योग भारतीय संस्कृति का प्राणतत्व, स्वस्थ और संतुलित जीवन का आधार: कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक

टेन न्यूज नेटवर्क

New Delhi News (21/06/2026): अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय और संस्कृत अकादमी, दिल्ली सरकार के संयुक्त तत्वावधान में “स्वस्थ आयु के लिए योग” विषयक विशेष कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर देशभर से आए शिक्षाविदों, योगाचार्यों, विद्वानों और विद्यार्थियों ने योग के महत्व पर अपने विचार साझा किए तथा सामूहिक योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन का संदेश दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि योग भारत की प्राचीन ऋषि परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जो व्यक्ति को शारीरिक सुदृढ़ता, मानसिक संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते तनाव, अनियमित जीवनशैली और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बीच योग मानव जीवन को संतुलित करने का सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है।

कुलपति ने कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि एक संपूर्ण जीवन-दर्शन है, जो व्यक्ति को आत्मअनुशासन, सकारात्मक सोच और नैतिक मूल्यों से जोड़ता है। उन्होंने युवाओं और विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे योग को केवल एक दिवस तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं। उन्होंने संस्कृत और योग को भारतीय ज्ञान परंपरा के ऐसे दो स्तंभ बताया, जो विश्व मानवता को संतुलित और मूल्याधारित जीवन की दिशा प्रदान करते हैं।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय सह-संगठन मंत्री सतीश कुमार ने कहा कि योग स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया के अधिकांश देशों द्वारा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाना भारत की सांस्कृतिक शक्ति और आध्यात्मिक विरासत की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है। उनके अनुसार योग केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय विकास का भी सशक्त माध्यम है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में बढ़ती बीमारियों और महंगी चिकित्सा व्यवस्था के बीच योग सबसे सरल, सस्ता और प्रभावी समाधान बनकर सामने आया है। यदि समाज नियमित रूप से योग को अपनाए तो अनेक स्वास्थ्य समस्याओं को प्रारंभिक स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सकता है।

विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. पवन कुमार शर्मा ने कहा कि योग व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ उसके मानसिक और भावनात्मक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नियमित योगाभ्यास व्यक्ति में आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और अनुशासन का विकास करता है।

वित्त अधिकारी संतोष कुमार श्रीवास्तव ने अपने विचार रखते हुए कहा कि स्वस्थ शरीर ही जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति है और योग इस संपत्ति की रक्षा का सबसे प्रभावी साधन है। उन्होंने सभी लोगों से योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आग्रह किया।

इस अवसर पर गुरुकुल रावलधाम, बहरोड़ (राजस्थान) के स्वामी सच्चिदानंद सरस्वती ने योग के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग मन, शरीर और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करता है। उन्होंने इसे आत्मबोध और आत्मानुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण साधना बताया।

प्रो. लक्ष्मी मिश्रा ने विद्यार्थियों के जीवन में योग की उपयोगिता पर चर्चा करते हुए कहा कि नियमित योगाभ्यास से एकाग्रता, स्मरणशक्ति और मानसिक क्षमता में वृद्धि होती है। वहीं गुरुकुल गौतम नगर के प्रधानाचार्य आचार्य योगेश कुमार ने योग को भारतीय संस्कृति का प्राणतत्व बताते हुए कहा कि यह व्यक्ति को स्वयं के वास्तविक स्वरूप से परिचित कराता है और जीवन में संतुलन स्थापित करता है।

राजस्थान विश्वविद्यालय के विजिटिंग फैकल्टी सदस्य निपुण ने कहा कि योग ने वैश्विक स्तर पर भारत की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। वहीं शैलजानंद मिश्र ने पतंजलि योगसूत्रों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए योग को अनुशासित और मूल्यनिष्ठ जीवन का आधार बताया।

कार्यक्रम के दौरान आचार्य सुंदर शास्त्री ने अपने भजनों के माध्यम से भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा का भावपूर्ण प्रस्तुतीकरण किया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने सराहा।

कार्यक्रम के संयोजक, छात्र कल्याण अधिष्ठाता एवं योग विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. मार्कण्डेय नाथ तिवारी ने कहा कि योग को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने इसे स्वस्थ, जागरूक और आत्मनिर्भर राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण आधार बताया।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. हर्ष शुक्ला, प्रियंका पाण्डेय और कलावती आर्य की महत्वपूर्ण भूमिका रही। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. हरि राम मीणा ने प्रस्तुत किया, जबकि संचालन डॉ. रमेश कुमार ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय के सहायक अभियंता अजनी कुमार राय भी कार्यक्रम में विशेष रूप से मौजूद रहे।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के इस आयोजन ने न केवल योग के प्रति जन-जागरूकता को मजबूत किया, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक मूल्यों और वैश्विक कल्याण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी प्रभावी ढंग से रेखांकित किया। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि योग आज केवल भारत की पहचान नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के बेहतर और स्वस्थ भविष्य का मार्गदर्शक बन चुका है।


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