GIMS बवाल में पुलिस का बड़ा एक्शन, 7 गिरफ्तार; CCTV से होगी उपद्रवियों की पहचान

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (26/06/2026): राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (GIMS) में आउटसोर्स कर्मचारियों के आंदोलन के दौरान हुए हंगामे और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। अस्पताल प्रशासन की शिकायत के आधार पर कासना कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने प्रारंभिक कार्रवाई के तहत सात लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि 46 अन्य को निजी मुचलके पर रिहा किया गया है। अब पूरे घटनाक्रम की तह तक पहुंचने के लिए सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार आउटसोर्स कर्मचारी 15 जून से विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर थे। इस आंदोलन के चलते अस्पताल की नियमित स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने लगी थीं और उपचार के लिए आने वाले मरीजों व उनके परिजनों को लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।

प्रशासन का कहना है कि आंदोलनकारी ओपीडी के मुख्य प्रवेश द्वार और पंजीकरण काउंटर के समीप धरने पर बैठे थे, जिससे मरीजों की आवाजाही प्रभावित हो रही थी। स्थिति को सामान्य बनाने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने कई दौर की बातचीत की तथा प्रदर्शनकारियों से धरना समाप्त करने या स्थान बदलने का अनुरोध किया, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी।

GIMS के निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. राकेश गुप्ता द्वारा दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आंदोलन के दौरान कुछ लोगों ने उग्र होकर अस्पताल परिसर में तोड़फोड़ की। कुर्सियां, मेज, अन्य फर्नीचर और दरवाजों के शीशों को नुकसान पहुंचाया गया। साथ ही अस्पताल के कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार, गाली-गलौज और धमकी देने के आरोप भी लगाए गए हैं। प्रशासन का यह भी दावा है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ बाहरी तत्व भी मौके पर पहुंच गए थे, जिनकी मौजूदगी से माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया तथा घटनाक्रम ने हिंसक रूप ले लिया।

घटना के बाद पुलिस ने बुधवार रात व्यापक कार्रवाई करते हुए कुल 53 लोगों को हिरासत में लिया। पूछताछ के बाद सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 46 लोगों को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया। गिरफ्तार किए गए लोगों में नोएडा चौड़ा निवासी अंकित, डाबरा (दादरी) निवासी अमित, चरखी निवासी अंजली चौधरी, दनकौर निवासी अभिषेक, चपरगढ़ निवासी हरेंद्र, रबूपुरा निवासी विशाल तथा बुलंदशहर निवासी रश्मि शामिल हैं।

पुलिस अब अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग, मोबाइल वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि तोड़फोड़, हंगामे और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने की घटनाओं में किन-किन लोगों की प्रत्यक्ष भूमिका रही।

कासना कोतवाली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जिन लोगों की संलिप्तता सामने आएगी, उन्हें भी नामजद कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

एडीसीपी ग्रेटर नोएडा संतोष कुमार ने बताया कि पूरे मामले की निष्पक्ष और साक्ष्य आधारित जांच की जा रही है। आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की भूमिका भी जांच के दायरे में रखी गई है। यदि जांच के दौरान किसी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पताल जैसे अत्यंत संवेदनशील संस्थान में कानून-व्यवस्था भंग करने, स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा डालने तथा सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस सभी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।


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