टेलीग्राम पर केंद्र सरकार का बड़ा आरोप, आतंकवादी गतिविधियों का सबसे आसान प्लेटफॉर्म बन चुका है ऐप
टेन न्यूज नेटवर्क
New Delhi News (18 June 2026): भारत में सिक्योर मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा एक सप्ताह के लिए लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध के खिलाफ टेलीग्राम ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, लेकिन सुनवाई के दौरान सरकार ने ऐप को लेकर गंभीर चिंताएं जाहिर की हैं। सॉलिसिटर जनरल ने अदालत में कहा कि टेलीग्राम आतंकवादी गतिविधियों, संगठित अपराध और अन्य गैरकानूनी कामों के लिए सबसे आसान और सुविधाजनक प्लेटफॉर्म बन गया है। सरकार ने यह भी बताया कि इस मामले में अपना विस्तृत जवाब कोर्ट रजिस्ट्री में दाखिल कर दिया गया है और रिकॉर्ड पर आने के बाद आगे की सुनवाई होगी।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि टेलीग्राम को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया था और उसकी दलीलों पर विचार करने के बाद ही जांच समिति ने अपने निष्कर्ष तैयार किए। सरकार के मुताबिक इस समिति की अगुवाई कैबिनेट सचिव ने की थी और उसकी रिपोर्ट के आधार पर ही फैसला लिया गया। हाई कोर्ट ने सरकार से पूछा कि यदि आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल किया गया है तो क्या 48 घंटे के भीतर सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य नहीं है। इस पर सरकार ने कहा कि टेलीग्राम को सुनवाई का पूरा मौका दिया गया था और सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने टेलीग्राम की याचिका पर फैसला फिलहाल सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया कि क्या किसी एक व्यक्ति या संस्था के अधिकारों की रक्षा करने के लिए दूसरे पक्ष के अधिकारों को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जा सकता है। वहीं सॉलिसिटर जनरल ने दलील दी कि यदि टेलीग्राम पर अवैध गतिविधियां होती हैं तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। उन्होंने विशेष रूप से ऐप के बैकडेटिंग फीचर का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी संदेश की तारीख और समय तक बदलने की सुविधा जांच एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती पैदा करती है और इसका दुरुपयोग अपराधी तत्व कर सकते हैं।
सरकार का कहना है कि टेलीग्राम के कई ऐसे फीचर हैं जो अपराधियों और साइबर ठगों के लिए इसे आकर्षक प्लेटफॉर्म बना देते हैं। उदाहरण के तौर पर बिना फोन नंबर सार्वजनिक किए चैटिंग करने की सुविधा और कुछ अन्य गोपनीयता संबंधी विकल्पों के कारण संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाना कठिन हो जाता है। सरकार का दावा है कि इसी वजह से स्कैमर्स, पेपर लीक गिरोह और अन्य आपराधिक नेटवर्क इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने लगे हैं। हाल ही में NEET परीक्षा से जुड़े पेपर लीक विवाद के बाद एहतियात के तौर पर परीक्षा अवधि तक टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया था।
दूसरी ओर टेलीग्राम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा है कि किसी ऐप पर प्रतिबंध लगाने से पेपर लीक जैसी घटनाएं नहीं रुकेंगी, क्योंकि गलत इरादे वाले लोग दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि करोड़ों वैध उपयोगकर्ताओं को कुछ लोगों की गलती की सजा क्यों दी जा रही है। फिलहाल मामला दिल्ली हाई कोर्ट में विचाराधीन है और अब अदालत का अंतिम फैसला ही तय करेगा कि भारत में टेलीग्राम पर लगाया गया प्रतिबंध जारी रहेगा या कंपनी को राहत मिलेगी।
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