दिल्ली चुनाव के नतीजों पर टेन न्यूज नेटवर्क का नवीनतम आकलन, किसकी बनेगी सरकार?

टेन न्यूज नेटवर्क

नई दिल्ली (07 फरवरी, 2025): बीते 5 फरवरी को हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे 8 फरवरी को घोषित होंगे, लेकिन टेन न्यूज़ ने चुनाव से पहले विभिन्न मतदाताओं, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशंस (RWAs), व्यापारिक संगठनों, अनधिकृत कॉलोनियों , शहरी गांव और अन्य तबकों से बातचीत कर एक आकलन तैयार किया है। इसके अनुसार, आम आदमी पार्टी (AAP) को करीब 60% सीट, बीजेपी को 35% और कांग्रेस एवं अन्य को 5% सीट मिलने की संभावना है। इस आंकड़े को सीटों के फॉर्मेट में देखें तो आम आदमी पार्टी को लगभग 42- 45 सीट, भाजपा को 21-23 सीट और कांग्रेस को 1- 2 सीट और AIMIM को 1- 2 सीट आने की संभावना है।।

कोई लहर नहीं, सिर्फ कड़ी टक्कर

इस चुनाव में न तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोई खास लहर दिखी और न ही आप संयोजक अरविंद केजरीवाल की। मतदाताओं ने किसी भी करिश्माई नेतृत्व के बजाय स्थानीय मुद्दों और उम्मीदवारों को ध्यान में रखते हुए मतदान किया। बीजेपी ने पूरे चुनाव में मोदी जी के चेहरे पर वोट मांगे, लेकिन राष्ट्रीय मुद्दे दिल्ली के मतदाताओं को ज्यादा प्रभावित नहीं कर सके। दूसरी ओर, AAP ने बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे बुनियादी सुविधाओं के मुद्दों पर जोर दिया, जिससे उसे फायदा होता दिख रहा है। हालांकि, इसे “केजरीवाल लहर” कहना भी सही नहीं होगा, क्योंकि चुनावी मुकाबला काफी कड़ा था।

बीजेपी को नुकसान, लेकिन वोट बैंक बरकरार

बीजेपी ने इस चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और अन्य बड़े नेताओं ने कई रैलियां कीं। पार्टी ने राम मंदिर, राष्ट्रीय सुरक्षा और अन्य बड़े मुद्दों को भुनाने की कोशिश की, लेकिन योगी आदित्यनाथ की कमी भी दिखाई दी । आख़िरकार दिल्ली के मतदाताओं ने स्थानीय मुद्दों को ज्यादा अहमियत दी।

फिर भी, बीजेपी को 35-38% वोट मिलने का अनुमान है, जो यह दर्शाता है कि पार्टी का कोर वोटर अभी भी उसके साथ है। व्यापारियों और पारंपरिक बीजेपी समर्थकों ने पार्टी को समर्थन दिया, लेकिन उनकी संख्या उतनी नहीं दिखी कि बीजेपी को जीत दिला सके।

AAP को बढ़त, लेकिन इसे लहर कहना गलत होगा

AAP ने पिछले कुछ वर्षों में बिजली-पानी मुफ्त, शिक्षा और स्वास्थ्य पर काम किया, जिससे उसे फायदा होता दिख रहा है। हालांकि, जनता ने इस बार किसी भी पार्टी के लिए जबरदस्त उत्साह नहीं दिखाया।

अनधिकृत कॉलोनियों और गरीब तबके के बीच AAP की पकड़ मजबूत बनी रही, जिससे पार्टी को बढ़त मिल रही है। हालांकि, कई सीटों पर बीजेपी और AAP के बीच कड़ी टक्कर भी देखने को मिलेगी।

कांग्रेस हाशिए पर

इस चुनाव में कांग्रेस लगभग नदारद रही। पार्टी के बड़े नेता प्रचार में ज्यादा सक्रिय नहीं दिखे, जिससे संगठन भी कमजोर पड़ा। इसका नतीजा यह हुआ कि कांग्रेस एवं अन्य पार्टी को सिर्फ 5% सीट मिलने का अनुमान है। पार्टी का परंपरागत मुस्लिम और दलित वोट बैंक भी इस बार AAP की तरफ जाता दिख रहा है।

RWAs और व्यापारियों की राय – स्थानीय मुद्दे अहम रहे

टेन न्यूज़ ने दिल्ली के रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWAs), ट्रेडर्स एसोसिएशनों और अनधिकृत कॉलोनियों के लोगों से बातचीत की। उनकी राय थी कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में कई जरूरी काम किए हैं, जिससे सरकार के प्रति जनता में विश्वास बना हुआ है।

हालांकि, कई व्यापारियों और मध्यम वर्गीय मतदाताओं में AAP की नीतियों को लेकर असंतोष भी था, लेकिन उन्होंने BJP के बजाय स्थानीय उम्मीदवारों पर ध्यान दिया।

जीत का अंतर कम रहेगा

हालांकि, आम आदमी पार्टी को ज्यादा वोट मिलने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन हर सीट पर उम्मीदवारों के बीच मुकाबला कड़ा रहेगा। कई सीटों पर जीत-हार का अंतर 3,000 से 5,000 वोटों के बीच रह सकता है| AIMIM की 1-2 सीट्स पर जीत दिल्ली में असदुद्दीन ओवैसी की एंट्री मुस्लिम समुदाय में सशक्त हो सकती है

8 फरवरी को नतीजे तय करेंगे असली तस्वीर

यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह सिर्फ एक आकलन है और वास्तविक नतीजे 8 फरवरी को मतगणना के बाद ही साफ होंगे। अचूक अंदाज़ लगाना मुश्किल है क्योंकि मतदाता पार्टी , कैंडिडेट के साथ साथ अब फाइनेंसियल, इकोनॉमिकल, सायकोलॉजिकल, कल्चरल, कम्युनल और सोशल फैक्टर्स पर भी निर्भर करता है।।


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