS-VI डीजल तकनीक पर चल रही हैं, जिन्हें कुछ वर्ष पहले स्वयं सरकार ने पर्यावरण के अनुकूल बताते हुए बढ़ावा दिया था। इसी भरोसे पर ऑपरेटरों ने बैंकों से भारी ऋण लेकर करोड़ों-अरबों रुपये का निवेश किया। अब 15 वर्ष की वैध परिचालन अवधि पूरी होने से पहले ही इन वाहनों को हटाकर इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने का दबाव बनाया जा रहा है, जिससे उद्योग पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा। संगठनों का यह भी कहना है कि दिल्ली में अभी तक पर्याप्त EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध नहीं है और बिजली की लागत भी अधिक होने के कारण नई नीति व्यावहारिक नहीं मानी जा सकती।
AIMTC और DCBA ने चेतावनी दी है कि यदि नीति को इसी रूप में लागू किया गया तो हजारों ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर दिवालिया होने की कगार पर पहुंच सकते हैं, बैंकों के व्यावसायिक ऋण डिफॉल्ट होने का खतरा बढ़ जाएगा और स्कूल बसों से लेकर कार्यालय आने-जाने वाले यात्रियों की परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसके साथ ही आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने वाली लॉजिस्टिक्स प्रणाली पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई है। संगठनों ने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि पर्यावरण संरक्षण के नाम पर कुछ विशेष हित समूहों के दबाव में फैसले लिए जा रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर आवश्यक सुविधाएं अभी विकसित नहीं हुई हैं।
ईवी नीति के अलावा ट्रांसपोर्ट संगठनों ने दिल्ली में प्रवेश करने वाले भारी ट्रकों से होने वाले प्रदूषण संबंधी हालिया अध्ययन पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अध्ययन की कार्यप्रणाली और सैंपल सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, इसलिए उसके निष्कर्षों को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। संगठनों के अनुसार ट्रकों को दिल्ली में मुख्य रूप से रात और सुबह प्रवेश की अनुमति होती है, इसलिए उसी समय प्रदूषण का प्रतिशत अधिक दिखाई देना स्वाभाविक है। AIMTC और DCBA ने सरकार को साफ चेतावनी दी है कि यदि सभी पक्षों से बातचीत कर नीति में संशोधन नहीं किया गया तो देशभर के ट्रांसपोर्टर्स व्यापक आंदोलन छेड़ेंगे और जरूरत पड़ने पर ‘चक्का जाम’ जैसे बड़े कदम भी उठाए जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।
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