टिंडर रोमांस बना साइबर फ्रॉड, महिला जज गंवा बैठीं 52 लाख
टेन न्यूज नेटवर्क
National News (20/06/2026): ऑनलाइन डेटिंग और साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें हरियाणा की एक महिला न्यायिक अधिकारी कथित रूप से रोमांस स्कैम का शिकार हो गईं। आरोपी ने पहले प्रेम संबंध का जाल बिछाया और फिर निवेश पर भारी मुनाफे का लालच देकर उनसे 52 लाख रुपये से अधिक की रकम ठग ली।
मामले की सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि कथित ठगी का पता चलने के बाद महिला न्यायिक अधिकारी ने अपनी पहचान सार्वजनिक होने और पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने के डर से खुद शिकायतकर्ता बनने के बजाय अपनी घरेलू सहायिका (नौकरानी) के नाम से एफआईआर दर्ज कराई।
जानकारी के अनुसार, नवंबर 2025 में महिला न्यायिक अधिकारी ने डेटिंग एप Tinder पर “Altruistic Joy” नाम से एक प्रोफाइल बनाई थी। इसी दौरान उनकी मुलाकात दीपक वत्स नामक व्यक्ति से हुई, जिसने खुद को एक संवेदनशील और उच्च स्तरीय सरकारी विभाग का अधिकारी बताते हुए “अभिमन्यु वशिष्ठ” नाम से परिचय दिया।
बातचीत बढ़ने के साथ दोनों के बीच विश्वास और नजदीकियां बढ़ीं। इसी दौरान आरोपी ने महिला अधिकारी को एक आकर्षक निवेश योजना में पैसा लगाने के लिए प्रेरित किया और कम समय में भारी रिटर्न मिलने का भरोसा दिलाया।
आरोपी के झांसे में आकर महिला न्यायिक अधिकारी ने अलग-अलग किश्तों में कुल 52,81,999 रुपये आरोपी द्वारा बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। हालांकि, निवेश पर कोई लाभ नहीं मिला और आरोपी लगातार बहाने बनाता रहा। इसके बाद महिला अधिकारी को अपने साथ ठगी होने का एहसास हुआ।
मामले के अनुसार, 1 फरवरी 2026 को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में शिकायत दर्ज कराई गई। लेकिन शिकायतकर्ता के रूप में महिला न्यायिक अधिकारी की बजाय उनकी घरेलू सहायिका दीक्षा देवी का नाम दर्ज कराया गया। जांच के दौरान सामने आया कि वास्तविक पीड़िता स्वयं न्यायिक अधिकारी थीं।
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में आरोपी दीपक वत्स की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर गंभीर चिंता व्यक्त की कि एक न्यायिक अधिकारी ने अदालत और जांच एजेंसियों के समक्ष अपनी वास्तविक पहचान छिपाने के लिए किसी अन्य व्यक्ति को शिकायतकर्ता के रूप में प्रस्तुत किया।
अदालत ने जांच में संभावित कमियों को लेकर भी प्रश्न उठाए और जांच एजेंसियों को निर्देश दिया कि मामले से जुड़े डिजिटल साक्ष्य, विशेष रूप से व्हाट्सएप चैट, टिंडर प्रोफाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डेटा, सुरक्षित रखे जाएं ताकि जांच निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन डेटिंग प्लेटफॉर्म पर बढ़ते रोमांस स्कैम के मामलों के बीच यह घटना एक बड़ा सबक है। साइबर अपराधी अक्सर फर्जी पहचान, भावनात्मक जुड़ाव और निवेश के लालच का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बनाते हैं। ऐसे में किसी भी ऑनलाइन परिचित व्यक्ति को धनराशि भेजने से पहले उसकी पहचान और दावों का सत्यापन करना बेहद जरूरी है।
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