“मै मजबूरी में भूख हड़ताल पर बैठा हूं”: सोनम वांगचुक

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (29 June 2026): नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहा शिक्षा सुधार आंदोलन अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है। धरने के नौवें दिन पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने छह छात्र नेताओं के साथ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। अनशन शुरू करने से पहले सभी आंदोलनकारी राजघाट पहुंचे, जहां उन्होंने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके अहिंसक संघर्ष के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। इसके बाद वे जंतर-मंतर पहुंचे और भूख हड़ताल शुरू की। आंदोलन को भारतीय किसान यूनियन, कई खाप पंचायतों और बड़ी संख्या में छात्रों का समर्थन मिला है। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को समाप्त करने और नई शिक्षा नीति (NEP 2020) को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

भूख हड़ताल शुरू करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा कि वह जिनेवा से सीधे दिल्ली आए हैं और पहले ही सरकार को अपनी मांगों से अवगत करा चुके थे। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिलने के कारण उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से शांतिपूर्ण प्रतिरोध का रास्ता अपनाना पड़ा। वांगचुक ने कहा, “मैं खुशी से नहीं, मजबूरी में अनशन पर बैठा हूं। लोकतंत्र में जब सरकार जनता की आवाज नहीं सुनती, तब शांतिपूर्ण आंदोलन ही अंतिम विकल्प बचता है।” उन्होंने बताया कि वह पिछले चार दशकों से शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे हैं और उनका मानना है कि देश की अधिकांश समस्याओं का समाधान बेहतर शिक्षा व्यवस्था से ही संभव है। इसलिए छात्रों की आवाज को मजबूत करने के लिए उन्होंने इस आंदोलन में शामिल होने का निर्णय लिया।

सोनम वांगचुक ने शिक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी इस आंदोलन का अहम मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि हिमालय और लद्दाख का पर्यावरण केवल स्थानीय नहीं, बल्कि पूरे देश की साझा जिम्मेदारी है क्योंकि करोड़ों लोगों की जल आवश्यकताएं इन्हीं क्षेत्रों से पूरी होती हैं। उनके अनुसार स्वच्छ हवा, साफ पानी और सुरक्षित भविष्य के लिए पर्यावरण संरक्षण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा और पर्यावरण जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार की चुप्पी ने उन्हें अनशन करने के लिए मजबूर किया है। उन्होंने भीषण गर्मी के बावजूद आंदोलन में शामिल हो रहे छात्रों और नागरिकों के उत्साह को लोकतंत्र की ताकत का प्रतीक बताया।

वहीं CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि यह भूख हड़ताल छात्रों को न्याय दिलाने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शुरू की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पहुंचने से पहले 500 से अधिक किसानों को नजरबंद किया गया ताकि वे आंदोलन में शामिल न हो सकें। सोनम वांगचुक के साथ AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा, जेएनयू छात्रसंघ के संयुक्त सचिव दानिश अली, AISA उत्तर प्रदेश अध्यक्ष मनीष, दिल्ली विश्वविद्यालय इकाई के उपाध्यक्ष दीपक, जेएनयू बराक हॉस्टल के अध्यक्ष हृषिकेश और अंबेडकर विश्वविद्यालय छात्र परिषद के पूर्व सदस्य आमीन भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। छात्र नेताओं ने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।


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